योगी राज में जल निगम में 300 करोड़ का घोटाला, चेयरमैन और एमडी संलिप्त

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भ्रष्टाचार पर योगी सरकार का सेल्फी वार
लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को कुर्सी पर बैठे छह महीनों का कार्यकाल पूरा हो गया है। इस बीच योगी आदित्यनाथ अपनी ईमानदार छवि को बरकरार रखने में भले ही कामयाब रहे हों लेकिन उनके सिपहसलारों ने इन्हीं छह महीनों में सरकार की बद्नामी करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। ताजा मामला योगी सरकार के सबसे काबिल कैबिनेट मंत्री सुरेश खन्ना के विभाग से जुड़ा है। जहां खन्ना ​के विश्वासपात्रों ने मिलकर सरकारी खजाने को 300 करोड़ की चोट पहुंचा दी।…

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को कुर्सी पर बैठे छह महीनों का कार्यकाल पूरा हो गया है। इस बीच योगी आदित्यनाथ अपनी ईमानदार छवि को बरकरार रखने में भले ही कामयाब रहे हों लेकिन उनके सिपहसलारों ने इन्हीं छह महीनों में सरकार की बद्नामी करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। ताजा मामला योगी सरकार के सबसे काबिल कैबिनेट मंत्री सुरेश खन्ना के विभाग से जुड़ा है। जहां खन्ना ​के विश्वासपात्रों ने मिलकर सरकारी खजाने को 300 करोड़ की चोट पहुंचा दी। जिसकी जानकारी मंत्री जीे को भी होने की बात सामने आ रही है।

मामला नगर विकास विभाग के अंतर्गत आने वाले यूपी जल निगम से जुड़ा हैं। निगम के चेयरमैन जी पटनायक और प्रबंध निदेशक राजेश मित्तल ने नियमों को ताक पर चढ़ा दिया और 300 करोड़ की रकम बिना किसी राजाज्ञा के विभागीय खर्चों पर न्यौछावर कर दी। सबसे बड़ी बात यह रही यह रकम जल निगम की ओर से वापस यूपी सरकार के खजाने में जमा करवाई जानी थी।

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सूत्रों से मिल रही जानकारी के मुताबिक 300 करोड़ की यह रकम जल निगम के खातों पर बैंक से ब्याज के रूप में मिले थे। नियमानुसार निगम के खातों पर मिलने वाला ब्याज उन खातों में वापस जाता है जहां से विकास कार्यों की धनराशि जारी की जाती है। यानी केन्द्र सरकार ​द्वारा करवाए जाने वाले विकास कार्यों के लिए आई धनराशि पर मिलने वाला ब्याज केन्द्र सरकार के खाते में वापस जाता है और राज्य सरकार के खातों से आने वाली रकम का ब्याज राज सरकार के राजकोष को दिया जाता है।

लेकिन योगी सरकार में जल निगम के चेयरमैन बने विभागीय मंत्री के करीबी जी पटनायक और एमडी राजेश मित्तल ने अपने विवेक से ब्याज की इस रकम को विभाग की पूंजी के रूप में प्रयोग करते हुए, ज​ल निगम और सीएंडडीएस के कर्मचारियों के कई महीनों के लंबित वेतन का भुगतान कर डाला है। शेष का भुगतान करने की तैयारी चल रही है।

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सेंटेज की कमाई से अपने खर्चे पूरे करती है जल निगम—

जानकारों की माने तो यूपी जल निगम को जितने भी विकास कार्य करने का जिम्मा मिलता है, प्रत्येक की कुल लागत पर निगम सेंटेज के रूप में लगभग 12 प्रतिशत कमीशन बसूल करता है। इसी सेंटेज से जल निगम अपने कर्मचारियों को वेतन और भत्तों का खर्च उठाता है।

बताया जा रहा है कि गत् अखिलेश सरकार के कार्यकाल में तत्कालीन विभागीय मंत्री मो0 आजम खां और निगम के प्रंबध निदेशक के बीच पैदा हुए मतभेदों के चलते निगम के सारे विकास कार्य ठप्प पड़ गए थे। जिसके कारण जल निगम की आमदनी शून्य हो गई थी। इसी दौरान चुनाव आ गए और नई सरकार के सक्रिय होने तक विभाग के कर्मचारियों का कई महीने का वेतन लटक गया। जिसका हल निकालने के लिए नए चेयरमैन और एमडी ने नियमों को ताक पर रख खातों में जमा धन पर मिले ब्याज से अपने कर्मचारियों के वेतन और भत्ते बांट दिए।

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अपने कारनामे पर क्या कहते हैं एमडी और चेयरमैन—

पर्दाफाश ने जब इस विषय पर जल निगम के एमडी राजेश मित्तल से बात करनी चाही तो उनका मोबाइल उनके ​पीएस के पास मिला। जहां से जानकारी प्राप्त हुई कि साहब एक सप्ताह के इजराइल दौरे से वापस लौटे हैं। लगातार मीटिंगों के चलते साहब शासन में गए हैं। जबकि चेयरमैन जी पटनायक के भी छुट्टी पर होने के बात पता चली, जिनके आने में अभी समय लगेगा।

अब ये सवाल उठते हैं —

— उ0प्र0 जल निगम में सरकार द्वारा कार्यों के मद में दी जा रही धनराशि पर विभिन्न बैंकों में जमा धनराशि से प्राप्त होने वाला ब्याज जोकि राजकोष किया जाना चाहिए था को किस राजाज्ञा के तहत कर्मचारियों का वेतन भत्ता दिए जाने के लिए प्रयोग किया गया?

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— 300 करोड़ की धनराशि जो पिछले वर्षों में ब्याज के रूप में प्राप्त हुआ था, को वेतन मद में व्यय कर लिया गया है। जबकि यह धनराशि राजकोष में जमा करवाई जानी चाहिए थी। क्या इस फैसले को लेने के लिए शासकीय सहमति ली गई थी या किसी तरह का प्रस्ताव कैबिनेट के समक्ष पेश हुआ था?

— यूपी जल निगम सीएंडडीएस को वास्तव में कितनी धनराशि ब्याज के रूप में प्राप्त हुई एवं इस रकम में से कितनी धनराशि वेतन मद में व्यय की गई?

— इस धनराशि को राजकोष में जमा क्यों नहीं किया गया? तथा इसे कब तक राजकोष में जमा कर दिया जाएगा ?

— ब्याज से विभाग के खातों में जमा हुई धनराशि को बिना सरकार की अनुमति के किस आदेश के तहत वेतन मद में व्यय किया गया?

 

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