यूपी का एक रहस्यमयी गांव, जहां हर घर में होते हैं तीन दरवाजे

देवरिया। एक तरफ जहां हम भारत को ‘डिजिटल इंडिया’ बनाने में जुटे है वहीं भारत में आज भी कुछ इलाके ऐसे हैं जो अंधविश्वास से नहीं निकल पाये है। कुछ यही हाल है यूपी के देवरिया में बसा मझौली राज गाँव का, जहां लोगों की मानसिकता आज भी रूढ़ीवादी है। हैरान करने वाली बात इस गाँव में बने घर हैं जहां लगभग हर घर में तीन दरवाजे लगे हुए है। जानकारी के मुताबिक हजारों वर्ष पहले जब सूर्य देव के प्रकोप के कारण एक राजवंश विनाश की कगार पर जा खड़ा हुआ, तो ज्योतिषाचार्यों ने इसका विकल्प तीन दरवाजे के रूप में दिया। जिसे वहां के निवासी आज भी निभा रहे है। चौका देने वाली बात ये है कि इस परंपरा को वहां रहने वाले हिन्दू और मुस्लिम सभी निभा रहे हैं।



तीन दरवाज़ो का सच…

यहां बात की जा रही है यूपी के देवरिया से 35 किलोमीटर दूरी पर बसे एक छोटे से गांव ‘मझौली राज’ की। इस छोटे से गांव में कितना कुछ रहस्य छुपा हुआ है इस बात का अंदाज़ा आप इसी बात से लगा लीजिये कि यहां के हर घर में तीन दरवाजे लगे हुए है। घर में तीन दरवाजों का किस्सा और भी चौकाने वाला है। स्थानीय लोगों की मानें तो विशेन वंश वाटिका की किताब में ये लिखा हुआ है कि 1416 ईसवी में यहां के राजा बलभद्र नारायण मल्ल के पूर्वजों ने अपनी सुख सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए नदी के बीचोबीच अपना महल बनवाया। जिस कारण सूर्य की किरणें विपरीत दिशा से महल पर पड़ने लगीं, जिसे सूर्य वेद कहा जाता था। दिशा विपरीत होने के कारण यहाँ की उन्नति रुक सी गयी थी जिसके बाद यहा के राजा का पाटन होने लगा था। इसके बाद पूरे राज्य में त्राहिमाम मच गया। इन सब को देखते हुये ज्योतषाचार्यों ने राजा को सलाह दी कि अगर सूर्य वेद से बचना है, तो नगर के सभी घरों में तीन दरवाजे लगाने के आदेश दे दिए जाएं और तब से आज तक सभी घरों में तीन दरवाजे लगने लगे। लेकिन आज भी वहाँ की उन्नति वैसी ही है, जैसे पहले हुआ करती थी। थोड़ा ही विकास संभव हो पाया है। लेकिन यहां से पलायन करने वाले लोग जहां हैं वो सुख के साथ अपना जीवन-यापन कर रहे हैं।



हिन्दू-मुस्लिम दोनों निभाते है परंपरा
स्थानीय लोगो के मुताबिक ये परंपरा आदि काल से चली आ रही हैं। करीब 80 प्रतिशत लोग आज भी नए मकानो में तीन दरवाजे बनवाते हैं। लोगो का कहना है कि सूर्य भेद के कारण आज भी इस क्षेत्र में नए और पुराने घरों में तीन दरवाजे लगाए जाते हैं, जिससे सूर्य भेद मकानों पे न लगे। ये परंपरा आज कई वर्षों से चली आ रही है। हम लोग इस परपंरा को निभाते आ रहे हैं। हिंदू भाई से लेकर मुस्लि‍म भाई भी इस परंपरा को मानते चले आ रहे हैं।