यूपी के विकास प्राधिकरणों ने बिल्डर्स से मिल किया हजारों करोंड़ का घोटाला

Up Ke Vikas Pradhikarano Ne Builder Se Milkar Kiya Hazaro Karod Ka Ghotala

लखनऊ। पिछले 15 सालों में तेजी से बढ़े गाजियाबाद, लखनऊ, कानपुर जैसे यूपी के कई बड़े शहरों में आशियाने के नाम पर जिस तरह की लूट हुई वह किसी से छुपी नहीं है। गांव से निकल शहर पहुंचे लोगों को प्राइवेट बिल्डर्स और लैंड डेव्लपर्स ने हर तरह से लूटा है। जिसमें इन शहरों के विकास प्राधिकरणों में बैठे जिम्मेदार अधिकारियों ने आंखे मूंदने के नाम पर करोड़ों के वारे न्यारे कर डाले।




विकास प्राधिकरणों की कार्यप्रणाली को करीब से जानने वाले लोगों की माने तो गत् 15 वर्षों में महानगरों में खड़ी हुई सभी प्राइवेट हाउसिंग योजनाओं में अपने सपनों का घर बनाने वालों के साथ बड़े स्तर पर लूट हुई है। प्राधिकरणों के मानकों की अनदेखी कर प्राइवेट डेवलपर्स और बिल्डर्स ने करोड़ों का मुनाफा कमाया। जिसका बड़ा हिस्सा मानकों में चोरी करने की मिली छूट के लिए घूस के रूप में चुकाया गया।




प्राइवेट हाउसिंग परियोजनाओं को पास करवाते समय डेवलपर्स ने सड़कों की चौड़ाई और पार्कों के निर्माण के लिए जगह छोड़ी लेकिन ग्राहकों को न तो उस हाउसिंग में पार्क मिले और न ही चौड़ी सड़कें। ऐसा ही हाल प्राइवेट बिल्डर्स के प्रोजेक्ट्स में देखने को मिला। जिन्हें पास करवाने के लिए तो विकास प्राधिकरणों के मानकों को शामिल किया गया लेकिन वा​स्तविकता में उन मानकों की अनदेखी कर करोंड़ोंं के वारे न्यारे कर लिए गए। बिल्डर्स ने तो अपने ग्राहकों को वादे के मुताबिक क्षेत्रफल दिया और न ही वे सुविधाएं जो प्राधिकरणों के मानक के अनुसार किसी हाउसिंग प्रोजेक्ट में होनी चाहिए।

हालांकि अब यूपी सरकार ने विकास प्राधिकरणों की आॅडिट करवाने का फैसला ले लिया है। जिसके बाद उम्मीद की जा सकती है कि गत् 15 सालों में विकास प्राधिकरणों के द्वारा किए गए कारनामे एक एक कर सामने आएंगे। वहीं दूसरी ओर उन बिल्डर्स के खिलाफ भी जुर्माने जैसी कार्रवाई हो सकेगी जिन्होंने अपने ग्राहकों की सुरक्षा और सुविधा के नाम पर मोटी रकम तो बसूली लेकिन दिया कुछ नहीं।

जल्द ही प्राधिकरणों में चल रहे गोरखधंधे का पर्दाफाश खुलासा करेगा।

लखनऊ। पिछले 15 सालों में तेजी से बढ़े गाजियाबाद, लखनऊ, कानपुर जैसे यूपी के कई बड़े शहरों में आशियाने के नाम पर जिस तरह की लूट हुई वह किसी से छुपी नहीं है। गांव से निकल शहर पहुंचे लोगों को प्राइवेट बिल्डर्स और लैंड डेव्लपर्स ने हर तरह से लूटा है। जिसमें इन शहरों के विकास प्राधिकरणों में बैठे जिम्मेदार अधिकारियों ने आंखे मूंदने के नाम पर करोड़ों के वारे न्यारे कर डाले। विकास प्राधिकरणों की कार्यप्रणाली को करीब से…