यूपी में बाढ़: 700 गांव चपेट में, हजारों लोग पलायन को मजबूर

लखनऊ। नेपाल में भारी बारिश और वहां से छोड़े गये पानी से उत्तर प्रदेश की नदियों में पानी खतरे के निशान से ऊपर जा चुका है। हालात ये हैं कि सरयू और घाघरा नदी से सटे करीब 700 गांव भारी बाढ़ की चपेट में आ गये हैं। बाढ़ प्रभावित इलाकों से ग्रामीणों ने अब पलायन करना शुरू कर दिया है। राहत कार्य के लिये एनडीआरएफ़ टीमों को अलर्ट कर दिया है। सरकार ने बाढ़ग्रस्त इलाकों में तत्काल राहत पहुंचाने के निर्देश दिये हैं। वहीं लापरवाही बरतने पर सख्त कार्रवाई के निर्देश भी दिये गये हैं।

इन इलाकों में बाढ़ ने मचाया तांडव

बहराइच- बाढ़ग्रस्त इलाकों में बहराइच जिले का नाम सबसे ऊपर है। यहां के 111 गावों को बाढ़ ने अपनी चपेट में ले लिया है। तेज पानी के बहाव के चलते दो गावों का आपस मे संपर्क ही टूट गया है। आंकड़ों की मानें तो सिर्फ बहराइच जिले में 1300 लोग बाढ़ की चपेट में आने के बाद फंसे हुए हैं। वहीं घरेहरा गांव के शितेश सिंह(5) की डूबने से मौत भी हो गयी।

फैजाबाद- यहां सरयू-घाघरा नदी खतरे के निशान से 33 सेमी ऊपर बह रही है। फैजाबाद जिले में 22 गावों बाढ़ की चपेट में हैं। सड़कों पर वाहनों की जगह नाव चल रही हैं।

अम्बेडकरनगर- यहां सरयू नदी खतरे के निशान से 36 सेमी ऊपर बह रही है। यहां बाढ़ ने एक दर्जन से अधिक गावों को अपनी चपेट में ले रखा है।

सीतापुर- सीतापुर जिले में 400 गांव बाढ़ की चपेट में हैं। करीब 50 हजार लोग बाढ़ के कहर से प्रभावित हुए हैं। आरोप है कि इन इलाकों में प्रशासनिक मदद ना पहुंचने की वजह से हालात ज्यादा खराब होते जा रहे हैं।

बलरामपुर- इस जिले में राप्ती नदी का जलस्तर कुछ घटा है लेकिन अभी भी 80 गांव बाढ़ की चपेट में है। कटान की वजह से गावों में लगातार पानी भर रहा है।

बाराबंकी- बाराबंकी जिले के 90 गांव बाढ़ के कहर से जलमग्न हैं। घाघरा नदी के कहर ने लोगों को गांव छोड़ने पर मजबूर कर दिया है। यहां नदी के पानी में डूबने से एक अधेड़ की मौत हो गयी है।

क्या कहते हैं जिम्मेदार—

सिंचाई मंत्री धर्मपाल सिंह का कहना है, एनडीआरएफ़ को बाढ़ प्रभावित इलाकों में भेजा गया है। जिला प्रशासन व सिचाई विभाग को भी अलर्ट कर दिया गया है। बाढ़ग्रस्त इलाकों में जन हानि-धन हानि को रोकने का निर्देश दिया गया है।