उप्र में डेंगू के 7 हजार मामले, 13 की मौत




लखनऊ: उत्तर प्रदेश की सरकारी लैबों में अभी तक 19201 व्यक्तियों के रक्त का परीक्षण कराया जा चुका है, इनमें से 7269 लोगों में डेंगू होने की पुष्टि हुई है। जबकि इस घातक ज्वर से 13 लोगों के मुत्यु हो चुकी है। उत्तर प्रदेश सरकार डेंगू मामले में उच्च न्यायालय से मिली फटकार के बाद हरकत में आ गई है। मुख्य सचिव के निर्देशों के बाद रविवार को सार्वजनिक अवकाश होने के बाद भी प्रदेश के समस्त चिकित्सालायो में डेंगू तथा बुखार से पीड़ित मरीजों के उपचार के लिए ओपीडी खुली रही।

प्रमुख सचिव चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण अरूण कुमार सिन्हा ने बताया कि आगामी अवकाश के दिनों में भी राज्य के समस्त चिकित्सालयों की ओपीडी में डेंगू और बुखार से ग्रसित मरीजों का नियमित रूप से उपचार किया जाएगा। सिन्हा ने बताया कि प्रदेश के समस्त मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं सार्वजिनक अवकाश दिनों में मरीजों का समुचित उपचार किया जाए। अवकाश दिवसों में सरकारी अस्पतालों की ओपीडी का समय से संचालन सुनिश्चित हो, ताकि अस्पतालों में आने वाले डेंगू तथा बुखार से पीड़ित मरीजों को किसी प्रकार की असुविधा न हो सके। इसके अलावा बुखार से ग्रस्त मरीजों की जांच भी प्राथमिकता से कराई जाए।

उन्होंने बताया कि प्रदेश की सरकारी लैबों में अभी तक 19201 व्यक्तियों के रक्त का परीक्षण कराया जा चुका है, इनमें से 7269 लोगों में डेंगू होने की पुष्टि हुई है। जबकि इस घातक ज्वर से 13 लोगों के मुत्यु हो चुकी है। उन्होंने बताया कि विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों तथा जनपदों के मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि निजी अस्पतालों में छापेमारी कर डेंगू से पीड़ित मरीजों की वास्तविक जानकारी प्राप्त की जाए और अवैध रूप से संचालित अस्पतालों को तत्काल बंद कराया जाए। इस कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही प्रकाश में आने पर संबंधित अधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा।

सिन्हा ने निर्देश दिए कि अवकाश दिवसों में अस्पतालों में कार्यरत चिकित्सकों एवं अन्य आवश्यक कर्मियों की उपलब्धता सुनिश्चित होनी चाहिए। विशेष परिस्थितियों को छोडकर किसी भी कर्मी को छुट्टी न दी जाए। अस्पतालों में दवाइयों की कमी नहीं होनी चाहिए। बुखार से पीड़ित मरीजों के उपचार में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को खासतौर से यह भी निर्देश दिए हैं कि अवकाश दिवसों में अस्पतालों का औचक निरीक्षण करें और चिकित्सा व्यवस्था को चाक-चैबंद बनाये रखने के लिए कड़े कदम उठाए जाएं।