सीबीआई के निशाने पर यूपी निर्माण निगम का भ्रष्टाचार, कई बड़े अधिकारी सवालों के घेरे में

नई दिल्ली। दो साल पहले सीबीआई के हाथ लगी एक डायरी इन दिनों यूपी राजकीय निर्माण निगम (UPRNN) के कई अधिकारियों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है। सीबीआई की एंटी करप्शन ब्रांच के अधिकारी एक शिकायत पर दिल्ली में एक ठेकेदार और सीपीडब्ल्यूडी के अधीक्षण अभियंता के बीच हो रहे घूस के लेन देन पर छापेमारी करने पहुंचे थे। सीबीआई के अधिकारियों ने कार्रवाई के दौरान जब ठेकेदार और इंजीनियर को रंगेहाथों गिरफ्तार किया, तो ठेकेदार के पास से उन्हें कुछ दस्तावेज और एक डायरी बरामद हुई जिसमें उसने अपने काले लेनदेनों को दर्ज कर रखा था। अब सीबीआई ने इसी डायरी को आधार बनाकर ठेकेदार, यूपी राजकीय निर्माण निगम के दो प्रोजेक्ट मैनेजरों और कर्मचारी राज्य बीमा निगम के 6 कर्मियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 120 बी के तहत मामला दर्ज करवाया है।




सीबीआई के हाथ लगी डायरी में यूपी निर्माण निगम के दो प्रोजेक्ट मैनेजर जीपी वर्मा और अनुराग गोयल को विजय निर्माण कंपनी प्राइवेट लिमिटेड की ओर से कई किश्तों में लाखों रूपए कमीशन के रूप में दिए जाने के पुख्ता सुबूत मिले हैं। इन अधिकारियों ने कब, कहां, कितने रुपए का कमीशन किस व्यक्ति के हाथ से लिया इन तमाम बातों का जिक्र उस डायरी में हैं।




यूपीआरएनएन के इंजीनियरों को यह कमीशन कर्मचारी राज्य बीमा निगम के एक प्रोजेक्ट के लिए मिला था, जिसके लिए यूपीआरएनएन को कार्यदायी संस्था के रूप में चयनित किया गया था। इस मामले विजय निर्माण कंपनी के डायरेक्ट को पहले ही सीबीआई रिमांड पर लेकर पहले ही पूछ ताछ कर चुकी है।

सूत्रों की माने तो दो साल पहले सीबीआई के हाथ लगी इस डायरी के मामले में सीबीआई विजय निर्माण कंपनी प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर से पहले ही पूछ ताछ कर चुकी है। अब सीबीआई उन लोगों के खिलाफ सख्त होगी जिनके खिलाफ सुबूत उसके हाथ लग चुके हैं। सीबीआई के अधिकारियों का मानना है कि जिस तरह की कमीशनखोरी सक्ष्यों में सामने आई है वह संगठित रूप से अंजाम दी जा रही थी। अब सीबीआई का लक्ष्य उन लोगों को जांच के घेरे में लेने का है जिनके संरक्षण में ये अधिकारी बड़े स्तर पर कमीशन की उगाही कर रहे थे।




सीबीआई इस एक मामले को कमीशनखोरी के जाल के एक सिरे के रूप में देख रही है। बहुत हद तक संभव है कि सीबीआई यूपीआरएनएन के मुख्यालय में रखी फाइलों और इन प्रोजेक्ट मैनेजरों की निगरानी में रहे अन्य प्रोजेक्ट्स की भी जांच करवाए। जिससे कि विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार को उजागर किया जा सके।

वहीं जानकारों की माने तो, यूपीआरएनएन में प्रोजेक्ट मैनजर की पोस्ट बेहद मलाईदार होते हुए भी बहुत छोटी मानी जाती है। एक प्रोजेक्ट मैनेजर के ऊपर कई और सीनियर इंजीनियर होते हैं। यूपीआरएनएन समेंत यूपी सरकार की तमाम निर्माण इकाईयों में कमीशनखोरी का चलन गत् कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ा है। ​जिससे विभागों की कोई भी कुर्सी शायद ही बची हो।