यूपी सरकार 1 फरवरी को लाएगी 2018—19 का बजट

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को राजधानी लखनऊ स्थित छत्रपति शाहू जी महाराज मेडिकल विश्वविद्यालय में 56 वेंटीलेटरों का लोकार्पण करने के बाद दिए भाषण में कहा कि यूपी का अगला बजट फरवरी 2018 को आएगा। सरकार सुनिश्चित करेगी कि 31 मार्च को यूपी सरकार के विभागों को उनका बजट खर्च करने के लिए मिल जाए।




दरअसल मुख्यमंत्री यूपी के अस्पतालों में मौजूद मशीनरी और संसाधानों के रख रखाव पर अपनी चिन्ता जाहिर कर रहे थे। उन्होंने कहा कि देखा जाए तो लखनऊ मेडिकल कालेज में अभी 150 वेंटीलेटर होंगे। जब इन वेंटीलेटरों में काम करने वाले वेंटीलेटरों की गिनती करते हैं तो सौ भी पूरी नहीं होती। जिसकी वजह है इनके प्रयोग में लापरवाही और रख रखाव की कमी। अगर संसाधनों का प्रयोग हमें करना है तो आवश्यक है कि नियमित तौर पर उनके रख रखाव का ध्यान रखा जाए। आमतौर पर ऐसा नहीं हो पाता। जिसकी वजह है बजट नहीं होना। बजट क्यों नहीं था इसके पीछे की वजह दफ्तरों में मिलती है।




अपने दफ्तर का उदाहरण देते हुए सीएम योगी ने कहा कि 31 मार्च को वह अपने कार्यालय में बैठे तो फाइलों का ढ़ेर देख उन्होंने अधिकारियों से पूछा कि उन्हें कार्यालय में आए दो दिन हुए हैं और इतने कम समय में इतना बड़ा ढ़ेर कहां से आ गया। तो पता चला कि पिछले बजट का जो हिस्सा खर्च नहीं हो पाया उसकी फाइलें हैं। किसी में 40 प्रतिशत शेष था तो किसी में 60 प्रतिशत।

इन तमाम समस्याओं का हल निकालने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सोच और मार्गदर्शन में चलने की बात कहते हुए बताया कि कोई भी योजना हो उसे पूरी तत्पर्ता से चलाना उनकी सरकार की जिम्मेदारी होगी। अगर कोई मशीन लगाई गई है तो उसकी आयु के अनुरूप ही उसके रख रखाव की योजना तैयार होनी चाहिए।




अपने विचार को वास्तविकता में बदलने की योजना का जिक्र करते हुए योगी ने कहा कि अगले वर्ष से यूपी का बजट 1 फरवरी से पेश होगा। जिसके बाद विभागों को उनका बजट 31 मार्च को मिल जाएगा। जिसे एक वर्ष के भीतर खर्च करना होगा और नए वित्तीय वर्ष का नियोजन उसके अगले वर्ष 31 जनवरी से पहले सरकार को देना होगा जिससे विभाग की बजटिंग आसानी से की जा सके।




इसके आगे योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जब तक एक साल में होने वाले काम को एक साल में नहीं किया जाएगा तब तक स्थिति नहीं बदलेगी। किसी योजना को लेकर लापरवाही बरतने से योजना की लागत बढ़ती है और उसका बोझ प्रदेश की जनता पर पड़ता है। आधे अधूरे प्रयासों का लाभ भी जनता को नहीं मिल पाता।