यूपी: SIT ने जलनिगम भर्ती घोटाले में आजम पर चार्जशीट की इजाजत मांगी, परीक्षा कराने वाली एजेंसी अप्टेक भी दोषी

azam khan
यूपी: SIT ने जलनिगम भर्ती घोटाले में आजम पर चार्जशीट की इजाजत मांगी, परीक्षा कराने वाली एजेंसी अप्टेक भी दोषी

लखनऊ। जल निगम में 1300 पदों पर हुई भर्ती के घोटाले में एसआईटी ने रामपुर से सपा सांसद व पूर्ववर्ती अखिलेश सरकार में मंत्री रहे आजम खां, उनके ओएसडी आफाक समेत अन्य के खिलाफ चार्जशीट दाखिल करने की अनुमति मांगी है। एसआईटी ने फरेंसिक जांच में पूर्व मंत्री और एफआईआर में नामजद अन्य आरोपितों के खिलाफ साक्ष्य मिलने के बाद शासन को अपनी रिपोर्ट भेज दी है। नगर विकास विभाग के पूर्व सचिव व रिटायर्ड आईएएस एसपी सिंह को मामले में क्लीन चिट दी गई है।

Up Sit Seeks Permission To Charge Sheet On Azam In Jalnigam Recruitment Scam Exam Conducting Agency Aptech Also Guilty :

इसके साथ ही भर्तियों के लिए ऑनलाइन परीक्षा कराने और रिजल्ट जारी करने वाली एजेंसी अप्टेक ने अधिकारियों के इशारे पर जमकर गड़बड़ियां कीं। ऑनलाइन और परीक्षा के बाद अप्टेक ने आंसर की और नंबर जारी किए बिना ही सीधे रिजल्ट जारी कर दिया। इसके खिलाफ कई अभ्यर्थी कोर्ट चले गए। उनका आरोप था कि कम नंबर वालों को साक्षात्कार के लिए बुलाया गया जबकि ज्यादा नंबर होने के बाद भी उन्हें नहीं बुलाया गया। अप्टेक ने लिखित में अपनी गलती मानी है।

एसआईटी की तरफ से पूर्व मंत्री आजम खां को 17 जनवरी को नोटिस भेजा गया था। एसआईटी का नोटिस मिलते ही आजम 22 जनवरी को बयान दर्ज कराने एसआईटी पहुंच गए थे। करीब दो घंटे की पूछताछ के दौरान आजम ने भर्तियों में हुई गड़बड़ियों के लिए तत्कालीन एमडी पीके आसूदानी को जिम्मेदार बताया था। उनका कहना था कि आसूदानी ने उन्हें धोखे में रहकर फाइलों में हस्ताक्षर करवा लिये। विधानसभा चुनावों से ठीक पहले सपा सरकार के कार्यकाल में जल निगम में सहायक अभियंता, अवर अभियंता व नैतिक लिपिक के पदों के लिए 1,300 भर्तियां की गई थीं।

आचार संहिता से पहले भर्तियां करने के चक्कर में छह सप्ताह में ही प्रक्रिया पूरी कर ली गई। आचार संहिता लगने से ठीक एक दिन पहले भर्तियों का रिजल्ट जारी कर दिया गया। भर्तियों में धांधली की शिकायत लेकर कुछ अभ्यर्थियों ने कोर्ट में याचिका दाखिल कर दी। इस बीच सरकार बदली और मामले की जांच के लिए कमिटी का गठन कर दिया। कमिटी की रिपोर्ट में भर्तियों में हुए गड़बड़झाले के साक्ष्य मिले तो सरकार ने 122 सहायक अभियंताओं को बर्खास्त कर दिया। साथ ही सीएम ने मामले की जांच एसआईटी को सौंप दी।

एसआईटी ने 25 अप्रैल 2018 को इस मामले में आजम खान, आफाक, एसपी सिंह, जल निगम के पूर्व एमडी पीके आसूदानी, चीफ इंजीनियर अनिल खरे व परीक्षा कराने वाली कंपनी अप्टेक खिलाफ आईपीसी की धारा 420, 409, 120बी, 201 व भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज की थी। जांच में खुलासा हुआ कि आजम ने अफसरों के साथ मिलकर चहेतों का चयन करवाया। अप्टेक के कब्जे से ली गई हार्ड डिस्क व अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच में खुलासा हुआ है कि जिन अभ्यर्थियों का चयन किया जाना था उनके नंबरों को सॉफ्टवेयर में छेड़छाड़ कर दोगुना कर दिया गया था।

पड़ताल में सामने आया है कि बोर्ड के बजाय आजम खां ही जल निगम के हर प्रस्ताव को अनुमोदित करते थे। पूर्व मंत्री और अफसरों ने मिलीभगत कर चार ऐसे पदों पर भर्तियां करवा दीं जो थे ही नहीं। भर्ती में कंप्यूटर इंजिनियर (एई) के पद नियमावली में संशोधन किए बगैर ही बना दिए गए, क्योंकि जल निगम में विद्युत व यांत्रिकी इंजिनियर के पद थे। अधिकार न होने के बावजूद आजम ने ऐसी सभी फाइलों पर हस्ताक्षर कर उन्हें पास कर दिया।

पूर्व नगर विकास मंत्री और जल निगम के अध्यक्ष आजम और आफाक ने भर्ती में घोटाला करने को सारे नियम-कायदों को ताक पर रख दिया था। जांच में पता चला कि जल निगम की फाइलों और प्रस्ताव को आगे बढ़ाने का अधिकार जल निगम बोर्ड को था। लेकिन बोर्ड को भर्ती से जुड़े कोई प्रस्ताव भेजे ही नहीं गए। आफाक का जल निगम से वास्ता नहीं था, क्योंकि वहां ओएसडी का पद नहीं था। बावजूद इसके आफाक ओएसडी की हैसियत से जल निगम की फाइलों पर दस्तखत करते थे।

लखनऊ। जल निगम में 1300 पदों पर हुई भर्ती के घोटाले में एसआईटी ने रामपुर से सपा सांसद व पूर्ववर्ती अखिलेश सरकार में मंत्री रहे आजम खां, उनके ओएसडी आफाक समेत अन्य के खिलाफ चार्जशीट दाखिल करने की अनुमति मांगी है। एसआईटी ने फरेंसिक जांच में पूर्व मंत्री और एफआईआर में नामजद अन्य आरोपितों के खिलाफ साक्ष्य मिलने के बाद शासन को अपनी रिपोर्ट भेज दी है। नगर विकास विभाग के पूर्व सचिव व रिटायर्ड आईएएस एसपी सिंह को मामले में क्लीन चिट दी गई है। इसके साथ ही भर्तियों के लिए ऑनलाइन परीक्षा कराने और रिजल्ट जारी करने वाली एजेंसी अप्टेक ने अधिकारियों के इशारे पर जमकर गड़बड़ियां कीं। ऑनलाइन और परीक्षा के बाद अप्टेक ने आंसर की और नंबर जारी किए बिना ही सीधे रिजल्ट जारी कर दिया। इसके खिलाफ कई अभ्यर्थी कोर्ट चले गए। उनका आरोप था कि कम नंबर वालों को साक्षात्कार के लिए बुलाया गया जबकि ज्यादा नंबर होने के बाद भी उन्हें नहीं बुलाया गया। अप्टेक ने लिखित में अपनी गलती मानी है। एसआईटी की तरफ से पूर्व मंत्री आजम खां को 17 जनवरी को नोटिस भेजा गया था। एसआईटी का नोटिस मिलते ही आजम 22 जनवरी को बयान दर्ज कराने एसआईटी पहुंच गए थे। करीब दो घंटे की पूछताछ के दौरान आजम ने भर्तियों में हुई गड़बड़ियों के लिए तत्कालीन एमडी पीके आसूदानी को जिम्मेदार बताया था। उनका कहना था कि आसूदानी ने उन्हें धोखे में रहकर फाइलों में हस्ताक्षर करवा लिये। विधानसभा चुनावों से ठीक पहले सपा सरकार के कार्यकाल में जल निगम में सहायक अभियंता, अवर अभियंता व नैतिक लिपिक के पदों के लिए 1,300 भर्तियां की गई थीं। आचार संहिता से पहले भर्तियां करने के चक्कर में छह सप्ताह में ही प्रक्रिया पूरी कर ली गई। आचार संहिता लगने से ठीक एक दिन पहले भर्तियों का रिजल्ट जारी कर दिया गया। भर्तियों में धांधली की शिकायत लेकर कुछ अभ्यर्थियों ने कोर्ट में याचिका दाखिल कर दी। इस बीच सरकार बदली और मामले की जांच के लिए कमिटी का गठन कर दिया। कमिटी की रिपोर्ट में भर्तियों में हुए गड़बड़झाले के साक्ष्य मिले तो सरकार ने 122 सहायक अभियंताओं को बर्खास्त कर दिया। साथ ही सीएम ने मामले की जांच एसआईटी को सौंप दी। एसआईटी ने 25 अप्रैल 2018 को इस मामले में आजम खान, आफाक, एसपी सिंह, जल निगम के पूर्व एमडी पीके आसूदानी, चीफ इंजीनियर अनिल खरे व परीक्षा कराने वाली कंपनी अप्टेक खिलाफ आईपीसी की धारा 420, 409, 120बी, 201 व भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज की थी। जांच में खुलासा हुआ कि आजम ने अफसरों के साथ मिलकर चहेतों का चयन करवाया। अप्टेक के कब्जे से ली गई हार्ड डिस्क व अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच में खुलासा हुआ है कि जिन अभ्यर्थियों का चयन किया जाना था उनके नंबरों को सॉफ्टवेयर में छेड़छाड़ कर दोगुना कर दिया गया था। पड़ताल में सामने आया है कि बोर्ड के बजाय आजम खां ही जल निगम के हर प्रस्ताव को अनुमोदित करते थे। पूर्व मंत्री और अफसरों ने मिलीभगत कर चार ऐसे पदों पर भर्तियां करवा दीं जो थे ही नहीं। भर्ती में कंप्यूटर इंजिनियर (एई) के पद नियमावली में संशोधन किए बगैर ही बना दिए गए, क्योंकि जल निगम में विद्युत व यांत्रिकी इंजिनियर के पद थे। अधिकार न होने के बावजूद आजम ने ऐसी सभी फाइलों पर हस्ताक्षर कर उन्हें पास कर दिया। पूर्व नगर विकास मंत्री और जल निगम के अध्यक्ष आजम और आफाक ने भर्ती में घोटाला करने को सारे नियम-कायदों को ताक पर रख दिया था। जांच में पता चला कि जल निगम की फाइलों और प्रस्ताव को आगे बढ़ाने का अधिकार जल निगम बोर्ड को था। लेकिन बोर्ड को भर्ती से जुड़े कोई प्रस्ताव भेजे ही नहीं गए। आफाक का जल निगम से वास्ता नहीं था, क्योंकि वहां ओएसडी का पद नहीं था। बावजूद इसके आफाक ओएसडी की हैसियत से जल निगम की फाइलों पर दस्तखत करते थे।