UP: योजनाओं पर भारी पड़ रही अफसरों की लापरवाही, साल भर में आधा बजट भी नहीं खर्च कर सके कई विभाग

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UP: योजनाओं पर भारी पड़ रही अफसरों की लापरवाही, साल भर में आधा बजट भी नहीं खर्च कर सके कई विभाग

लखनऊ। सूबे के ​मुखिया योगी आदित्यनाथ ने आज इतिहास का सबसे बड़ा बजट पेश किया है। बजट में जनकल्याण की कई योजनाओं पर विशेष ध्यान दिया गया है। इस मौके पर हम आपको यूपी की नौकरशाही की वो तस्वीर दिखाने जा रहे हैं जिसे देखकर आपको सरकारी दावों की हकीकत पता चल जायेगी। दरअसल अफसरों की लापरवाही के चलते गत वित्तीय वर्ष के बजट में कई विभागों ने आवंटित धनराशि का आधा हिस्सा भी विकासकार्यो में खर्च नही किया है। बेसिक, माध्यमिक शिक्षा, पीडब्ल्यूडी और नागरिक उड्डयन विभाग बजट खर्च में जहां आगे रहे हैं, वहीं राजस्व, कृषि और एमएसएमई जैसे विभाग बजट खर्च में फिसड्डी साबित हुए हैं। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि मुख्यमंत्री इन उदासीन अधिकारियों पर कार्रवाई कब करेंगे।

Up The Negligence Of Officers Getting Overshadowed By The Plans Many Departments Could Not Spend Even Half The Budget In A Year :

दरअसल वित्तीय वर्ष 2019-20 में कुल 479701.10 करोड़ के बजट की तुलना में प्रदेश सरकार ने दिसंबर तक 84 विभागों को 317951.63 करोड़ रुपये जारी किए थे। लेकिन अधिकारियों की लापरवाही के चलते विभाग सिर्फ 242872.31 करोड़ ही खर्च कर सके हैं।

कृषि विभाग का ये रहा हाल

योगी सरकार ने प्रदेश की सत्ता संभालते ही किसानों की आय दोगुना करने का संकल्प लिया था। किसानों की आय बढ़ाने के लिए सरकार ने कई लोकप्रिय योजनाएं लागू कीं। इसके लिए सरकार ने कृषि विभाग को 6245.91 करोड़ का बजट दिया था और नौ माह में विभाग को महज 4812.21 करोड़ रुपये जारी किए गए, जिसमें विभाग सिर्फ 2658.96 करोड़ रुपये ही खर्च कर सका।

पर्यटन और एमएसएमई में चरम पर लापरवाही

योगी सरकार द्वारा पर्यटन विभाग को 1022.62 करोड़ का बजट दिया गया। नौ माह में 391.69 करोड़ रुपये जारी भी हुए, लेकिन विभाग महज 177.71 करोड़ ही खर्च कर सका। वहीं बात करें लघु, सूक्ष्म एवं मध्यम उद्योग विभाग (एमएसएमई) की तो इस विभाग के लिए 627.98 करोड़ का बजट प्रावधान था। इसकी तुलना में विभाग को सिर्फ 298.39 करोड़ रुपये दिए गए, लेकिन विभाग महज 71.36 करोड़ ही खर्च सका।

कौशल और ग्राम्य विकास में छायी रही उदासीनता

योगी सरकार ने युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने और कौशल विकास पर 1041.30 करोड़ के बजट का प्रावधान किया था। सरकार ने नौ माह में 899.19 करोड़ रुपये जारी भी किए, लेकिन विभाग ने 452.32 करोड़ रुपये ही खर्च किए। इसी तरह सरकार ने ग्राम्य विकास विभाग के लिए 22481.26 करोड़ का बजट प्रावधान किया। लेकिन विभाग को 40 प्रतिशत से भी कम 8263.78 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए और विभाग ने सिर्फ 4619.82 करोड़ रुपये खर्च किए।

बजट खर्च में ये विभाग रहे आगे

जहां कुछ विभाग बजट खर्च करने में लापरवाह साबित हुए वहीं कई विभागों ने खुलकर खर्च किया। पीडब्ल्यूडी के लिए वित्तीय वर्ष में 23329.82 करोड़ का बजट प्रावधान किया गया था। नौ माह में विभाग को 17963.57 करोड़ का बजट जारी किया गया। नई सड़कों के निर्माण और सड़कों को गड्ढा मुक्त करने के लिए विभाग ने 13642.92 करोड़ रुपये खर्च भी किए। इसी तरह नागरिक उड्डयन विभाग ने स्वीकृत 1371.01 करोड़ रुपये में से 1363.14 करोड़ रुपये खर्च किए। इसमें ज्यादातर राशि जेवर एयरपोर्ट के लिए अल्प समय में जमीन अधिग्रहण से लेकर निविदा प्रक्रिया पूरी करने में खर्च की गयी।

ये विभाग रहे आगे

विभाग                                 बजट प्रावधान              स्वीकृत                 खर्च
बेसिक शिक्षा                            59879.69              44794.14         37535.05
माध्यमिक शिक्षा                       12217.32               11129.10          9363.86
खाद्य एवं रसद                         14257.37              14100.04         10308.78
ग्रामीण अभियंत्रण                          490.32                  490.32            230.47
लोक निर्माण                             23329.82              17963.57         13642.92
नागरिक उड्डयन                          2203.96                1371.01           1363.14
अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास      9465.93                6038.08           5440.08
चिकित्सा शिक्षा                            6509.65                 4857.56          3946.89

ये विभाग रहे पीछे
विभाग                                       बजट प्रावधान       स्वीकृत             खर्च
ग्राम्य विकास                               22481.26         8263.78        4619.82
कृषि                                          6245.91          4812.21        2658.96
लघु सिंचाई, भूगर्भ जल                      782.47            699.79            305.75
जेल प्रशासन एवं सुधार गृह                  1165.65           942.69          556.79
पर्यटन                                        1022.62           391.69          177.71
सामान्य प्रशासन, धर्मार्थ कार्य                252.52             94.67          11.63
एमएसएमई                                     627.98            298.39         71.36
राज्य संपत्ति                                    367.90           367.90         152.77
पर्यावरण                                          15.38            13.85           3.84
राजस्व, अभाव, दैवी आपदा                   8046.22          6221.48       2972.89
व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास            1041.30          899.19        452.32
निर्वाचन                                           621.74           598.39       265.51
कार्मिक, प्रबंधन अकादमी, लोक सेवा आयोग   200.58            200.20       78.32

लखनऊ। सूबे के ​मुखिया योगी आदित्यनाथ ने आज इतिहास का सबसे बड़ा बजट पेश किया है। बजट में जनकल्याण की कई योजनाओं पर विशेष ध्यान दिया गया है। इस मौके पर हम आपको यूपी की नौकरशाही की वो तस्वीर दिखाने जा रहे हैं जिसे देखकर आपको सरकारी दावों की हकीकत पता चल जायेगी। दरअसल अफसरों की लापरवाही के चलते गत वित्तीय वर्ष के बजट में कई विभागों ने आवंटित धनराशि का आधा हिस्सा भी विकासकार्यो में खर्च नही किया है। बेसिक, माध्यमिक शिक्षा, पीडब्ल्यूडी और नागरिक उड्डयन विभाग बजट खर्च में जहां आगे रहे हैं, वहीं राजस्व, कृषि और एमएसएमई जैसे विभाग बजट खर्च में फिसड्डी साबित हुए हैं। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि मुख्यमंत्री इन उदासीन अधिकारियों पर कार्रवाई कब करेंगे। दरअसल वित्तीय वर्ष 2019-20 में कुल 479701.10 करोड़ के बजट की तुलना में प्रदेश सरकार ने दिसंबर तक 84 विभागों को 317951.63 करोड़ रुपये जारी किए थे। लेकिन अधिकारियों की लापरवाही के चलते विभाग सिर्फ 242872.31 करोड़ ही खर्च कर सके हैं। कृषि विभाग का ये रहा हाल योगी सरकार ने प्रदेश की सत्ता संभालते ही किसानों की आय दोगुना करने का संकल्प लिया था। किसानों की आय बढ़ाने के लिए सरकार ने कई लोकप्रिय योजनाएं लागू कीं। इसके लिए सरकार ने कृषि विभाग को 6245.91 करोड़ का बजट दिया था और नौ माह में विभाग को महज 4812.21 करोड़ रुपये जारी किए गए, जिसमें विभाग सिर्फ 2658.96 करोड़ रुपये ही खर्च कर सका। पर्यटन और एमएसएमई में चरम पर लापरवाही योगी सरकार द्वारा पर्यटन विभाग को 1022.62 करोड़ का बजट दिया गया। नौ माह में 391.69 करोड़ रुपये जारी भी हुए, लेकिन विभाग महज 177.71 करोड़ ही खर्च कर सका। वहीं बात करें लघु, सूक्ष्म एवं मध्यम उद्योग विभाग (एमएसएमई) की तो इस विभाग के लिए 627.98 करोड़ का बजट प्रावधान था। इसकी तुलना में विभाग को सिर्फ 298.39 करोड़ रुपये दिए गए, लेकिन विभाग महज 71.36 करोड़ ही खर्च सका। कौशल और ग्राम्य विकास में छायी रही उदासीनता योगी सरकार ने युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने और कौशल विकास पर 1041.30 करोड़ के बजट का प्रावधान किया था। सरकार ने नौ माह में 899.19 करोड़ रुपये जारी भी किए, लेकिन विभाग ने 452.32 करोड़ रुपये ही खर्च किए। इसी तरह सरकार ने ग्राम्य विकास विभाग के लिए 22481.26 करोड़ का बजट प्रावधान किया। लेकिन विभाग को 40 प्रतिशत से भी कम 8263.78 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए और विभाग ने सिर्फ 4619.82 करोड़ रुपये खर्च किए। बजट खर्च में ये विभाग रहे आगे जहां कुछ विभाग बजट खर्च करने में लापरवाह साबित हुए वहीं कई विभागों ने खुलकर खर्च किया। पीडब्ल्यूडी के लिए वित्तीय वर्ष में 23329.82 करोड़ का बजट प्रावधान किया गया था। नौ माह में विभाग को 17963.57 करोड़ का बजट जारी किया गया। नई सड़कों के निर्माण और सड़कों को गड्ढा मुक्त करने के लिए विभाग ने 13642.92 करोड़ रुपये खर्च भी किए। इसी तरह नागरिक उड्डयन विभाग ने स्वीकृत 1371.01 करोड़ रुपये में से 1363.14 करोड़ रुपये खर्च किए। इसमें ज्यादातर राशि जेवर एयरपोर्ट के लिए अल्प समय में जमीन अधिग्रहण से लेकर निविदा प्रक्रिया पूरी करने में खर्च की गयी। ये विभाग रहे आगे विभाग                                 बजट प्रावधान              स्वीकृत                 खर्च बेसिक शिक्षा                            59879.69              44794.14         37535.05 माध्यमिक शिक्षा                       12217.32               11129.10          9363.86 खाद्य एवं रसद                         14257.37              14100.04         10308.78 ग्रामीण अभियंत्रण                          490.32                  490.32            230.47 लोक निर्माण                             23329.82              17963.57         13642.92 नागरिक उड्डयन                          2203.96                1371.01           1363.14 अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास      9465.93                6038.08           5440.08 चिकित्सा शिक्षा                            6509.65                 4857.56          3946.89 ये विभाग रहे पीछे विभाग                                       बजट प्रावधान       स्वीकृत             खर्च ग्राम्य विकास                               22481.26         8263.78        4619.82 कृषि                                          6245.91          4812.21        2658.96 लघु सिंचाई, भूगर्भ जल                      782.47            699.79            305.75 जेल प्रशासन एवं सुधार गृह                  1165.65           942.69          556.79 पर्यटन                                        1022.62           391.69          177.71 सामान्य प्रशासन, धर्मार्थ कार्य                252.52             94.67          11.63 एमएसएमई                                     627.98            298.39         71.36 राज्य संपत्ति                                    367.90           367.90         152.77 पर्यावरण                                          15.38            13.85           3.84 राजस्व, अभाव, दैवी आपदा                   8046.22          6221.48       2972.89 व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास            1041.30          899.19        452.32 निर्वाचन                                           621.74           598.39       265.51 कार्मिक, प्रबंधन अकादमी, लोक सेवा आयोग   200.58            200.20       78.32