शहीद का शव देख पत्नी बोली- दोनों बेटों को भी सेना में भेजूंगी

बलिया। जम्मू के अरनिया में शुक्रवार को शहीद हुए बीएसएफ़ जवान बिजेन्द्र बहादुर सिंह का पार्थिव शरीर शनिवार उनके घर पहुंचा। जहां अंतिम दर्शन के लिए लोगों की भीड़ पहले से ही इकठ्ठा थी। इस दौरान शहीद जवान की पत्नी सुष्मि‍ता ने कहा कि मुझे गर्व है अपने पति पर, जिन्होने देश की रक्षा के खातिर अपनी जान दी। वो (पति) कहते थे मेरी जान चली जाए तो रोना मत, दोनों बेटों को आर्मी के लिए तैयार करना। दोनों बेटों को तैयार कर बॉर्डर पर भेजूंगी। मेरी इच्छा है कि सरकार आज ही वादा करे कि मेरे दोनों बेटों के बड़े होने पर सेना में भेजेगी।

वहीं शहीद के पिता अशोक सिंह का कहना है कि भले ही बिजेन्द्र मेरा पहला और आखिरी बेटा था जिसने देश की खातिर अपनी जान दे दी, अब वह कभी लौट कर नहीं आने वाला लेकिन इस बात के दुख से ज़्यादा मुझे अपने बेटे पर गर्व है कि उनके देश की रक्षा में जान की कुर्बानी दी। सरकार अगर मुझे भी मौका दे तो मैं अपने बेटे की जगह सीमा पर लड़ने जा सकता हूं। उन्होने कहा कि अब मेरा बेटा तो देश की सेवा नहीं कर सकता था लेकिन मैं अपने दोनों नातियों को सेना में जरूर भेजूंगा और वे अपने बाप का बदला लेंगे।

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शहीद जवान के मां ने कहा कि दुश्मनों में दम था तो सीने पर वार करते, वो उनका जबाब देता यूं कायरों की तरह मेरे बेटे पर वार क्यों किया? सीने पर गोली खाई है, देश के नाम कुर्बान होकर बेटा, मां का सीना चौड़ा कर गया। मंटू के दो बेटे हैं, बड़ा बेटा भूपेंद्र (6) और छोटा बेटा संतराज (3) दोनों को तैयार करके बॉर्डर पर भेजूंगी।

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शहीद के बेटे भूपेंद्र ने मुखाग्नि दी। प्रभारी मंत्री बलिया श्रीकान्त शर्मा ने सरकार की तरफ से शहीद के परिवार को 25 लाख रुपए की सहायता राशि देने की घोषणा की। इसके अलावा शहीद के नाम पर गांव का मेन गेट और बिजेन्द्र के नाम से स्टेडियम बनवाने की घोषणा की।