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यूपी: भ्रष्टाचार में लिप्त डीपीओ मनोज कुमार राव पर कौन है मेहरबान? अफसरों की सांठगांठ से हो रहा खेल!

Up Who Is Kind To Manoj Kumar Rao Dpo Involved In Corruption The Game Is Being Done In Collaboration With Officers

By टीम पर्दाफाश 
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लखनऊ। उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ​जीरो टॉलरेंस का दावा कर रही है लेकिन शासन में बैठे कुछ अफसर सरकार के दावों को पलीता लगाने में जुटे हुए हैं। दरअसल, मामला भ्रष्टाचार, सरकारी धन के दुरुपयोग और आय से अधिक संपत्ति जुटाने जैसे गंभीर आरोपों में फंसे जिला कार्यक्रम अधिकारी (डीपीओ) मनोज कुमार राव से जुड़ा है। अफसरों की मेहरबानी से गोंडा में लैनाती के दौरान निलंबित डीपीओ को बचाने के लिए कोर्ट और शासन को गुमराह करके गुपचुप तरीके से प्रयागराज का डीपीओ बना दिया है।

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सूत्रों की माने तो वहां पर तैनाती के दौरान डीपीओ पर कुभ में करीब 65 लाख और विभागीय सामग्री की खरीद में करीब 36 लाख रुपये का घोटाले का आरोप लग चुका है, जिसकी सतर्कता जांच चल रही है। जबकि विभागीय जांच में इन आरोपों की पुष्टि हो चुकी है। हाल में भाजपा एमएलसी देवेंद्र प्रताप सिंह ने भी डीपीओ के कारनामों की फेहरिस्त के साथ मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर डीपीओ को पद से हटाने की मांग की है।

बता दें कि, पिछले साल प्रयागराज में लगे कुंभ के दौरान सरकार ने तीर्थयात्रियों के प्रवास के लिए टेंट लगाने और विभागीय कार्यक्रमों के प्रचार प्रसार के लिए 17 लाख रुपये खर्च करने की अनुमति दी थी, लेकिन डीपीओ मनोज राव ने इस मद में करीब 65 लाख रुपये खर्च कर दिए थे।

गोंड में तैनाती के दौरान हुए थे निलंबित
सूत्रों की माने तो गोंडा में तैनाती के दौरान मनोज राव पर वित्तीय अनियमितता और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे थे। इसपर उन्हें निलंबित कर दिया गया था। निलंबन के विरुद्ध वह हाईकोर्ट से स्थगन आदेश ले आए थे और इसी आधार पर उन्होंने पुनः गोंडा के डीपीओ का चार्ज ले लिया था। शासन का पक्ष जानने के बाद कोर्ट ने स्थगन आदेश को 22 मई 2017 को ही खारिज कर दिया था। इसके बावजूद मनोज काफी दिनों तक गोंडा के डीपीओ बने रहे।

इस तरह हुआ था खुलासा
इस घोटाले का खुलासा तब हुआ जब आरटीआई कार्यकर्ता राजेश कुमार विश्वकर्मा व उप्र राज्य निर्माण एवं श्रम विकास सहकारी संघ के निदेशक आरपी सिंह बघेल ने साक्ष्यों के साथ शासन से शिकायत की। दोनों ने अपनी शिकायतों में कुंभ के दौरान ओवर बिलिंग करके लगभग 65 लाख और जेम पोर्टल के माध्यम से आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए साम में करीब 36 लाख रुपये के गबन करने की बात कही थी। इस आधार पर आईसीडीएस निदेशालय ने जांच कराई सही पाई गई।

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