योगी के UPCOCA में शामिल होंगे कुछ ऐसे सख्त प्रावधान

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योगी के UPCOCA में शामिल होंगे कुछ ऐसे सख्त प्रावधान

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में संगठित अपराध पर लगाम कसने के लिए तैयार किए जा रहे यूपीकोका (UPCOCA) कानून में कुछ बेहद सख्त प्रावधान किए जाएंगे। योगी सरकार का इस कानून को लाने का मुख्य उद्देश्य बड़े स्तर पर होने वाले जमीन के कब्जों, फिरौती, सट्टा बाजार, मनी लांड्रिंग और अवैध शराब माफिया के नेटवर्क को समाप्त करना होगा।जानकारों की माने तो इस कानून को लागू होने से संगठित अपराधियों की कमर तो टूटेगी लेकिन इस कानून का प्रयोग राजनीतिक प्रतिशोध के लिए भी किया जा सकता है। इसलिए इस कानून के तहत कुछ ऐसे भी प्रावधान किए जा सकते हैं जिससे की इस कानून के दुर्उपयोग की संभावनाओ को टाला जा सके।

कुछ ऐसे होगे प्रावधान—

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अपराधियों को अदालत के हस्तक्षेप के बिना 180 दिनों की पुलिस रिमांड पर लिया जा सकेगा। इस कानून के तहत आरोपी बनाए गए अपराधी को अदालत छह महीने तक जमानत नहीं दे सकेगी।
अपराधियों के फोन कॉल टैपिंग की अधिकार पुलिस के पास होगा। इन कॉल रिकार्ड्स की अदालत के समक्ष बतौर साक्ष्य स्वीकरोक्ती होगी। जोकि आईपीसी के तहत साक्ष्य नहीं मानी जाती है।
इस कानून के तहत दोषी पाए जाने वाले अपराधी को उम्रकैद या सजा—ए—मौत जैसी सजा मिल सकती है।
इस कानून के तहत संगठित अपराध में संलिप्तता के दोषी को उम्र कैद या फिर न्यूनतम पांच साल जेल की सजा सुनाई जा सकती है।
संगठित अपराध में लिप्त व्यक्ति को शरण देने वाले को न्यूनतम पांच साल और अधिकतम उम्र कैद की सजा का प्रावधान होगा।
संगठित अपराध के जरिए कमाए गए धन को निवेश करने में दोषी पाए जाने वाले को न्यूनतम तीन साल और अधिकतम उम्र कैद की सजा हो सकती है।
संगठित अपराध में दोषी पाए गए किसी अपराधी द्वारा बनाई संपत्ति में स्वामित्व दिखाने को भी अपराध श्रेणी में रखा जाएगा। जिसके लिए न्यूनतम तीन साल अधिकतम दस साल की जेल और न्यूनतम एक लाख का आर्थिक जुर्माना लगाया जा सकता है।

UPCOCA के दुर्पयोग पर भी होगा सजा का प्रावधान—

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यूपीकोका जैसा कानून जितना सख्त होगा उसे लागू करने वाले की कानून के प्रति प्रतिबद्धता भी कसौटी पर उतनी ही कसी जाएगी। जानकारों को उम्मीद है कि यूपी सरकार इस कानून में ऐसे प्रवधान करेगी जिसके आधार पर इस कानून के तहत कार्रवाई करने वाले अधिकारी की गलत नियत या मंशा सामने आने पर उसे भी अपराधी माना जाएगा और उसके लिए भी इसी कानून के तहत सजा का प्रावधान किया जाएगा।

एक अनुमान के मुताबिक कानून का दुर्उपयोग करने के प्रावधान के रूप में दोषी अधिकारी को भी न्यूनतम तीन साल से अधिकतम 10 साल जेल की सजा और आर्थिक जुर्माने भरने की सजा सुनाई जा सकती है।

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