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UPPCL पीएफ घोटाला: CBI जांच में फंसेगी आधा दर्जन IAS अफसरों की गर्दन

By बलराम सिंह 
Updated Date

लखनऊ। उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन लिमिटेड के पीएफ घोटाले की जांच यूपी पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) से सीबीआई के हाथों में चली गई है। हजारों करोड़ रुपए के इस चर्चित घोटाले की पड़ताल केन्द्रीय जांच एजेंसी के हाथ जाने से उन आईएएस अफसरों की नींद उड़ गई है, जो घोटाले की अवधि में पावर कारपोरेशन में शीर्ष पदों पर बैठे थे। घोटाले की फाइल सीबीआई के पास पहुंचने से सबसे ज्यादा बेचैनी तत्कालीन प्रमुख सचिव (ऊर्जा) और यूपीपीसीएल के पूर्व चेयरमैन संजय अग्रवाल को होगी। क्योंकि ईओडब्ल्यू ने अपनी जांच में संजय अग्रवाल को लगभग क्लीन चिट दे दी थी।

ईओडब्ल्यू ने हजारों करोड़ रुपए के इस घोटाले में वरिष्ठ आईएएस संजय अग्रवाल (वर्तमान में केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर कृषि मंत्रालय में सचिव), यूपी में प्रमुख सचिव (उद्योग) आलोक कुमार और आईएएस अपर्णा यू से पूछताछ कर चुकी है। आलोक कुमार को संजय अग्रवाल के बाद प्रमुख सचिव (ऊर्जा) और यूपीपीसीएल के चेयरमैन की कुर्सी मिली थी। वहीं अपर्णा यू मध्यांचल एमडी के पद पर तैनात थीं। इन तीनों के जांच के दायरे में आने के बाद ईओडब्ल्यू ने गहन पूछताछ की थी।

बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज की जिस बैठक में भविष्य निधि के डीएचएफएल में निवेश का फैसला किया गया था, उसकी नोट शीट में पीके गुप्ता, सुधांशु द्विवेदी, एपी मिश्रा के साथ संजय अग्रवाल के भी हस्ताक्षर थे। ईओडब्ल्यू ने उनके हस्ताक्षरों के 16-16 नमूने लेकर फरेंसिक जांच करवाई थी। लेकिन, उनके हस्ताक्षर नोटशीट के हस्ताक्षर से नहीं मिले। इसके बाद ईओडब्ल्यू से उन्हें क्लीन चिट मिल गई, लेकिन अब वह फिर सीबीआई की जांच के दायरे में होंगे। उनके साथ सीबीआई आलोक कुमार और अपर्णा यू से भी पूछताछ करेगी।

एफआईआर दर्ज करने के बाद सीबीआई जल्द जांच से जुड़े सभी दस्तावेज ईओडब्ल्यू से अपने कब्जे में लेगी। सीबीआई अफसरों ने इसके लिए ईओडब्ल्यू के अफसरों से संपर्क किया है। डीजी ईओडब्ल्यू आरपी सिंह ने बताया कि अब मामले की पूरी जांच सीबीआई ही करेगी। ईओडब्ल्यू जांच से जुड़े सभी दस्तावेज और रिपोर्ट सीबीआई के हवाले कर देगा।

असुरक्षित डीएचएफएल में बिजलीकर्मियों के अरबों रुपये निवेश करने के एवज में करोड़ों का कमिशन बतौर रिश्वत लिया गया। मुख्य आरोपितों में शामिल तत्कालीन ट्रस्ट सचिव पीके गुप्ता की इसमें सबसे अहम भूमिका बताई जा रही है। आरोप है कि उन्होंने सीए और अपने करीबियों की मदद से फर्जी ब्रोकर फर्में खुलवाईं और उनमें कमिशन के करोड़ों रुपये ट्रांसफर करवाए। बाद में इस रकम को दूसरे बैंक खातों में ट्रांसफर करवाया। ईओडब्ल्यू ने इस मामले में ताबड़तोड़ कार्रवाई करते हुए जांच का बड़ा हिस्सा पूरा किया है। फिलहाल बिजली विभाग के अन्य अधिकारियों, इंजीनियरों और मध्यस्थों की भूमिका खंगाली जा रही थी।

17 लोग जेल में
ईओडब्ल्यू ने इस मामले में पीके गुप्ता का बेटा अभिनव, अभिनव का साथी आशीष चौधरी, डीएचएफएल के तत्कालीन रीजनल सेल्स मैनेजर अमित प्रकाश, डीएस ट्रेडर्स और अम्बा इंटरप्राइजेज के संचालक मनोज कुमार अग्रवाल, ऑटोवेब फर्म के संचालक विकास चावला, सोरिंजटेक सर्विसेज के संचालक संजय कुमार, सीएम श्याम अग्रवाल, खुद को सीए बताने वाले टैक्स कंसल्टेंट अरुण जैन, पंकज गिरि उर्फ नीशू समेत 17 लोग जेल में है।

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