पीएफ घोटाला : IAS अधिकारियों पर कार्रवाई से बच रही ईओडब्ल्यू, CBI जांच भी लटकी

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UPPCL में पीएफ घोटाला : IAS अधिकारियों पर कार्रवाई से बच रही ईओडब्ल्यू, CBI जांच भी लटकी

लखनऊ। यूपीपीसीएल में हुए पीएफ घोटाले की जांच कर रही ईओडब्ल्यू अभी तक पांच लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। घोटाले में शामिल कई जिम्मेदारों पर अभी कार्रवाई की तलवार लटक रही है। हालांकि, ईओडब्ल्यू आईएएस अधिकारियों पर कार्रवाई से बच रही है। कार्रवाई तो छोड़ उनसे पूछताछ की जहमत भी नहीं उठा पा रही है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या आईएएस अधिकारियों को बचाने की कोशिश की जा रही है? उधर, घोटाला उजागर होने के बाद योगी सरकार ने इसकी जांच सीबीआई से कराने का दावा किया था लेकिन महीने भर बाद भी सीबीआई जांच नहीं शुरू हो सकी है।

Uppcl Scam Eow Escaping Action On Ias Officers Cbi Investigation Also Hangs :

सूत्रों की माने तो आईएएस अधिकारियों की लॉबी सीबीआई जांच को रोकने की पूरी कोशिश में जुटी है, जिसके कारण अभी तक ईओडब्ल्यू ही इसकी जांच कर रही है। यूपीपीसीएल के पीएफ का पैसा जब डीएचएफएल में निवेश का फैसला हुआ या फिर जब यह घोटाला उजागर हुआ। दोनों ही समय यूपीपीसीएल के जिम्मेदारों पर कार्रवाई की तलवार लटक रही है। यूपीपीसीएल कर्मियों के पीएफ का पैसा जब दीवान हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड (डीएचएफएल) में निवेश करने के निर्णय लिया गया, उसमें बतौर चेयरमैन संजय अग्रवाल (आईएएस), एमडी एपी मिश्रा, निदेशक वित्त सुधांशु द्विवेदी, निदेशक कार्मिक प्रबंधन एवं प्रशासन सत्य प्रकाश पाण्डेय और सचिव प्रवीण कुमार गुप्ता शामिल थे।

इसमें जांच के बाद ईओडब्ल्यू ने एपी मिश्रा को जेल भेज दिया है। हालांकि तत्कालीन चेयरमैन आईएएस अफसर संजय अग्रवाल पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। जब यह घोटाला उजागर हुआ तब एमडी के पद पर तैनात रहीं आईएएस अधिकारी अपर्णा यू और चैयरमैन आईएएस अफसर आलोक कुमार का केवल स्थानांतरण कर दिया गया। सूत्रों की माने तो आईएएस अधिकारियों को बचाने की कोशिश की जा रही है, जिसके कारण उन पर कार्रवाई करने से ईओडब्ल्यू कतरा रही है।

सीबीआई जांच कराने का किया था दावा
घोटाला उजागर होने के बाद योगी सरकार ने आनन—फानन में पूरे मामले की जांच सीबीआई से कराने का दावा किया था। प्राथमिक स्तर पर इसकी जांच के लिए सरकार ने ईओडब्ल्यू को जिम्मेदारी सौंपी थी। अभी ईओडब्ल्यू की जांच चल रही है। वहीं सरकार ने कहा था कि इस पूरे प्रकरण की जांच सीबीआई से कराई जाएगी लेकिन अभी तक सरकार ने सीबीआई से जांच की सिफारिश ही नहीं की है। इसके बाद सरकार की मंशा पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

सीबीआई जांच में आईएएस अधिकारियों का अड़ंगा
सूत्रों की मोन तो सीबीाआई जांच किये जाने का आईएएस अधिकारियों की लॉबी विरोध कर रही है, जिसके कारण वह अभी तक सरकार ने सीबीआई से जांच कराने की सिफारिश नहीं की है। वहीं, सरकार ने घोटाला उजागर होने के बाद आईएएस अधिकारियों का स्थानांतरण कर दिया गया था। हालांकि, तत्कालीन चेयरमैन आईएएस अफसर संजय अग्रवाल पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। जब यह घोटाला उजागर हुआ तब एमडी के पद पर तैनात रहीं आईएएस अधिकारी अपर्णा यू और चैयरमैन आईएएस अफसर आलोक कुमार का केवल स्थानांतरण कर दिया गया।

लखनऊ। यूपीपीसीएल में हुए पीएफ घोटाले की जांच कर रही ईओडब्ल्यू अभी तक पांच लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। घोटाले में शामिल कई जिम्मेदारों पर अभी कार्रवाई की तलवार लटक रही है। हालांकि, ईओडब्ल्यू आईएएस अधिकारियों पर कार्रवाई से बच रही है। कार्रवाई तो छोड़ उनसे पूछताछ की जहमत भी नहीं उठा पा रही है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या आईएएस अधिकारियों को बचाने की कोशिश की जा रही है? उधर, घोटाला उजागर होने के बाद योगी सरकार ने इसकी जांच सीबीआई से कराने का दावा किया था लेकिन महीने भर बाद भी सीबीआई जांच नहीं शुरू हो सकी है। सूत्रों की माने तो आईएएस अधिकारियों की लॉबी सीबीआई जांच को रोकने की पूरी कोशिश में जुटी है, जिसके कारण अभी तक ईओडब्ल्यू ही इसकी जांच कर रही है। यूपीपीसीएल के पीएफ का पैसा जब डीएचएफएल में निवेश का फैसला हुआ या फिर जब यह घोटाला उजागर हुआ। दोनों ही समय यूपीपीसीएल के जिम्मेदारों पर कार्रवाई की तलवार लटक रही है। यूपीपीसीएल कर्मियों के पीएफ का पैसा जब दीवान हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड (डीएचएफएल) में निवेश करने के निर्णय लिया गया, उसमें बतौर चेयरमैन संजय अग्रवाल (आईएएस), एमडी एपी मिश्रा, निदेशक वित्त सुधांशु द्विवेदी, निदेशक कार्मिक प्रबंधन एवं प्रशासन सत्य प्रकाश पाण्डेय और सचिव प्रवीण कुमार गुप्ता शामिल थे। इसमें जांच के बाद ईओडब्ल्यू ने एपी मिश्रा को जेल भेज दिया है। हालांकि तत्कालीन चेयरमैन आईएएस अफसर संजय अग्रवाल पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। जब यह घोटाला उजागर हुआ तब एमडी के पद पर तैनात रहीं आईएएस अधिकारी अपर्णा यू और चैयरमैन आईएएस अफसर आलोक कुमार का केवल स्थानांतरण कर दिया गया। सूत्रों की माने तो आईएएस अधिकारियों को बचाने की कोशिश की जा रही है, जिसके कारण उन पर कार्रवाई करने से ईओडब्ल्यू कतरा रही है। सीबीआई जांच कराने का किया था दावा घोटाला उजागर होने के बाद योगी सरकार ने आनन—फानन में पूरे मामले की जांच सीबीआई से कराने का दावा किया था। प्राथमिक स्तर पर इसकी जांच के लिए सरकार ने ईओडब्ल्यू को जिम्मेदारी सौंपी थी। अभी ईओडब्ल्यू की जांच चल रही है। वहीं सरकार ने कहा था कि इस पूरे प्रकरण की जांच सीबीआई से कराई जाएगी लेकिन अभी तक सरकार ने सीबीआई से जांच की सिफारिश ही नहीं की है। इसके बाद सरकार की मंशा पर सवाल खड़े हो रहे हैं। सीबीआई जांच में आईएएस अधिकारियों का अड़ंगा सूत्रों की मोन तो सीबीाआई जांच किये जाने का आईएएस अधिकारियों की लॉबी विरोध कर रही है, जिसके कारण वह अभी तक सरकार ने सीबीआई से जांच कराने की सिफारिश नहीं की है। वहीं, सरकार ने घोटाला उजागर होने के बाद आईएएस अधिकारियों का स्थानांतरण कर दिया गया था। हालांकि, तत्कालीन चेयरमैन आईएएस अफसर संजय अग्रवाल पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। जब यह घोटाला उजागर हुआ तब एमडी के पद पर तैनात रहीं आईएएस अधिकारी अपर्णा यू और चैयरमैन आईएएस अफसर आलोक कुमार का केवल स्थानांतरण कर दिया गया।