यूपीपीसीएल घोटाला : आखिर वरिष्ठ अधिकारियों की जानकारी के बिना कैसे हो गया इतना बड़ा खेल

uppcl scam
यूपीपीसीएल घोटाला : आखिर वरिष्ठ अधिकारियों की जानकारी के कैसे हो गया इतना बड़ा खेल

लखनऊ। यूपी पावर कारपोरेशन के कर्मचारियों के पीएफ के 2637 करोड़ रूपए को डीएचएफएल में जमा करने के मामले में अब कई तरह के सवाल उठने लगे हैं। इस मामले में तत्कालीन निदेशक (वित्त) और तत्कालीन सचिव के​ खिलाफ लखनऊ के हजरतगंज थाने में मुकदमा दर्ज करके उनकी गिफ्तार हो गई, लेकिन अब सवाल उठने लगा है कि अरबो रूपए का ये खेल बिना वरिष्ठ अधिकारियों की जानकारी के कैसे हो गया।

Uppcl Scam How Did Such A Big Game Happen After The Information Of Senior Officials :

फिलहाल सीएम योगी आदित्यनाथ ने इस मामले की सीबीआई जांच के निर्देश दिए हैं। उन्होंने शनिवार रात कहा कि जब तक सीबीआई यह जांच अपने हाथ में नहीं ले लेती, तब तक पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) के डीजी इसकी जांच करेंगे। ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा ने भी मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर इस मामले की सीबीआई जांच कराने का अनुरोध किया था।

नियम विरुद्ध जाकर कर्मचारियों के पैसे को डीएचएफएल में निवेश किया गया था। गैर सरकारी क्षेत्र की कंपनियों में निवेश के लिए संबंधित ट्रस्टों को बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज ने किसी ने किसी को भी अधिकृत नहीं किया था। इस निवेश के लिए उच्च प्रबंधन का कोई अनुमोदन भी नहीं लिया गया था। गाइडलाइन के अनुसार सिक्योरिटीज में ही निवेश करने का प्रावधान है जबकि डीएचएफएल में फिक्सड डिपाजिट किया गया था।

मार्च 2017 से दिसंबर 2018 के बीच डीएचएफएल में सामान्य भविष्य निधि से 2631.20 करोड़ रुपये का निवेश किया गया था। इसमें 1185.50 करोड़ ट्रस्ट कार्यालय प्राप्त कर चुका है। इस मद में 1445.70 करोड़ फंस गए हैं। इसी प्रकार कार्मिकों के अशंदायी भविष्य निधि से 1491.50 करोड़ रुपये का निवेश किया गया था। इसमें 669.30 करोड़ ट्रस्ट को वापस हो चुका है। इस मद से 822.20 करोड़ रुपये फंस गए हैं, जबकि मार्च 2017 से आज तक पावर सेक्टर इम्प्लॉइज ट्रस्ट की एक भी बैठक नहीं हुई। सरकार के सामने अब डीएचएफएल से पैसा वापस लाने की बड़ी चुनौती है।

लखनऊ। यूपी पावर कारपोरेशन के कर्मचारियों के पीएफ के 2637 करोड़ रूपए को डीएचएफएल में जमा करने के मामले में अब कई तरह के सवाल उठने लगे हैं। इस मामले में तत्कालीन निदेशक (वित्त) और तत्कालीन सचिव के​ खिलाफ लखनऊ के हजरतगंज थाने में मुकदमा दर्ज करके उनकी गिफ्तार हो गई, लेकिन अब सवाल उठने लगा है कि अरबो रूपए का ये खेल बिना वरिष्ठ अधिकारियों की जानकारी के कैसे हो गया। फिलहाल सीएम योगी आदित्यनाथ ने इस मामले की सीबीआई जांच के निर्देश दिए हैं। उन्होंने शनिवार रात कहा कि जब तक सीबीआई यह जांच अपने हाथ में नहीं ले लेती, तब तक पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) के डीजी इसकी जांच करेंगे। ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा ने भी मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर इस मामले की सीबीआई जांच कराने का अनुरोध किया था। नियम विरुद्ध जाकर कर्मचारियों के पैसे को डीएचएफएल में निवेश किया गया था। गैर सरकारी क्षेत्र की कंपनियों में निवेश के लिए संबंधित ट्रस्टों को बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज ने किसी ने किसी को भी अधिकृत नहीं किया था। इस निवेश के लिए उच्च प्रबंधन का कोई अनुमोदन भी नहीं लिया गया था। गाइडलाइन के अनुसार सिक्योरिटीज में ही निवेश करने का प्रावधान है जबकि डीएचएफएल में फिक्सड डिपाजिट किया गया था। मार्च 2017 से दिसंबर 2018 के बीच डीएचएफएल में सामान्य भविष्य निधि से 2631.20 करोड़ रुपये का निवेश किया गया था। इसमें 1185.50 करोड़ ट्रस्ट कार्यालय प्राप्त कर चुका है। इस मद में 1445.70 करोड़ फंस गए हैं। इसी प्रकार कार्मिकों के अशंदायी भविष्य निधि से 1491.50 करोड़ रुपये का निवेश किया गया था। इसमें 669.30 करोड़ ट्रस्ट को वापस हो चुका है। इस मद से 822.20 करोड़ रुपये फंस गए हैं, जबकि मार्च 2017 से आज तक पावर सेक्टर इम्प्लॉइज ट्रस्ट की एक भी बैठक नहीं हुई। सरकार के सामने अब डीएचएफएल से पैसा वापस लाने की बड़ी चुनौती है।