SC/ST एक्ट: सोशल मीडिया पर लोगों का विरोध देखकर उड़ी मोदी सरकार की नींद

SC/ST एक्ट: सोशल मीडिया पर लोगों का विरोध देखकर उड़ी मोदी सरकार की नींद
SC/ST एक्ट: सोशल मीडिया पर लोगों का विरोध देखकर उड़ी मोदी सरकार की नींद

नई दिली। एससी-एसटी एक्ट को लेकर किए गए फैसलों से केंद्र की मोदी सरकार ने सवर्णों नाराजगी मोल ले ली है, यही नहीं ये मुदृदा कांग्रेस के भी गले की फांस बन गया है। नाराजगी का आलम यह है कि पिछले कई हफ्ते से लोग अगले लोकसभा चुनाव में बीजेपी की सरकार चुनने की बजाय नोटा के विकल्प को चुनने की सोशल मीडिया (फेसबुक, व्हाट्सअप, ट्विटर) पर मुहिम चला रहे हैं। अब बीजेपी के अंदर भी एससी-एसटी एक्ट में हुए संशोधन को लेकर विरोध के स्वर उठने लगे हैं। इससे पार्टी आलाकमान की चिंता बढ़ गई है।

Upper Caste Call Bharat Bandh Against Scst Act In India :

सवर्ण जातियों की नाराजगी से विचलित मोदी सरकार ने दिल्ली मे अपने शीर्ष मंत्रियों अरुण जेटली, निर्मला सीतारमण, प्रकाश जवाड़ेकर, जेपी नड्डा, रविशंकर प्रसाद, पीयूष गोयल और स्मृति ईरानी के साथ बैठक की। इसके अलावा बीजेपी सांसद भूपेंद्र यादव, रामलाल और मीनाक्षी लेखी भी बैठक में शामिल हुईं।

सूत्रों के हवाले से खबर है कि बैठक में बीजेपी नेताओं से सवर्ण वर्ग की नाराजगी को लेकर चर्चा की गई। बैठक में इस बात पर चर्चा हुई कि मोदी सरकार की ओर से ओबीसी और दलितों को लेकर किए गए फैसलों से सवर्ण जाति में नाराजगी फैल रही है,जिसे नाराजगी को कैसे दूर किया जाए।

भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नेतृत्व वाली सरकार चाहती है कि सवर्ण जातियों की नाराजगी को किस तरह से दूर किया जाए जिससे यह तबका भी पार्टी के साथ जुड़ा रहे। साथ ही एससी/एसटी और ओबीसी जाति के लोग भी नाराज ना हों। इसी मसले को लेकर अमित शाह ने एनडीए के घटक दलों के नेताओं के साथ भी बात की है।

बता दें कि बीजेपी साल 2011 की सामाजिक-आर्थिक जनगणना के मुताबिक देश में दलितों की आबादी 16.6 फीसदी, आदिवासियों की आबादी 8.6 फीसदी, मुस्लिमों की आबादी करीब 14 फीसदी है। बीजेपी का मानना है कि देश में करीब 25 से 30 फीसदी आबादी अगड़ी जाति की है, जो उनके पारंपरिक वोटर रहे हैं। लिहाजा, इन्हें भुलाया नहीं जा सकता।

नई दिली। एससी-एसटी एक्ट को लेकर किए गए फैसलों से केंद्र की मोदी सरकार ने सवर्णों नाराजगी मोल ले ली है, यही नहीं ये मुदृदा कांग्रेस के भी गले की फांस बन गया है। नाराजगी का आलम यह है कि पिछले कई हफ्ते से लोग अगले लोकसभा चुनाव में बीजेपी की सरकार चुनने की बजाय नोटा के विकल्प को चुनने की सोशल मीडिया (फेसबुक, व्हाट्सअप, ट्विटर) पर मुहिम चला रहे हैं। अब बीजेपी के अंदर भी एससी-एसटी एक्ट में हुए संशोधन को लेकर विरोध के स्वर उठने लगे हैं। इससे पार्टी आलाकमान की चिंता बढ़ गई है। सवर्ण जातियों की नाराजगी से विचलित मोदी सरकार ने दिल्ली मे अपने शीर्ष मंत्रियों अरुण जेटली, निर्मला सीतारमण, प्रकाश जवाड़ेकर, जेपी नड्डा, रविशंकर प्रसाद, पीयूष गोयल और स्मृति ईरानी के साथ बैठक की। इसके अलावा बीजेपी सांसद भूपेंद्र यादव, रामलाल और मीनाक्षी लेखी भी बैठक में शामिल हुईं। सूत्रों के हवाले से खबर है कि बैठक में बीजेपी नेताओं से सवर्ण वर्ग की नाराजगी को लेकर चर्चा की गई। बैठक में इस बात पर चर्चा हुई कि मोदी सरकार की ओर से ओबीसी और दलितों को लेकर किए गए फैसलों से सवर्ण जाति में नाराजगी फैल रही है,जिसे नाराजगी को कैसे दूर किया जाए। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नेतृत्व वाली सरकार चाहती है कि सवर्ण जातियों की नाराजगी को किस तरह से दूर किया जाए जिससे यह तबका भी पार्टी के साथ जुड़ा रहे। साथ ही एससी/एसटी और ओबीसी जाति के लोग भी नाराज ना हों। इसी मसले को लेकर अमित शाह ने एनडीए के घटक दलों के नेताओं के साथ भी बात की है। बता दें कि बीजेपी साल 2011 की सामाजिक-आर्थिक जनगणना के मुताबिक देश में दलितों की आबादी 16.6 फीसदी, आदिवासियों की आबादी 8.6 फीसदी, मुस्लिमों की आबादी करीब 14 फीसदी है। बीजेपी का मानना है कि देश में करीब 25 से 30 फीसदी आबादी अगड़ी जाति की है, जो उनके पारंपरिक वोटर रहे हैं। लिहाजा, इन्हें भुलाया नहीं जा सकता।