जो लौट के घर न आए….

नई दिल्ली: एक बार फिर सीमा पार से आए दुश्मनों ने हिंदुस्तान पर हमला किया है। पाकिस्तान से आए 4 आतंकवादियों ने जम्मू-कश्मीर के उरी सेक्टर में मौजूद आर्मी बेस को अपना निशाना बनाया। इस आतंकी हमले में 17 जवान शहीद हो गए हैं। शहीद जवानों में 15 बिहार रेजिमेंट के और 2 डोगरा रेजिमेंट के हैं। डोगरा रेजिमेंट वाले जवान जम्मू कश्मीर के रहने वाले थे। जबकि बिहार रेजिमेंट के शहीद जवानों में 4 यूपी, 3 बिहार, 3 महाराष्ट्र, 2 झारखंड, 2 पश्चिम बंगाल और 1 राजस्थान के थे। घायल हुए जवान भी अलग-अलग हिस्सों से हैं। शहीद जवानों के नाम इस प्रकार हैं।




सुबेदार करनैल सिंह : बिशना, जम्मू (जम्मू-कश्मीर)

जम्मू के बिश्नाह इलाके के शिबूचक के रहने वाले सूबेदार करनैल सिंह पिछले करीब ढाई सालों से उरी में तैनात थे। अब उनकी यूनिट अगले महीने पठानकोट जानी थी जिसके लिए एडवांस पार्टी पठानकोट पहुंच चुकी थी। उनके पठानकोट जाने से पहले वो छुट्टी लेकर कुछ दिनों के लिए घर आना चाहते थे।

करनैल सिंह की इस शहादत से पूरा शिबूचक गांव सदमे में है। जैसे ही उनकी शहादत की खबर उनके गांव पहुंची तो पूरा गांव इस दुःख के समय उनके घर जा पहुंचा। पूरे गांव में किसी घर चूल्हे नहीं जले गांव वालों ने सरकार से पाकिस्तान के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है।

हवलदार रवि पाल : सांबा, जम्मू (जम्मू-कश्मीर)

रविवार को श्रीनगर के उरी में सेना के कैंप पर हुए हमले में जम्मू के साम्बा सेक्टर के हवलदार रवि पॉल ने भी अपने प्राणों की आहुति दे दी। रवि पॉल के परिजन अब सरकार को आतंकवाद से निपटने के लिए सेना को पूरे अधिकार देने की मांग कर रहे है।

जम्मू के साम्बा सेक्टर के सर्वा गांव में 10 डोगरा यूनिट के हवलदार रवि पॉल के घर रविवार शाम से ही उनके गांववालों, परिजनों और दोस्तों का ताँता लगा हुआ है और लोग इस शहीद की शहादत को नम आँखों से श्रधांजलि दे रहे है। 43 साल के रवि पॉल 23 साल से सेना में है। उनके घर में उनके 4 भाई, माँ, पत्नी और 2 बेटे है।




सिपाही उईके जनराव : अमरावती, महाराष्ट्र

अमरावती के रहने वाले शहीद पंजाब जानराव उईके के घर भी यह खबर मातम का संदेश बन गई। उनके गांव में मातम पसरा हुआ है। लेकिन, उनके परिवार के कुछ सदस्यों को इस बारे में कुछ बताया ही नहीं गया। कुछ लोग खबर को अफवाह बताते भी नजर आएं शायद उम्मीद थी कि खबर झूठी निकल जाए।

उईके की अभी शादी नहीं हुई थी लेकिन मां-बाप के बुढ़ापे की वह उम्मीद था। अपने पिता की तरह देश के लिए मरने की कसम उसने बचपन में ही खा ली थी। उसके पिता जानराव भी सेना में थे और देश की सेवा की थी। पूरे गांव को लोग इस हालात में उनके साथ खड़े हैं।

नायक एसके विद्यार्थी : गया, बिहार

गया में नायक एसके विद्यार्थी के परिवार के लिए भी यह खबर बड़े हादसे की तरह पहुंची। पहले तो किसी को भरोसा ही नहीं हुआ लेकिन समय बीतते-बीतते खबर पुख्ता होती चली गई। फिर हर तरफ रोने की आवाजें ही थी। लोगों का जुटना भी शुरू हो गया था। विद्यार्थी के परिवार में उनकी मां के अलावा चार बच्चे और पत्नी हैं। करीब 16 साल पहले उनकी शादी हुई थी। दुर्गा पूजा में आने के लिये उनकी बच्चों से बात हुयी थी। जम्मू के उरी में शहीद हुए जवान गया के परैया थाना के बोकनारी गांव के रहने वाले थे।

लांस नायक जी शंकर : सतारा, महाराष्ट्र

सतारा लांस नायक जी शंकर के गांव में भी सैकड़ों लोगों की भीड़ लगी है। ज्यादातर लोगों को टीवी के जरिए उनके शहीद होने की खबर लगी थी। जबकि, परिजनों को पहले ही सूचना दे दी गई थी। रोने की आवाज सुनकर जब पड़ोसी पहुंचे तो वो भी सन्न हो गए। सभी लोगो ने शहीद को श्रद्धांजलि दी है।

सातारा के माण तहसील के जाशी गाव के रहनेवाले शहीद लान्सनायक चंद्रकांत शंकर गलांडे की उम्र अभी 27 साल थी। उनकी पत्नी के अलावा घर में दो बच्चें भी हैं। बच्चों की उम्र काफी छोटी है और उनके सामने एक बड़ी मुसीबत है। गांव के लोग भी शहीद को सलाम करने में लगे हैं।




सिपाही हरिंदर यावद : गाजीपुर, यूपी

छह भाइयों में पांचवें स्थान पर थे शहीद हरिंदर यादव। इस बहादुर के शहीद होने की कहानी तो गांव वालों के लिए बहुत बड़ा झटका है। क्योंकि, इसकी बहादुरी के किस्से सरहदों तक ही सीमित नहीं थे। वह गांव में भी हीरो था। उसने गांव में भी ऐसी बहादुरी दिखाई थी कि लोग उसके कायल हो गए थे। पिछली होली को गांव के एक घर में आग लगी थी हरिंदर ने बिना कोई प्रवाह किये उसमें घुस कर 8 साल के बच्चे को निकाला था। उसकी जान बचाई थी। उनकी पत्नी को काफी देर तक उसके बारे में नहीं बताया गया और सभी को रोका जा रहा था। शहीद की चोट पूरे गांव को लगी है।

शहीद हुए 28 वर्षीय हरेंद्र यादव के भी चार साल और दो साल के दो बेटे हैं। गाजीपुर में पड़ोसी उनको याद करते हुए बताते हैं कि उन्‍होंने इसी मार्च में एक झोपड़ी में आग लगने से किस तरह दो व्‍यक्तियों और मवेशियों की जान बचाई थी।

सिपाही टीएस सोमनाथ : नासिक, महाराष्ट्र

नासिक के रहने वाले शहीद संदीप सोमनाथ ठोक बिहार रेजीमेंट में थे। 25 साल के संदीप के शहीद होने की सूचना जब वहां पहुंची तो सभी सन्न थे। वे नासिक के सिन्नर तहसील के खडांगली गांव के रहने वाले थे। उनकी शादी नहीं हुई थी लेकिन उसके लिए परिजन तैयारियों में जरूर लगे थे। पर, मातम वाली इस खबर ने न सिर्फ उनके परिवार को बल्कि पूरे इलाके को गमगीन कर दिया। सभी ने धैर्य खो दिया और कातिलों को कोसते रहे। दो बहनों और एक भाई के अलावा पूरा घर बेसुध पड़ा हुआ था। गांव का बच्चा-बच्चा तक समझ गया था कि आखिर हुआ क्या है। और सबके मुंह पर एक ही सवाल था कि भारत क्या करेगा ?

हवलदार अशोक कुमार : आरा, बिहार

बिहार के आरा के रहने वाले अशोक कुमार सिंह के घर का हाल भी कुछ ऐसा ही था। हवलदार अशोक सिंह के दो बच्चे हैं। उनमें से एक बिहार रेजीमेंट में ही देश की सेवा में लगा है जबकि दूसरा अभी पढ़ाई कर रहा है। बाप के शहीद होने के बाद भी बेटे के जज्बे में कोई कमी नहीं है। वह अभी भी दुश्मनों के दांत खट्टे कर देने के लिए काफी है।

आसपास के गांवों से भी लोग खबर सुनकर वहां की ओर रुख कर गए। गांव को लोग तो वहां जुटे ही थे लेकिन, आसपास के गांव को लोग भी पहुंच गए। सभी का एक ही सुर में कहना था कि अब पाकिस्तान को करारा जवाब मिलना चाहिए। साथ ही लोग अपील कर रहे थे कि पाक में घुसकर आतंकियों को मारे भारत सरकार।




सिपाही राजेश कुमार सिंह : जौनपुर, यूपी

सिपाही राजेश कुमार सिंह के पिता राजेंद्र प्रसाद सिंह ने जौनपुर में अपने गांव में कहा कि वह इस बात से नाराज हैं कि उनका बेटा आतंकी हमले में मारा गया। उन्‍होंने कहा कि ”यदि वह युद्ध में शहीद होता तो मुझे गर्व होता।” राजेश के परिवार में माता-पिता के अलावा पत्‍नी और छह साल का बच्‍चा है।

सिपाही राकेश सिंह : कैमूर, बिहार

बिहार के कैमूर जिले के नुआंव थाना क्षेत्र के राकेश सिंह भी अपने पीछे दो साल का बेटा हर्षि‍त छोड़ गए हैं। मासूम की आंखें जहां अपने पिता को ढूंढ़ रही हैं, वहीं पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल है। 2008 में सेना में भर्ती हुए राकेश का शुक्रवार के बाद से ही परिवार वालों से संपर्क नहीं हुआ है। साल 2012 में उनकी शादी हुई थी। राकेश चार भाई थे, जिनमें से एक ही पहले ही किसी बीमारी के कारण मौत हो गई है। जबकि दो भाई खेती पर निर्भर हैं।

सिपाही जावरा मुंडा : खूंटी, झारखंड

जावरा मुंडा है जो खूंटी (मुरहू थानाक्षेत्र के मेराल गांव) के हैं।  सोमवार को जैसे ही जवरा की शहादत की खबर उनकी पत्नी झींगी देवी को मिली, वह बेहोश हो गयी। मौके पर मौजूद सदर अस्पताल के चिकित्सकों ने उन्हें सलाइन चढ़ाया। कुछ ही समय में डीसी चंद्रशेखर, एसपी अनीश गुप्ता, एसडीपीओ रणवीर सिंह, कार्यपालक दंडाधिकारी रवींद्र गगराई सहित अन्य राजनीतिक और प्रशासनिक अधिकारी और ग्रामीण वहां पहुंचे और परिजनों को ढ़ाढ़स दिया। शहीद जवरा मुंडा की तीन बेटियां हैं। बड़ी बेटी आठवीं कक्षा में पढ़ती है, जबकि दूसरी बेटी सुषमा तीसरी कक्षा में है। सबसे छोटी बेटी शिल्पा ढ़ाई साल की है। जवरा के पिता गौड़ मुंडा की मृत्यु तीन साल पहले हो गयी थी, लेकिन उनके दादा अब भी स्वस्थ हैं।

जबरा का छोटा भाई दाउद मुंडा ने बताया कि भाई की कमाई से ही पूरा परिवार चलता है। उसने बताया कि सोमवार सुबह नौ बजे सेना मुख्यालय से फोन पर उसे जवरा के शहीद होने की जानकारी दी गयी। उसने बताया कि वे लोग मूल रूप से कर्रा प्रखंड के कुर्से फुटकल टोली गांव के रहने वाले हैं। उन्होंने रोते हुए कहा कि कश्मीर जाने के पहले उसे भैया ने कहा था कि गांव में सबसे मिल कर रहना। लड़ाई-झगड़ा मत करना और परिवार और बच्चों का ध्यान रखना। 29 सितम्बर को सेना की बहाली है उसमें जरूर जाना। दाउद ने कहा कि किसे मालूम था कि यही शिक्षा भैया की अंतिम शिक्षा होगी।

जबरा के देश प्रेम ने उसे सेना में जाने के लिए प्रेरित किया। 2005 में उनकी बहाली 6 बिहार रेजिमेंट में हुई। शुरू से ही उनकी पोस्टिंग जम्मू कश्मीर में रही। वह 15 दिनों की छुट्टी के बाद 16 अगस्त को ड्यूटी में गया था। शहीद की पत्नी झींगी देवी ने बताया कि एक सप्ताह पहले ही उनकी बातचीत हुई थी। जवरा की शहादत के बाद स्थानीय लोगों में पाकिस्तान के प्रति बेहद आकोश है। गांव के गोपाल मुंडा, राजू नाग, राम सिंह मुंडा सहित अन्य लोगों के अलावा वहां मौजूद तमाम लोगों ने एक स्वर से कहा कि अब सिर से पानी उपर आ चुका है। पाकिस्तान को घुस कर उसके घर में मारना चाहिए। अभी यदि सरकार मुहतोड़ जवाब नहीं देगी, तो पाकिस्तान के साथ ही आतंकियों का भी मनोबल बढ़ेगा। इसलिए सरकार को खामोश नहीं बैठना चाहिए।




सिपाही नायमन कुजूर : गुमला, झारखंड

नायमन कुजूर का परिवार राजधानी रांची के खोरहाटोली (कोकर इलाका) में रहता है। घर में पत्नी, मां और एक छोटा बच्चा है। रांची में परिवार एक किराये के मकान में रहता है। नायमन की पत्नी वीणा ने सरकार के प्रति हमले को लेकर रोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि सरकार कुछ नहीं कर रही है। मैं चाहती हूं कि सरकार को ठोस कदम उठाना चाहिए ताकि भविष्‍य में ऐसा कृत्य करने का साहस कोई न कर सके।

नायमन की पत्नी वीणा की दोस्त शालिनी (जिनके पति भी बिहार रेजिमेंट में कार्यरत हैं ) ने बताया कि हमले के बाद उनकी अपने पति से बात हुई। बातचीत के क्रम में उन्होंने बताया कि सुबह का वक्त था और नायमन उठकर अपने सुबह के काम में व्यस्त थे तभी ग्रेनेड हमला हुआ जिसमें वह शहीद हो गये। शालिनी ने कहा कि मोदी सरकार को सोचना चाहिए कि हम इतनी कम उम्र में विधवा हो जाते हैं। हमारे बच्चे अनाथ हो जाते हैं… बात से कुछ नहीं होगा। कठोर कदम उठाने की जरूरत है। हम चाहते हैं कि पाकिस्तान को सबक सिखाया जाए लेकिन इससे किसी को नुकसान न पहुंचे, न भारत की जनता को और ना ही पाकिस्तान की जनता को… नागरिक दोनों ओर के सुरक्षित रहें…उन्होंने कहा कि उरी में सद्भावना स्थापित हो।

सिपाही विश्वजीत गोराई : द. 24 परगना, वेस्ट बंगाल

उरी में आतंकियों की कायराना हरकतों में शहीद हुए दक्षिण 24 परगना के विश्वजीत गोराई के परिवार तो मुसीबतों का पहाड़ ही टूट पड़ा है। 20 साल के गोराई के पिता दैनिक मजदूरी कर के अपना घर चलाते रहे हैं। विश्वजीत की यह पहली ही पोस्टिंग थी। उसके बाद अब मजदूरी करने वाले पिता ही एक मात्र कमाने वाले शख्स उसके परिवार में बचे हैं।

जिस समय खबर वहां पहुंची लोग सन्न रह गए। क्योंकि, बेटे की सेना में नौकरी लगने की खुशी अभी चल ही रही थी कि इतने बड़े मातम की खबर आ गई। उसके परिवार के सभी सपने टूट गए। शहीद के घर के पास काफी लोग जुटे थे। सभी शहीद को सलाम कर रहे थे लेकिन, परिवार को लेकर वे दुखी थे।

सिपाही जी दलाई : हावड़ा, वेस्ट बंगाल

बंगाल के रहने वाले सिपाही जी. दलाई की शहादत के बाद उनकी मां ने कहा कि बेटे ने मुझे गुरुवार को फोन किया। उसने कहा कि वहां बमबारी हो रही है और कभी भी जान जा सकती है। जिन्होंने मेरे बेटे की जान ली है, उन्हें सख्त सजा मिलनी चाहिए। शहीद दलाई के पिता कहते हैं, ”मेरा बेटा महज 22 साल का था। सरकार को मेरे बेटे के हत्यारों के खिलाफ सख्त कदम उठाने चाहिए।

लांस नायक आरके यादव : बलिया, यूपी

उरी आतंकी हमले में शहीद हुए लांस नायक आरके यादव की पत्‍नी को अभी उनकी शहादत के बारे में नहीं बताया गया है। वह गर्भवती हैं और इसी महीने उनके तीसरे बच्‍चे की डिलीवरी होने वाली है। उनकी दो बेटियां हैं और बड़ी बेटी की उम्र आठ साल है। तीन दिन पहले लांस नायक यादव ने बलिया में अपनी मां से बात की थी। उस दौरान अपनी मां से कहा था कि मैं जल्‍द ही ”ऊंची रेंजों में तैनात” होने जा रहा हूं और वहां पर फोन से बात की सुविधा नहीं मिलेगी इसलिए ”जितनी बात करनी हो, कर लो।” लांस नायक यादव 6 बिहार रेजीमेंट की एडवांस पार्टी के सदस्‍य थे जोकि शुक्रवार में उरी पहुंची थी। वहां इस यूनिट को 10 डोगरा रेजीमेंट से कमान की अदला-बदली करनी थी।

हवलदार एनएस रावत : राजसमंद, राजस्थान

शहीद रावत के पीछे उनकी पत्नी रोडी देवी के साथ ही चार पुत्रियां पायल, दीपा, लता, आशा व एक पुत्र चन्दन सिंह है जो अजमेर जिले के जवाजा के स्कूल में दूसरी कक्षा में अध्ययनरत है। रावत की शहादत की सूचना दोपहर तक उनकी पत्नी को नहीं दी गई थी। इधरए हवलदार एनएस रावत की शहादत की सूचना जैसे ही उनके छोटे से गांव राजवा पहुंची तो पूरे गांव में शोक की लहर छा गई। गांव के साथ ही पूरी बिलियावास ग्राम पंचायत में भी शोक का माहौल व्याप्त हो गया। गांव में सोमवार को किसी भी घर में चूल्हे नहीं जले।

सूचना मिलने के बाद सिर्फ राजवा ही नहीं पूरे भीम उपखण्ड क्षेत्र में हवलदार रावत की शहादत को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया। गांव में सभी लोग रावत के बारे में ही जानने को उत्सुक दिखाई दिए। उल्लेखनीय है कि मगरा क्षेत्र के लोगों में सेना में जाने को लेकर विशेष उत्साह रहता है। इस क्षेत्र के विभिन्न गांवों के लोग बड़ी संख्या में सेना में हैं। पूर्व में कारगिल युद्ध के दौरान भी यहां के जवान शहीद हो चुके हैं।

सिपाही गणेश शंकर : संत कबीर नगर, यूपी  

संत कबीर नगर के सुरेश चंद यादव का कहना है कि उन्‍होंने शहीद हुए अपने छोटे भाई गणेश शंकर (34) से एक सप्‍ताह पहले ही बहन की शादी की योजनाओं के बारे में बातचीत की थी। उन्‍होंने अक्‍टूबर में आने का वादा किया था। गणेश शंकर पर अपने बड़े परिवार के भरण-पोषण का जिम्‍मा था। उनके तीन बच्‍चे हैं और सबसे बड़े की आयु 10 साल है।

हिंदुस्‍तान की सरजमीन हिंदुस्‍तानी जाबांजों के लहु से रंग रही है। देश में गुस्‍सा है, उबाल है क्‍योंकि जो लहु बह रहा है वो सिर्फ लाल नहीं है। उसमें देश के सिपाहियों की बहादुरी का रंग है। टीम पर्दाफाश शहीद हुए उन वीर जवानों को शत-शत नमन करती है।

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