पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया गया शहीद जवान राजकिशोर सिंह का अंतिम संस्कार

आरा: जम्मू एवं कश्मीर के उड़ी में आतंकवादी हमले में शहीद हुए जवान राजकिशोर सिंह का यहां शनिवार को गंगा नदी के केवतिया घाट पर पूरे राजकीय सम्मान के साथ शहीद का अंतिम संस्कार किया गया। पार्थिव शरीर शनिवार सुबह बिहार के भोजपुर जिले के बड़हरा प्रखंड स्थित उनके पैतृक गांव पीपरपांती लाया गया था। शहीद के पार्थिव शरीर को घर लाए जाने के साथ ही घर और गांव का माहौल गमगीन हो गया। उनके अंतिम दर्शन करने पहुंचे आस-पास के इलाके के लोगों की आंखें भी नम हो गईं।




शहीद की अंत्येष्टि में जिले के प्रभारी मंत्री विजय प्रकाश के साथ कई गणमान्य लोग शामिल थे। सेना के जवानों ने उन्हें नम आंखों से सलामी दी। सैकड़ों लोगों ने भी उनके पार्थिव शरीर पर श्रद्धासुमन अर्पित किए। राजकिशोर के 10 वर्षीय बेटे हेमंत सिंह ने उन्हें मुखाग्नि दी। राजकिशोर का शव जैसे ही शनिवार सुबह उनके पैतृक गांव पहुंचा पूरा गांव ‘राज किशोर अमर रहे’, ‘पाकिस्तान मुर्दाबाद’ जैसे नारों से गूंज उठा। शव के पहुंचते ही हजारों लोग उनकेअंतिम दर्शन के लिए उमड़ पड़े।

पिता का पार्थिव शरीर देखकर उनकी 12 वर्षीय बेटी सुहानी रो पड़ी। वहीं, शहीद की पत्नी कंचन देवी का रो-रो कर बुरा हाल था। उल्लेखनीय है कि उड़ी में बीते 18 सितंबर को सैन्य शिविर पर हुए आतंकवादी हमले में घायल हुए 35 वर्षीय जवान राज किशोर सिंह ने दिल्ली के आर्मी रिसर्च एंड रेफरल अस्पताल में शुक्रवार को इलाज के दौरान दम तोड़ दिया था। राजकिशोर का शव शुक्रवार शाम पटना लाया गया था।

पीपरपांती गांव के रहने वाले राजकिशोर सिंह की शादी वर्ष 2003 में बड़हरा के मौजमपुर गांव निवासी कंचन देवी के साथ हुई थी। पुत्र हेमंत आठ साल और पुत्री सुहानी बारह वर्ष की है। देशभक्ति का जज्बा, पूरा परिवार है फौज में पीपरपांती गांव के स्व. विष्णु सिंह को कुल तीन पुत्र थे। विष्णु सिंह भी पहले फौज में थे। रिटायरमेंट के बाद उनकी मौत हो गई थी।

बड़े पुत्र बेनी माधव सिंह बिहार रेजिमेंट से रिटायर होने के बाद असम में डीएफसी में कार्यरत है। मंझले बेटे अशोक सिंह, बिहार रेजिमेंट में ही नायक सुबेदरा के पद पर जलपाईगुड़ी में कार्यरत है। छोटा बेटे नायक राजकिशोर सिंह उड़ी सेक्टर में कार्यरत थे।