Urja Mantry Ki Manmani Se Noida Or Greater Noida Ki Lakhon Zindgiyan Danv Par

लखनऊ। 2017 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों से सक्रिय राजनीति में पदार्पण करने के बाद पहली बार विधायक बनने के साथ यूपी सरकार के कैबिनेट मंत्री बने श्रीकांत शर्मा की मनमानी और अनुभवहीनता का मामला नोएडा में सामने आया है। जहां सूबे के ऊर्जा मंत्री के रूप में जिम्मेदारी संभाल रहे श्रीकांत शर्मा के विश्वासपात्र अधिकारियों ने सिंचाई विभाग की जमीन पर अतिक्रमण कर यमुना दोआब बंध की पटरी पर हाईटेंशन पॉवर लाइन का काम शुरू कर दिया है। सिंचाई विभाग ने भी इस मामले को लखनऊ में बैठे अपने अधिकारियों को अवगत करवाया लेकिन परिणाम सिफर रहा।

सिंचाई विभाग के अधिकारियों की माने तो इस काम को ऊर्जा विभाग के अधिकारी पूरी दबंगई के साथ अंजाम दे रहे हैं। जब उन्हें यमुना दोआब बंध पर बरसात के मौसम में आने वाली बाढ़ और आस पास के इलाके में रहने वाले लाखों परिवारों के जानमाल का हवाला दिया गया, लेकिन सिंचाई विभाग की चेतावनी न तो ऊर्जा विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों के कानों तक पहुंची और न ही मंत्री जी के।

सिंचाई विभाग की हैडवर्स खंड ओखला इकाई के अंतर्गत आने वाले यमुना दोआब बंध का निर्माण यमुना नदी में आने वाली बाढ़ को नियंत्रित करने के लिए किया गया था। सिंचाई विभाग के अधिकारी बताते हैं कि नोएडा और ग्रेटर नोएडा का बड़ा रिहाइशी इलाका यमुना की चपेट में आ जाता था। स्थानीय लोगों को बाढ़ की आपदा से बचाने के लिए इस बांध का निर्माण किया गाय था।

सिंचाई विभाग के अभियंताओं की माने तो बंधे की पटरी पर हाईटेंशन लाइन के खंभे लगाने के भयंकर परिणाम हो सकते हैं। खंभों को खड़ा करने के लिए बंध में बड़े स्तर पर खुदाई का काम किया जा रहा है जिससे बंध कमजोर हो रहा है। जिससे बाढ़ की दशा में ये खंभे बंधे के टूटने का कारण बन जाएंगे।बांध क्षतिग्रस्त होता है तो हाईटेंशन लाइन के खंभे गिर सकते हैं, जिसके परिणाम भयानक हो सकते हैं।

सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने जब इस विषय में ऊर्जा विभाग के अधिकारियों को अवगत करवाया तब उन्होंने लापरवाई भर लहजे में सालों से बाढ़ न आने का हवाला देकर भविष्य की आशंकाओं के लिए प्रोजेक्ट को रोकने से इंकार कर दिया।

ऊर्जा विभाग के इस प्रोजेक्ट को लेकर दूसरी सबसे बड़ी बात ये सामने आई है कि सिंचाई विभाग की सहमति के बिना ही शुरू कर दिया। चूंकि जिस भूमि पर ​ऊर्जा विभाग खंभे खड़े कर रहा है वह भूमि सिंचाई विभाग के स्वामित्व में आती है, ऐसी परिस्थिति में विभागीय स्तर पर सहमति बनाई जानी आवश्यक थी।

ज्ञात हो कि ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा की केन्द्रीय संगठन में गहरी पैठ मानी जाती है। यूपी सरकार में उनके मंत्री बनाए जाने और मीडिया के समक्ष सरकार का अधिकारिक पक्ष रखने के अधिकार पाने के चलते उनकी हैसियत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और दो उप मुख्यमंत्रियों के बाद यानी सरकार में तीसरे नंबर पर आंकी जाती है। जिस वजह से सिंचाई विभाग के मंत्री भी और उनके विभाग के अधिकारी ऊर्जा मंत्री की मनमानी का विरोध नहीं कर पा रहे हैं।