भारत को ‘नाटो सहयोगी देश’ का दर्जा देने की तैयारी में अमेरिका

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भारत को 'नाटो सहयोगी देश' का दर्जा देने की तैयारी में अमेरिका

नई दिल्ली। अमेरिकी संसद में करीब आधा दर्जन प्रभावशाली सांसदों ने अमेरिका-भारत की रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने के लिए एक अहम बिल पेश किया है। अगर यह बिल लागू होता है तो अमेरिकी विदेश विभाग भारत को नाटो (नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गेनाइजेशन) के सहयोगी का दर्जा देगा। ‘अमेरिका ऑ‌र्म्स एक्सपोर्ट कंट्रोल एक्ट’ में भारत को नाटो सहयोगी देश के तौर पर तरजीह मिलेगी।

Us Lawmakers Move To Give India Equal Strategic Standing As Nato :

आखिर क्या है इस बिल में ?

इस बिल पर काम कर रहे यूएस-इंडिया स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप फोरम के मुताबिक, ये इस बात का प्रभावपूर्ण संकेत होगा कि डिफेंस डील में भारत अमेरिका की प्राथमिकता में है। पिछले सप्ताह सांसद जो विल्सन ने बिल HR 2123 पेश किया था। वो ‘हाउस फॉरेन अफेयर्स कमिटी’ के वरिष्ठ सदस्य हैं।

विल्सन ने कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है और क्षेत्र में स्थिरता का अहम स्तंभ है। भारत ने निर्यात नियंत्रण की नीतियों को लेकर हमेशा प्रतिबद्धता दिखाई है।

उन्होंने कहा कि यूएस कानून में ये संशोधन भारतीय-प्रशांत क्षेत्र में यूएस-भारत की साझेदारी को सुरक्षा प्रतिबद्धता को और मजबूत करेगा। इस विधेयक को समर्थन देने वालों में एमी बेरा (यूएस कांग्रेस में सबसे ज्यादा लंबे समय तक सेवा देने वाले भारतीय-अमेरिकी) और जॉर्ज होल्डिंग (हाउस इंडिया कॉकस के उपाध्यक्ष), ब्रैड शेरमैन, तुलसी गबार्ड और टेड योहो का नाम शामिल है।

अभी नाटो के सहयोगी देशों को मिला है ये दर्जा

नेशनल डिफेंस ऑथराइजेशन ऐक्ट (NDAA), 2017 में भारतीय-अमेरिकी रक्षा साझेदारी को देखते हुए भारत को यूएस के ‘प्रमुख रक्षा सहयोगी’ का दर्जा दिया गया था। इसमें भी भारत के साथ व्यापार और तकनीक साझा करने पर विशेष सहयोग और प्राथमिकता देने की बात कही गई थी।

अभी तक नाटो के सहयोगी देश का दर्जा इजरायल, दक्षिण कोरिया, न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रेलिया और जापानको मिला हुआ है। NDAA 2017 के मूल उद्देश्य को पूरा करने के लिए ऑर्म्स एक्सपोर्ट ऐक्ट में संशोधन किया जाएगा ताकि भारत नाटो के सहयोगी देशों की कतार में आ सके।

नई दिल्ली। अमेरिकी संसद में करीब आधा दर्जन प्रभावशाली सांसदों ने अमेरिका-भारत की रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने के लिए एक अहम बिल पेश किया है। अगर यह बिल लागू होता है तो अमेरिकी विदेश विभाग भारत को नाटो (नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गेनाइजेशन) के सहयोगी का दर्जा देगा। 'अमेरिका ऑ‌र्म्स एक्सपोर्ट कंट्रोल एक्ट' में भारत को नाटो सहयोगी देश के तौर पर तरजीह मिलेगी।

आखिर क्या है इस बिल में ?

इस बिल पर काम कर रहे यूएस-इंडिया स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप फोरम के मुताबिक, ये इस बात का प्रभावपूर्ण संकेत होगा कि डिफेंस डील में भारत अमेरिका की प्राथमिकता में है। पिछले सप्ताह सांसद जो विल्सन ने बिल HR 2123 पेश किया था। वो 'हाउस फॉरेन अफेयर्स कमिटी' के वरिष्ठ सदस्य हैं।

विल्सन ने कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है और क्षेत्र में स्थिरता का अहम स्तंभ है। भारत ने निर्यात नियंत्रण की नीतियों को लेकर हमेशा प्रतिबद्धता दिखाई है।

उन्होंने कहा कि यूएस कानून में ये संशोधन भारतीय-प्रशांत क्षेत्र में यूएस-भारत की साझेदारी को सुरक्षा प्रतिबद्धता को और मजबूत करेगा। इस विधेयक को समर्थन देने वालों में एमी बेरा (यूएस कांग्रेस में सबसे ज्यादा लंबे समय तक सेवा देने वाले भारतीय-अमेरिकी) और जॉर्ज होल्डिंग (हाउस इंडिया कॉकस के उपाध्यक्ष), ब्रैड शेरमैन, तुलसी गबार्ड और टेड योहो का नाम शामिल है।

अभी नाटो के सहयोगी देशों को मिला है ये दर्जा

नेशनल डिफेंस ऑथराइजेशन ऐक्ट (NDAA), 2017 में भारतीय-अमेरिकी रक्षा साझेदारी को देखते हुए भारत को यूएस के 'प्रमुख रक्षा सहयोगी' का दर्जा दिया गया था। इसमें भी भारत के साथ व्यापार और तकनीक साझा करने पर विशेष सहयोग और प्राथमिकता देने की बात कही गई थी।

अभी तक नाटो के सहयोगी देश का दर्जा इजरायल, दक्षिण कोरिया, न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रेलिया और जापानको मिला हुआ है। NDAA 2017 के मूल उद्देश्य को पूरा करने के लिए ऑर्म्स एक्सपोर्ट ऐक्ट में संशोधन किया जाएगा ताकि भारत नाटो के सहयोगी देशों की कतार में आ सके।