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ईरान पर और कड़े प्रतिबंध लगाने की तैयारी में अमेरिका, जानिए कौन से देश किसके साथ

Us President Donald Trump Says New Sanctions On Iran To Start Monday

By पर्दाफाश समूह 
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नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा गतिरोध जारी है। इस बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को कहा कि ईरान के खिलाफ सोमवार से नये बड़े प्रतिबंध लगाये जाएंगे। ट्रंप ने ट्वीट कियाए ष्हम ईरान के ऊपर सोमवार से नये बड़े प्रतिबंध लगाने जा रहे हैं।

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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कुछ ही घंटे पहले कहा था कि ईरान वाशिंगटन का सबसे अच्छा मित्र बन सकता है कि अगर वह परमाणु हथियार त्याग दे। राष्ट्रपति ट्रंप का यह बयान ईरान की ओर से दी गई चेतावनी के बाद आया है। व्हाइट हाउस के बाहर पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहाए ष्हम नहीं चाहते हैं कि ईरान एक परमाणु संपन्न राष्ट्र बने। इस्लामिक गणराज्य एक अमीर देश बन सकता है। हम अच्छे दोस्त बन सकते हैं।

ईरान एक खुशहाल देश बन सकता है अगर वह परमाणु हथियार हासिल करने की अपनी मंशा छोड़ दे। मुझे उम्मीद है ऐसा हो सकता है। अमेरिका ने ईरान में अपने निगरानी ड्रोन गिराये जाने के बाद ईरान की मिसाइल नियंत्रण प्रणाली और एक जासूसी नेटवर्क पर साइबर हमले किए हैं। अमेरिकी समाचार पत्र वाशिंगटन पोस्ट ने यह खबर दी है। समाचार पत्र ने लिखा है कि हमले से राकेट और मिसाइल प्रक्षेपण में इस्तेमाल होने वाले कंप्यूटरों को नुकसान पहुंचा है।

हालांकि अमेरिका के रक्षा अधिकारियों ने समाचार पत्र की रिपोर्ट की पुष्टि नहीं की है। फारस की खाड़ी में ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ता तनाव एक बड़े युद्ध की तरफ इशारा कर रहा है। इसकी शुरुआत पिछले साल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ हुई परमाणु संधि तोड़कर की और बाद में इस खाड़ी देश पर कई प्रतिबंध लगा दिए गए। हाल ही में ओमान की खाड़ी में तेल के दो टैंकरों पर हमले के बाद तनाव और बढ़ गया।

अमेरिका ने इस हमले में ईरान का हाथ बताया जबकि ईरान ने इसका खंडन किया। इसके बाद अमेरिकी जासूसी ड्रोन को ईरान ने मार गिराया। ट्रंप ने इसी दिन ईरान पर हमले के आदेश दिए लेकिन 10 मिनट में ही वे पीछे हट गए। लेकिन यहां के हालात अब भी तनावपूर्ण हैं। ट्रंप का आदेश पाकर अमेरिकी लड़ाकू विमान और युद्धपोत सक्रिय हो गए। इस बीच ट्रंप ने अपने सलाहकारों से पूछा कि ईरान पर हमले में कितने लोग मारे जाएंगे।

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सेना के जनरल बताया कि करीब डेढ़ सौ लोगों की मौत होगी। इसके बाद ट्रंप ने हमले को रोकने के आदेश दिए। दरअसल ईरान ने बृहस्पतिवार को एक अमरिकी ड्रोन मार गिराया था। ईरान का दावा है कि यह जासूस ड्रोन ईरानी हवाई क्षेत्र में था जबकि अमेरिका इस दावे को झूठा बताया। ईरान ने यह भी कहा कि कम से कम 35 लोगों को लेकर जा रहा अमेरिकी विमान ईरानी हवाई क्षेत्र के बिल्कुल करीब से होकर गुजरा था लेकिन उन्होंने उस पर हमला नहीं किया।

अमेरिका-ईरान के बीच बीते कुछ दिनों से तनाव लगातार बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने मध्य-पूर्व में अपनी सेना और साजो सामान की तैनाती कर ली है। ईरान ने खुद को परमाणु समझौते से आंशिक तौर पर अलग करने के बाद कह दिया है कि वह अमेरिका के साथ इस समझौते पर अब और बात नहीं करेगा।

जबकि अमेरिका ने इसके अलावा इराक में मौजूद अपने कई राजनयिक कर्मचारियों की संख्या भी घटा दी है। ऐसे में स्पष्ट संकेत हैं कि मध्य पूर्व पर अब अमेरिका और ईरान के बीच होने वाले संभावित युद्ध के बादल मंडराने लगे हैं। यह तनाव पूरे इलाके के लिए खतरनाक है। चूंकि ईरान तेल निर्यात का एक बड़ा केंद्र है और कई देशों की तेल आपूर्ति ईरान पर निर्भर है इसलिए यहां युद्ध छिडऩे से पूरे विश्व में तेल संकट छा सकता है। यही नहीं यहां से होकर कई देशों का जलमार्ग गुजरता है ऐसे में दुनिया के कई देशों में जरूरी आयात निर्यात भी प्रभावित हो सकता है।

कौन किस तरफ
रूस, जर्मनी, फ्रांस, ब्रिटेन, चीन और यूरोपीय संघ फिलहाल ईरान के पक्ष में भारत है तटस्थ
अमेरिका के साथ हैं इजरायल, कतर, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात यूएई

विवाद से क्या चाहते हैं ट्रंप
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप परमाणु संधि का पुनर्गठन चाहते हैं।
ट्रंप की मंशा ईरान के बैलेस्टिक मिसाइल प्रोग्राम पर नियंत्रण की है।
ट्रंप मध्य पूर्व देशों में चल रहे विवादों से ईरान को दूर रखना चाहते हैं।
अमेरिका के सहयोगी सऊदी अरब व यूएई के तेल व्यापार को बढ़ाना।

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क्या थी परमाणु संधि
2015 में संयक्ुत राष्ट्र के पांच स्थाई सदस्य देशों रूस, चीन, ब्रिटेन, फ्रांस व अमेरिका और जर्मनी ने मिलकर ईरान के साथ ज्वॉइंट कॉम्प्रिहेंसिव प्लान ऑफ एक्शन नाम से परमाणु संधि की थी। इसके तहत ईरान को अपना करीब नौ टन का अल्प संवर्धित यूरेनियम भंडार घटाकर 300 किलोग्राम पर लाना था जिससे वह परमाणु बम नहीं बना सके। इसके बदले ईरान में यूरोपीय कंपनियां तेल शोधन, मेडिसिन और इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में निवेश के लिए आगे बढ़ीं। ईरान को कई हजार रोजगार के अवसर बनने और अपनी जीडीपी 12.3 फीसदी तक बढऩे का लाभ हुआ।

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