Facebook पर लगा 34 हजार करोड़ का जुर्माना, जानें क्या है पूरा मामला

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Facebook पर लगा 34 हजार करोड़ का जुर्माना, जानें क्या है पूरा मामला

नई दिल्ली। अमेरिकी फेडरल ट्रेड कमीशन ने फेसबुक डाटा लीक मामले में 5 अरब डालर यानी तकरीबन 34 हजार करोड़ रुपये जुर्माना लगाने की सिफारिश की है। किसी टेक कंपनी पर यह अब तक की सबसे बड़ी पेनल्टी होगी। इससे पहले 2012 में गूगल पर 154 करोड़ रुपए का जुर्माना लगा था। फेसबुक के जुर्माने पर अंतिम फैसला अमेरिकी न्याय विभाग करेगा।

Us Regulators Fined Facebook Of 5 Billion Dollar For Privacy Violation :

इस साल के शुरूआत में में फेसबुक ने भी ‘उपयोगकर्ता डेटा व्यवहार’ पर कानूनी निबटारे के लिए 3 बिलियन डॉलर से 5 बिलियन डॉलर का भुगतान करने की उम्मीद जताई थी। एफटीसी ने पिछले साल घोषणा की थी कि उसने कैम्ब्रिज एनालिटिका द्वारा करोड़ों यूजर्स का निजी डेटा चुराने का मामला सामने के बाद फेसबुक के साथ 2011 के गोपनीयता समझौते में अपनी जांच को फिर से शुरू कर दिया है। राजनीतिक सलाहकार कंपनी कैम्ब्रिज एनालिटिका ने 2016 में डोनाल्ड ट्रंप के चुनाव अभियान के लिए काम किया था।

जानकारी के मुताबिक ये किसी टेक कंपनी पर अब तक का सबसे बड़ा जुर्माना होगा। हालांकि, पेनल्टी की रकम फेसबुक के 2018 के रेवेन्यू के मुकाबले सिर्फ 9% है। यही वजह है कि इस जुर्माने से Facebook को खास झटका नहीं लगेगा। कंपनी ने 2019 के शुरुआती तीन महीनों में ही 15 बिलियन डॉलर से ज्‍यादा का राजस्‍व कमाया है। जब यह खबर आई तो Facebook के स्‍टॉक प्राइज में 1% का उछाल देखा गया।

क्या था कैम्ब्रिज एनालिटिका डेटा लीक विवाद?

ब्रिटिश कंसल्टेंसी फर्म कैम्ब्रिज एनालिटिका ने फेसबुक के 8.7 करोड़ यूजर्स का डेटा हासिल किया था। फेसबुक को इस बात की जानकारी थी। कैंब्रिज एनालिटिका ने फेसबुक यूजर्स के डेटा का इस्तेमाल 2016 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव को प्रभावित करने के लिए किया था। एफटीसी के अलावा अमेरिकी शेयर बाजार का रेग्युलेटर सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन और डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस भी जांच कर रहे हैं।

नई दिल्ली। अमेरिकी फेडरल ट्रेड कमीशन ने फेसबुक डाटा लीक मामले में 5 अरब डालर यानी तकरीबन 34 हजार करोड़ रुपये जुर्माना लगाने की सिफारिश की है। किसी टेक कंपनी पर यह अब तक की सबसे बड़ी पेनल्टी होगी। इससे पहले 2012 में गूगल पर 154 करोड़ रुपए का जुर्माना लगा था। फेसबुक के जुर्माने पर अंतिम फैसला अमेरिकी न्याय विभाग करेगा। इस साल के शुरूआत में में फेसबुक ने भी 'उपयोगकर्ता डेटा व्यवहार' पर कानूनी निबटारे के लिए 3 बिलियन डॉलर से 5 बिलियन डॉलर का भुगतान करने की उम्मीद जताई थी। एफटीसी ने पिछले साल घोषणा की थी कि उसने कैम्ब्रिज एनालिटिका द्वारा करोड़ों यूजर्स का निजी डेटा चुराने का मामला सामने के बाद फेसबुक के साथ 2011 के गोपनीयता समझौते में अपनी जांच को फिर से शुरू कर दिया है। राजनीतिक सलाहकार कंपनी कैम्ब्रिज एनालिटिका ने 2016 में डोनाल्ड ट्रंप के चुनाव अभियान के लिए काम किया था। जानकारी के मुताबिक ये किसी टेक कंपनी पर अब तक का सबसे बड़ा जुर्माना होगा। हालांकि, पेनल्टी की रकम फेसबुक के 2018 के रेवेन्यू के मुकाबले सिर्फ 9% है। यही वजह है कि इस जुर्माने से Facebook को खास झटका नहीं लगेगा। कंपनी ने 2019 के शुरुआती तीन महीनों में ही 15 बिलियन डॉलर से ज्‍यादा का राजस्‍व कमाया है। जब यह खबर आई तो Facebook के स्‍टॉक प्राइज में 1% का उछाल देखा गया। क्या था कैम्ब्रिज एनालिटिका डेटा लीक विवाद? ब्रिटिश कंसल्टेंसी फर्म कैम्ब्रिज एनालिटिका ने फेसबुक के 8.7 करोड़ यूजर्स का डेटा हासिल किया था। फेसबुक को इस बात की जानकारी थी। कैंब्रिज एनालिटिका ने फेसबुक यूजर्स के डेटा का इस्तेमाल 2016 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव को प्रभावित करने के लिए किया था। एफटीसी के अलावा अमेरिकी शेयर बाजार का रेग्युलेटर सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन और डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस भी जांच कर रहे हैं।