आज है उत्पन्ना एकादशी, जान लें व्रत के नियम

आज है उत्पन्ना एकादशी, जान लें व्रत के नियम
आज है उत्पन्ना एकादशी, जान लें व्रत के नियम

नई दिल्ली। हिन्दू धर्म में तमाम व्रतों की मान्यता है लेकिन इन सभी में सबसे महत्वपूर्ण व्रत है एकादशी। एकादशी का नियमित व्रत रखने से मन कि चंचलता दूर होती है, धन और आरोग्य की प्राप्ति होती है। इस बार 22 नवंबर यानी आज उत्पन्ना एकादशी मनाई जा रही है। कहा जाता है कि इसी एकादशी से साल भर के एकादशी व्रत की शुरुआत की जाती है। इस व्रत को करने से आरोग्य, संतान प्राप्ति और मोक्ष मिलता है।

Utpanna Ekadashi 2019 Vrat Date And Importance :

इस उत्पन्ना एकादशी पर बन रहा खास संयोग

उत्पन्ना एकादशी में भगवान विष्णु के लिए व्रत रखा जाता है और उनकी विशेष पूजा की जाती है। शुक्रवार के दिन मां लक्ष्मी को पूजा की जाती जाती है। इस बार उत्पन्ना एकादशी शुक्रवार के दिन पड़ने से इस एकादशी का महत्व और बढ़ जाता है। जाने व्रत के नियम और उससे जुड़ी कुछ खास बाते….

व्रत रखने के नियम?

  • यह व्रत दो प्रकार से रक्खा जाता है- निर्जल व्रत और फलाहारी या जलीय व्रत।
  • सामान्यतः निर्जल व्रत पूर्ण रूप से स्वस्थ्य व्यक्ति को ही रखना चाहिए।
  • अन्य या सामान्य लोगों को फलाहारी या जलीय उपवास रखना चाहिए।
  • इस व्रत में दशमी को रात्री में भोजन नहीं करना चाहिए।
  • एकादशी को प्रातः काल श्री कृष्ण की पूजा की जाती है।
  • इस व्रत में केवल फलों का ही भोग लगाया जाता है।
  • बेहतर होगा कि इस दिन केवल जल और फल का ही सेवन किया जाए।

इस दिन न करें ये काम

  • तामसिक आहार व्यहार तथा विचार से दूर रहें।
  • बिना भगवान विष्णु को अर्घ्य दिए हुए दिन की शुरुआत न करें।
  • अर्घ्य केवल हल्दी मिले हुए जल से ही दें, रोली या दूध का प्रयोग न करें।
  • अगर स्वास्थ्य ठीक नहीं है तो उपवास न रखें, केवल प्रक्रियाओं का पालन करें।

 

नई दिल्ली। हिन्दू धर्म में तमाम व्रतों की मान्यता है लेकिन इन सभी में सबसे महत्वपूर्ण व्रत है एकादशी। एकादशी का नियमित व्रत रखने से मन कि चंचलता दूर होती है, धन और आरोग्य की प्राप्ति होती है। इस बार 22 नवंबर यानी आज उत्पन्ना एकादशी मनाई जा रही है। कहा जाता है कि इसी एकादशी से साल भर के एकादशी व्रत की शुरुआत की जाती है। इस व्रत को करने से आरोग्य, संतान प्राप्ति और मोक्ष मिलता है। इस उत्पन्ना एकादशी पर बन रहा खास संयोग उत्पन्ना एकादशी में भगवान विष्णु के लिए व्रत रखा जाता है और उनकी विशेष पूजा की जाती है। शुक्रवार के दिन मां लक्ष्मी को पूजा की जाती जाती है। इस बार उत्पन्ना एकादशी शुक्रवार के दिन पड़ने से इस एकादशी का महत्व और बढ़ जाता है। जाने व्रत के नियम और उससे जुड़ी कुछ खास बाते.... व्रत रखने के नियम?
  • यह व्रत दो प्रकार से रक्खा जाता है- निर्जल व्रत और फलाहारी या जलीय व्रत।
  • सामान्यतः निर्जल व्रत पूर्ण रूप से स्वस्थ्य व्यक्ति को ही रखना चाहिए।
  • अन्य या सामान्य लोगों को फलाहारी या जलीय उपवास रखना चाहिए।
  • इस व्रत में दशमी को रात्री में भोजन नहीं करना चाहिए।
  • एकादशी को प्रातः काल श्री कृष्ण की पूजा की जाती है।
  • इस व्रत में केवल फलों का ही भोग लगाया जाता है।
  • बेहतर होगा कि इस दिन केवल जल और फल का ही सेवन किया जाए।
इस दिन न करें ये काम
  • तामसिक आहार व्यहार तथा विचार से दूर रहें।
  • बिना भगवान विष्णु को अर्घ्य दिए हुए दिन की शुरुआत न करें।
  • अर्घ्य केवल हल्दी मिले हुए जल से ही दें, रोली या दूध का प्रयोग न करें।
  • अगर स्वास्थ्य ठीक नहीं है तो उपवास न रखें, केवल प्रक्रियाओं का पालन करें।