यूपी का आबकारी विभाग फिर फेल, नई दुकान खुली नहीं और पुरानी पर शराब खत्म

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यूपी का आबकारी विभाग फिर फेल, नई दुकान खुली नहीं और पुरानी पर शराब खत्म
लखनऊ। उत्तर प्रदेश का आबकारी विभाग अपनी ही चाल से चल रहा है। पुराने शराब कारोबारियों ने लाइसेंस खत्म होने की वजह से शराब का स्टॉक खत्म कर दिया है, तो नई दुकानों पर सप्लाई की प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाई है। जानकारों की माने तो सरकार की ओर से शराब की दुकानों पर शराब की सप्लाई के लिए जिन कारोबारियों को लाइसेंस मिला है, उनकी प्रक्रिया अभी तक पूरी नहीं हो पाई है। ऐसे में विभाग पुराने दुकानदारों को…

लखनऊ। उत्तर प्रदेश का आबकारी विभाग अपनी ही चाल से चल रहा है। पुराने शराब कारोबारियों ने लाइसेंस खत्म होने की वजह से शराब का स्टॉक खत्म कर दिया है, तो नई दुकानों पर सप्लाई की प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाई है। जानकारों की माने तो सरकार की ओर से शराब की दुकानों पर शराब की सप्लाई के लिए जिन कारोबारियों को लाइसेंस मिला है, उनकी प्रक्रिया अभी तक पूरी नहीं हो पाई है। ऐसे में विभाग पुराने दुकानदारों को दैनिक बिक्री का लाइसेंस देने की योजना बना रहा है। बताया तो यहां तक जा रहा है कि आने वाले 20 दिनों तक पुरानी दुकानों से ही शराब की बिक्री सुनिश्चित की जाएगी।

पिछले एक सप्ताह से उत्तर प्रदेश में शराब के शौकीनों को अलग अलग दुकानों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। जिसका मुख्य कारण दुकानों पर शराब का उपलब्ध न होना है। आम तौर पर यह समस्या प्रति वर्ष मार्च के महीने में दो से चार दिनों के लिए देखने को मिलती है, लेकिन मार्च 2018 में यह समस्या 15 दिन पहले ही शुरू हो गई, जिसे ख़त्म होने में कम से कम 15 दिन और लगने वाले हैं।

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जिसकी मुख्य वजह प्रदेश में नई आबकारी नीति का लागू होना और नए सिरे से फुटकर दुकानों और थोक सप्लायर्स के लाइसेंस की लाटरी करवाना रहा। देखा जाए तो सरकार ने नई दुकानों की लाटरी की प्रक्रिया फरवरी में शुरू कर दी थी, लेकिन आबकारी विभाग का साफ्टवेयर धोखा दे गया और लाटरी फाइनल होते-होते 19 मार्च बीत गई।

अब लाटरी पूरी होने के बाद फुटकर दुकानदारों ने तो अपनी दुकानें सजाने की तैयारी कर ली, लेकिन वे शराब कौन सी बेंचेंगे और किस कारोबारी से खरीदकर बेंचे इस विषय उनकी चिंता का कारण बना हुआ है।

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विभागीय सूत्रों की माने तो शराब बनाने वाली कंपनियों को अभी तक थोक सप्लायर्स की लिस्ट नहीं मिली है। लिस्ट न पहुंचने का कारण भी आबकारी विभाग की कार्यशैली में ही छुपा है। दरअसल आबकारी विभाग की ओर से हो रही देरी की वजह से लाइसेंस पाने वाले कारोबारी अब तक गोदामों की जुगाड़ नहीं बैठा पाए हैं। जिनके पास गोदाम है भी उनकी गोदाम का नक्शा और निरीक्षण आबकारी विभाग ने अब तक नहीं किया है। जब तक थोक कारोबारियों के गोदाम का नक्शा पास नहीं होगा और निरीक्षण में विभागीय अधिकारी गोदाम को पास नहीं करते तब तक उनका नाम शराब निर्माता कंपनियों को नहीं भेजा जाएगा।

जिस चाल से आबकारी विभाग चल रहा है उसे देखते हुए कहा जा सकता है कि उत्तर प्रदेश की नई दुकानों पर शराब की सप्लाई शुरू होने में कम से कम 15 से 20 दिनों का समय लगेगा। तब तक यूपी में शराब के शौकीनों की प्यास बुझाने के लिए  आबकारी विभाग पुराने कारोबारियों को प्रतिदिन नया बिक्री लाइसेंस प्रदान करेगा।

शराब बिक्री की चरणबद्ध प्रक्रिया समझिए —

— आबकारी विभाग ने ई लॉटरी सिस्टम से थोक और फुटकर शराब कारोबारियों को लाइसेंस आवंटित किए।
— लाटरी के हिसाब से 1 अप्रैल 2018 से शराब की बिक्री का अधिकार फुटकर बिक्री का लाइसेंस पाने वाले कारोबारियों के पास होना चाहिए। जिसके लिए उनसे फीस बसूली गई।
— फुटकर दुकानदारों को शराब की सप्लाई थोक सप्लाई का लाइसेंस पाने वाले कारोबारी करेंगे। प्रत्येक जिले में एक से लेकर 8 थोक लाइसेंस उठे हैं।
— सप्लायर्स को आबकारी विभाग की नीति के मुताबिक अपनी गोदाम का नक्शा विभाग में जमा करवाना होता है। जिसका निरीक्षण जिला आबाकारी अधिकारी करता है और नक्शा पास होने के बाद गोदाम पर आबकारी विभाग एक अधिकारी ​की नियुक्ति गोदाम की निगरानी के लिए करता है।
— गोदाम का नक्शा पास होने और आबकारी अधिकारी की नियुक्ति होने के बाद थोक कारोबारी का नाम आबकारी विभाग की ओर से शराब निर्माता कंपनी को दिया जाता ​है। जिसके बाद शराब निर्माता कंपनी थोक कारोबारी की मांग के हिसाब से माल भेजता है। जिसे शराब की गोदाम तक पहुंचने में आबकारी विभाग के मानक के अनुसार दस दिनों का समय लगता है।
— गोदाम में शराब की एंट्री वहां तैनात आबकारी विभाग के अधिकारी की निगरानी में होती है। जबकि फुटकर बिक्री करने वाली दुकानों पर सप्लाई के लिए गोदाम से शराब की निकासी के लिए ऐसी ही प्रक्रिया अपनाई जाती है।
— थोक कारोबारी की गोदाम को प्रतिदिन आबकारी विभाग की ओर से तैनात अधिकारी की निगरानी में खोला जाता है और शाम को उसी अधिकारी के हाथों से सील किया जाता है।

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