नोटबंदी के बाद हाल-ए-यूपी, पुराने नोटों में सैलरी लो या नौकरी छोड़ो

लखनऊ। नोटबंदी लागू करने के पीछे केन्द्र सरकार की मंशा कालेधन पर शिकंजा कसने की थी, लेकिन यह दांव देश के आम और गरीब आदमी पर उलटा बैठता नजर आ रहा है। 24 दिनों से लाइन में खड़े देश के आम आदमी को रोज नई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। जिसका एक नया रूप यूपी की राजधानी लखनऊ में सामने आया है। लखनऊ के जाने माने लोहिया अस्पताल में नौकरी कर रहे संविदा कर्मचारियों को वेंडर कंपनी ने अपने अनुबंधित कर्मियों को नवंबर और दिसंबर का वेतन एडवांस में 500 और 1000 रुपए के नोटों में थमा दिया है। इतना ही नहीं कंपनी ने पुराने नोट लेने से इंकार करने वाले कर्मचारियों को नौकरी से निकाले जाने की धमकी दी है।




मिली जानकारी के मुताबिक लखनऊ के लोहिया अस्पताल में ठेके पर कर्मचारी उपलब्ध करवाने वाली अपना टेक कंसल्टेन्सी के लिए 300 कर्मचारी नौकरी कर रहे हैं। कुछ कर्मचारियों का कहना है कि कंपनी ने नोटबंदी के बाद से 500 और 1000 रुपए के नोटों में नवंबर और दिसंबर का वेतन एडवांस देना शुरू कर दिया था। अब तक कंपनी अपने 80 फीसदी कर्मचारियों को वेतन और एडवांस दे चुकी है, जबकि 20 फीसदी कर्मचारियों का वेतन पुराने नोट न लेने की वजह से लटका हुआ है। पुराने नोट लेने से मना करने वालों को कंपनी ने नौकरी से निकालने की धमकी दी है।

कंपनी के एक कर्मी का कहना है कि कंपनी करीब 34 लाख रुपए प्रति माह वेतन में बांटती है। नियमानुसार वेतन कर्मियों के खाते में जाना चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं होता है। कंपनी एडवांस का हवाला देकर अधिकांश कर्मियों का वेतन नगद में ही देती है। कंपनी अपने कर्मचारियों को पुराने नोटों में वेतन बांटकर लाखों के काले धन को सफेद करने में लगी है। कंपनी अब तक करीब 50 लाख रुपए वेतन के रूप में बांट चुकी है।

पूरा प्रकरण मीडिया के सामने आने के बाद लोहिया अस्पताल के प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ0 ओमकार यादव ने कहा है कि अभी तक कर्मचारियों ने उनसे इस प्रकार की कोई शिकायत नहीं की है। पहले से ही संविदा कर्मियेां का वेतन उनके खातों में दिए जाने का निर्देश है। अगर ऐसा हो रहा है तो वे निश्चित ही इसकी जांच करवाएंगे।

अगर इस मामले को नजीर माना जाए, तो केवल यूपी में ही विभिन्न विभागों में लाखों को संविदाकर्मियों के साथ भी ऐसा किये जाने की संभावना प्रबल हो जाती है। इस तरह से करोड़ों का कालाधन आसानी से सफेद किया जा सकता है। ऐसे मामलों को आयकर विभाग को अपने संज्ञान में लेना होगा ताकि यह स्पष्ट हो सके कि गरीब और मेहनत कश लोगों को आगे कर कोई भ्रष्टाचारी अपनी काली कमाई को सफेद न कर सके।