5000 रूपए में बनाते थे फर्जी आधार कार्ड, 10 गिरफ्तार

कानपुर। उत्तर प्रदेश पुलिस की स्पेशल टॉस्क फोर्स ने बड़ी कार्रवाई को अंजाम देते हुए फर्जी आधार कार्ड बनाने वाले गिरोह का भांडा फोड़ किया है। फर्जी ​जानकारी और गलत बायोमै​ट्रिक डिटेल अपलोड कर आधार कार्ड जारी करने वाले इस गिरोह का सरगना सौरभ सिंह कानपुर में प्राइवेट इनरोलमेंट एजेंसी चलाता था, जिसे यूआईडीएआई अनुबंधित निजी कंपनी द्वारा आधार बनाने वाली एजेंसी के रूप में मान्यता मिली थी।

यूपी पुलिस की ओर से जारी बयान में बताया गया है कि कानपुर निवासी सौरभ सिंह फर्जी आधार कार्ड बनाने का काम करता था। इस काम में उसके साथ 9 अन्य लोग भी संलिप्त थे। जिन्हें एसटीएफ की टीम ने गिरफ्तार किया है। ये सभी 5000 रुपए लेकर यूआईडीएआई के मेन सर्वर पर फर्जी डिटेल और फर्जी बायोमैट्रिक फीडिंग कर आधार बनाने का काम करते थे।

{ यह भी पढ़ें:- अब 'आधार' में प्रमाण के तौर पर इस्तेमाल होगा आपका 'चेहरा' }

एसटीएफ के आईजी अमिताभ यश के मुताबिक हाल ही में यूआईडीएआई द्वारा करीब 80 लाख फर्जी आधार कार्ड निरस्त किए गए थे। संदेह के आधार पर यूआईडीएआई की ओर से कानपुर, फतेहपुर, मैनपुरी, हरदोई, आजमगढ़, देवरिया और कुशीनगर की कुछ एजेंसियों के खिलाफ कार्रवाई कर 12 जून 2017 से उनकी मान्यता को निरस्त कर दिया गया था। यूआईडीएआई के डिप्टी डायरेक्टर की ओर से आधार में हो रहे फर्जीवाडे की शिकायत यूपी पुलिस को मिली थी।

एसटीएफ के मुताबिक कानपुर में फर्जी आधार कार्ड का गैंग चलाने वाले सौरभ सिंह ने खुलासा किया है कि उसके गैंग ने एक आईटी एक्सपर्ट की मदद से यूआईडीएआई की कोडिंग को हैक कर एक ही बायोमैट्रिक डेटा को लोडकर हजारों आधार कार्ड बनाए गए थे। उसके गिरोह में कई और एजेंसियां भी काम कर रहीं थी। इस पूरे गिरोह का मुख्य सरगना यूआईडीएआई की मुख्य वेंडर कंपनी का एक अधिकारी है। जो भूमिगत बताया जा रहा है।

{ यह भी पढ़ें:- बिना पैनकार्ड के नहीं होंगे ये जरूरी काम, 24 घंटे में ऐसे बनवाएँ ऑनलाइन }

यूपी पुलिस का कहना है कि गिरफ्तार किए गए लोगों के खिलाफ आईपीसी की धारा 419, 420, 467, 468, 471, 473, 474 और आईटी एक्ट के तहत मामला दर्ज​ किया गया है। इस गिरोह के मुख्य सरगना व उसके सहयोगियों की तलाश में एसटीएफ की टीमें छापेमारी कर रहीं हैं।

Loading...