न्यायिक व पुलिस हिरासत में मौतों के मामले में यूपी नंबर वन: मानवाधिकार आयोग

नई दिल्ली। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने शुक्रवार को अपने स्थापना दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में कहा कि देश भर से आयोग को गत् वर्ष में 1,05,664 शिकायतें मिली हैं। जिससे लगता है कि देश की जनता का इस संस्था में विश्वास बढ़ा है। इसके साथ ही मानवाधिकार के उल्लंघन के मामलों को लेकर राज्यवार प्रस्तुत की रिपोर्ट के हवाले से बताया गया कि यूपी में न्यायिकत हिरासत और पुलिस हिरासत के दौरान सबसे ज्यादा मौतें होने के मामले सामने आए हैं। जिसके बाद न्यायिकत हिरासत में मौतों के मामले में पंजाब दूसरे और पुलिस हिरासत में मौतों के मामले मे महाराष्ट्र दूसरे स्थान पर है।




आयोग द्वारा बताएं गए आकड़ों के मुताबिक यूपी में सर्वाधिक 401 मौतें न्यायिक हिरासत के दौरान हुईं हैं जबिक 27 मौतें पुलिस हिरासत में हुई हैं। पंजाब न्यायिक हिरासत में 170 मौतें होने के आंकड़े के साथ दूसरे स्थान पर है जबकि महाराष्ट्र पुलिस हिरासत में सामने आए मौत के 23 मामलों के साथ दूसरे स्थान पर है।




इसके साथ ही आयोग ने एनकाउंटर के मामलों के आंकड़े पेश करते हुए बताया कि छत्तीसगढ़ में सर्वाधिक 66, असम में 43 और झारखंड में 15 एनकाउंटर के मामले सामने आए हैं।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष जस्टिस एचएल दत्तू ने संस्थापना दिवस पर कहा कि गत् वर्ष में मिली 1,05,664 शिकायतें इस बात का प्रमाण हैं कि देश की जनता का मानवाधिकारों को लेकर काम कर रही इस संस्था में विश्वास बढ़ा है। आयोग के काम करने का तरीका जनता का विश्वास जीतने में कामयाब रहा है। लोगों में मानवाधिकारों के प्रति जागरूकता आई है। यूपी, ओडिशा, हरियाणा, दिल्ली और बिहार वे पांच राज्य हैं जहां से सर्वाधिक शिकायतें मिली हैं।




आपको बता दें कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का स्थापना दिवस प्रतिवर्ष 12 अक्टूबर को मनाया जाता है, लेकिन आयोग के कुछ सदस्यों की गैरमौजूदगी के चलते आयोजन को 21 अक्टूबा तक टाल दिया गया था।

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