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Uttarakhand News : उत्तराखंड का ये शहर विलुप्त होने की कगार पर, धंस रहे घर क्या ये किसी बड़े संकट का है इशारा

उत्तराखंड (Uttarakhand) में चामोली जिले (Chamoli District)में मकानों में दरारें आने और इमारतें धंसने से दहशत है। प्रशासन ने सभी निवासियों को अपने घरों को एहतियाती के तौर पर खाली करने की सलाह दी है। बदरीनाथ के प्रवेश द्वार (Entrance of Badrinath) कहे जाने वाले जोशीमठ टाउन (Joshimath Town) में 581 घरों ने लगातार भूस्खलन के कारण दरारें आ गई हैं, जिससे लोगों के बीच घबराहट और चिंता है।

By संतोष सिंह 
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चामोली । उत्तराखंड (Uttarakhand) में चामोली जिले (Chamoli District)में मकानों में दरारें आने और इमारतें धंसने से दहशत है। प्रशासन ने सभी निवासियों को अपने घरों को एहतियाती के तौर पर खाली करने की सलाह दी है। बदरीनाथ के प्रवेश द्वार (Entrance of Badrinath) कहे जाने वाले जोशीमठ टाउन (Joshimath Town) में 581 घरों ने लगातार भूस्खलन के कारण दरारें आ गई हैं, जिससे लोगों के बीच घबराहट और चिंता है। प्रशासन ने सुरक्षा कारणों से पांच परिवारों को नगरपालिका गेस्ट हाउस (Municipal Guest House) में स्थानांतरित कर दिया है। 22 से अधिक अन्य परिवारों ने अपने घर छोड़ दिए हैं और कहीं और चले गए हैं। आधिकारिक तौर पर, 121 घरों में गंभीर दरारें पैदा हो गई हैं।

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चमोली के जिला मजिस्ट्रेट हिमांशु खुराना (Chamoli District Magistrate Himanshu Khurana) ने बताया कि लोगों का मार्गदर्शन किया जा रहा है। धर्मशाला या होटल में रहने के लिए उन लोगों के लिए व्यवस्था कर रहे हैं, जो अपने घरों को खाली कर रहे हैं। उन परिवारों को चेतावनी जारी की गई है जो दरार के बावजूद अपने घरों में रहना जारी रखे हैं। डीएम ने कहा कि प्रशासन पूरी तरह से तैयार है, आपदा प्रबंधन प्रणाली (Disaster Management System)को अलर्ट मोड  (Alert Mode) में डाल दिया गया है। आईआईटी रुड़की से अनुरोध किया गया है। सिर्फ वे एक दीर्घकालिक समाधान का सुझाव दे सकते हैं।

पूरा जोशीमठ शहर निरंतर डूबने की चपेट में

जिला मुख्यालय में प्राप्त जानकारी के अनुसार, पूरा जोशीमठ शहर (Joshimath Town) निरंतर डूबने की चपेट में है। घरों में दरारें चौड़ी हो रही हैं, जमीन खुली हुई है, जिससे पानी बाहर निकलता है। जिन परिवारों को नगर पालिका गेस्ट हाउस में स्थानांतरित कर दिया गया है, वे पुलिस स्टेशन के पास रह रहे हैं। गाय के शेड के क्षतिग्रस्त होने के बाद मवेशियों को अन्य स्थानों पर ले जाया गया है। लोगों का कहना है कि यहां बनने वाली तपोवन विष्णुगढ़ जल विद्युत परियोजना (Tapovan Vishnugarh Hydro Electric Project) की टनल यानी सुरंग के कारण जोशीमठ (Joshimath ) में जमीन धंस रही है।

ज्योतिर्मठ परिसर में भी आईं दरारें
भू-धंसाव की चपेट में ज्योतिर्मठ परिसर भी आ गया है। परिसर के भवनों, लक्ष्मी नारायण मंदिर के आसपास बड़ी-बड़ी दरारें पड़ गई हैं। ज्योतिर्मठ के प्रभारी ब्रह्मचारी मुकुंदानंद ने बताया कि मठ के प्रवेश द्वार, लक्ष्मी नारायण मंदिर और सभागार में दरारें आई हैं। इसी परिसर में टोटकाचार्य गुफा, त्रिपुर सुंदरी राजराजेश्वरी मंदिर और ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य की गद्दी स्थल है।

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औली रोपवे का संचालन बंद

औली रोपवे का संचालन अग्रिम आदेशों तक बंद कर दिया गया है। रोपवे प्रबंधक दिनेश भट्ट ने बताया कि प्रशासन की ओर से यह आदेश मिले हैं, जबकि जीएमवीएन निदेशालय की ओर से अभी तक रोपवे संचालन रोकने के आदेश नही आए हैं। बता दें कि जोशीमठ में रोपवे टावर के इर्दगिर्द की जमीन में भी दरारें पड़ी हैं। पर्यटकों की सुरक्षा को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है।

पोस्ट ऑफिस भी किया शिफ्ट
जेपी कंपनी के परिसर में संचालित होने वाले पोस्ट ऑफिस को जोशीमठ के मुख्य डाकघर में शिफ्ट कर दिया गया है। बुधवार को कार्यालय का सारा सामान हटा दिया गया है। पोस्ट ऑफिस के अधिकारी एन लोहानी ने बताया कि पानी के रिसाव होने से परिसर में संचालित पोस्ट ऑफिस खतरे की जद में आ गया था। जिसके चलते इसे जोशीमठ के डाकघर में हस्तांतरित कर दिया गया है।

‘बड़ी परियोजनाओं पर लगाएं रोक’
ज्योतिर्मठ के मीडिया प्रभारी डा. बृजेश सती (Jyotirmath’s media in-charge Dr. Brijesh Sati) ने बताया कि ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती (Shankaracharya of Jyotishpeeth Swami Avimukteshwaranand Saraswati) ने भू-धंसाव पर चिंता जताई है। शंकराचार्य ने कहा है कि सरकार को इस विषय पर गंभीरता से काम करना चाहिए। शंकराचार्य की ओर से सरकार से नगर के आसपास जितनी भी जल विद्युत परियोजनाएं और बड़े प्रोजेक्ट बन रहे हैं उन पर जनहित को देखते हुए रोक लगाने की मांग की गई है। तकनीकी विशेषज्ञों की टीम से पूरे क्षेत्र का निरीक्षण करने की जरूरत है। ज्योतिर्मठ के प्रभारी ब्रह्मचारी मुकुंदानंद (Brahmachari Mukundanand in charge of Jyotirmath) ने बताया कि जल्द ही मठ की ओर से आपदा सेवालय कक्ष स्थापित किया जाएगा।

प्रशासन ने कंट्रोल रूम किया स्थापित
जोशीमठ नगर में भू-धंसाव (Landslide in Joshimath Nagar) की समस्या को लेकर जिला प्रशासन ने जोशीमठ तहसील (Joshimath Tehsil) में प्रभावित लोगों को त्वरित राहत एवं किसी भी प्रकार की समस्या के समाधान के लिए कंट्रोल रुम स्थापित किया है। जिसका दूरभाष नंबर 8171748602 है। किसी भी सहायता के लिए प्रभावित परिवार इस हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क कर सकते हैं।

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होटल माउंट व्यू को कराया खाली
सिंहधार वार्ड में होटल माउंट व्यू (Hotel Mount View in Singhdhar Ward) जमीन धंसने से तिरछा हो गया है। सोमवार रात को होटल की दीवारें चटने की आवाज आने से इसके पीछे रहने वाले परिवार दहशत में आ गए थे। प्रशासन ने बुधवार को होटल को खाली करवा दिया है। होटल के मालिक सुंदर लाल सेमवाल (Hotel owner Sundar Lal Semwal) ने बताया कि सारा सामान हटाकर होटल को पूरी तरह से खाली कर दिया गया है।

बड़ी आपदा की आशंका

उत्तराखंड के जाने-माने सामाजिक कार्यकर्ता अनूप नौटियाल (Social activist Anoop Nautiyal) ने कहा कि जोशीमठ(Joshimath ) में जिस तरह के हालात पैदा हो रहे हैं, उस पर जल्दी ही अगर संज्ञान नहीं लिया गया, तो एक बड़ी आपदा हो सकती है। उन्होंने कहा कि जोशीमठ (Joshimath )में पिछले कुछ दिनों बहुत तेजी से नुकसान में इजाफा हुआ है। इस पर त्वरित करवाई करने की जरूरत है। स्थानीय लोग भी लगातार अपनी आवाज उठा रहे हैं।

उन्होंने बताया कि यह इलाका समुद्र तल से करीब छह हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित है और सिस्मिक जोन 5 (Seismic Zone 5)में आता है। यानी प्राकृतिक आपदाओं (Natural Disasters)के लिहाज से काफी संवेदनशील है। यहां पिछले कुछ दिनों में भूधंसाव में काफी तेजी आई है। उत्तराखंड स्टेट डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (Uttarakhand State Disaster Management Authority) ने कहा था कि घरों में आ रही दरारें शहर की कमजोर बुनियाद के कारण आ रही हैं। इसके अलावा तमाम कारण उन्होंने अपनी रिपोर्ट में इंगित किए थे। इसमें कंस्ट्रक्शन, शहर की कैपेसिटी और नदी के कारण होने वाला कटाव शामिल है।

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