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उत्तरकाशी भूकंप के झटकों से हिली, घरों में आई दरारें, जानें कितनी थी तीव्रता

उत्तराखंड (Uttarakhand) के उत्तरकाशी (Uttarkashi) में रविवार को भूकंप के झटके महसूस किए गए। सुबह 10.42 बजे भूकंप के झटके महसूस किए गए जिसके बाद दहशत में लोग अपने घरों से बाहर निकल आए। भूकंप (Earthquake) की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 2.5 आंकी गई। मिल रही जानकारी के मुताबिक जसपुर गांव (Jaspur Village) के कई घरों में दरारें भी देखी गई है। फिलहाल अभी तक किसी भी तरह के नुकसान की बात सामने नहीं आई है।

By संतोष सिंह 
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उत्तरकाशी। उत्तराखंड (Uttarakhand) के उत्तरकाशी (Uttarkashi) में रविवार को भूकंप के झटके महसूस किए गए। सुबह 10.42 बजे भूकंप के झटके महसूस किए गए जिसके बाद दहशत में लोग अपने घरों से बाहर निकल आए। भूकंप (Earthquake) की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 2.5 आंकी गई। मिल रही जानकारी के मुताबिक जसपुर गांव (Jaspur Village) के कई घरों में दरारें भी देखी गई है। फिलहाल अभी तक किसी भी तरह के नुकसान की बात सामने नहीं आई है।

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इससे पहले अप्रैल और जुलाई में भी उत्तरकाशी (Uttarkashi) में भूकंप (Earthquake)  के झटके महसूस किए गए थे। बता दें कि उत्तराखंड (Uttarakhand)  का उत्तरकाशी जिला (Uttarkashi District) भूकंप के लिहाज से बेहद संवेदनशील है । भूगर्भीय दृष्टि से संवेदनशील उत्‍तरकाशी भूकंप (Earthquake)  के जोन 4 व 5 में स्थित है । 20 अक्टूबर 1991 को यहां आए भूकंप में आठ सौ से अधिक लोग मारे गए थे । सैकड़ों परिवार बेघर हो गए थे । इसके बाद 1999 के भूकंप (Earthquake)  ने भी उत्तरकाशी (Uttarkashi) को डराया था।

हालांकि भविष्य में ग्लेशियर (Glacier)के बड़े हिस्से के टूटने के खतरे को लेकर सतर्कता बरती जा रही है। केदारनाथ में वर्षों से रहने वाले लोग भी इस तरह की घटना को सामान्य बता रहे हैं। उधर, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी एनएस रजवार (District Disaster Management Officer NS Rajwar) ने बताया कि घटना को लेकर भूगर्भीय टीम (Geological Team)  के दो-तीन दिन में केदारनाथ आने की उम्मीद है, जो इस क्षेत्र का निरीक्षण करेगी।

डीएम रुद्रप्रयाग मयूर दीक्षित (DM Rudraprayag Mayur Dixit) ने बताया कि पहली घटना के बाद ही सचिव आपदा प्रबंधन (Secretary Disaster Management) को पत्र लिखकर भूगर्भीय टीम (Geological Team) से क्षेत्र का अध्ययन कराने का आग्रह किया गया है। तीनों घटनाओं से मंदाकिनी का जलस्तर नहीं बढ़ा, न ही किसी तरह का कोई नुकसान हुआ है। सुरक्षा की दृष्टि से एसडीआरएफ (SDRF), डीडीआरएफ (DDRF) और केदारनाथ में मौजूद प्रशासनिक टीम को अलर्ट रहते हुए निगरानी के निर्देश दिए हैं।

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