गुजरात के साथ-साथ मानसून पर भी मंडरा रहा ‘वायु’ चक्रवात का खतरा

Cyclonic Storm Vaayu
गुजरात के साथ-साथ मानसून पर भी मंडरा रहा 'वायु' चक्रवात का खतरा

नई दिल्ली। अरब सागर में कम दबाव का क्षेत्र बनने के कारण चक्रवाती तूफान ‘वायु’ तेजी से भारत की ओर बढ़ रहा है। भीषण गर्मी झेल रहे उत्तर भारत में मानसून के देर से पहुंचने की भविष्यवाणी पहले ही की जा चुकी है। धीरे-धीरे आगे बढ़ रहे मानसून से लग रहा था कि मैदानी इलाकों में कुछ दिनों बाद राहत मिलेगी। लेकिन चक्रवाती तूफान ‘वायु’ के चलते अब अनुमान ये भी लगाया जा रहा है कि कहीं यह मानसूनी बादल को न उड़ा ले जाए। अगर ऐसा हुआ तो उत्तर भारत में भीषण गर्मी का प्रकोप देखने को मिल सकता है। क्योंकि पूरे मैदानी इलाकों में किसान खेती के लिए मानसून की बारिश पर ही निर्भर होते हैं।

Vaayu Cyclone May Also Effect Monsoon :

वैसे तो मानसून पहले से ही देरी से चल रहा है, लेकिन इस तूफान की प्रतिक्रिया देखते हुए लगता है इसकी रफ्तार 140 से 165 किमी प्रति घंटा हो सकती है। वहीं इसकी चपेट में आने वाले किसानों को बहुत नुकसान उठाना पड़ेगा। अगर मानसूनी बादल नहीं ठहरे तो बादल भी नहीं बरसेंगे। बादल नहीं बरसे तो उत्तर भारत में सूखे की स्थिति पैदा हो जाएगी।

गुजरात में हाई अलर्ट जारी

हालांकि, भारतीय मौसम विज्ञान विभाग मुताबिक, अब ये तूफान गुजरात की ओर तेजी से बढ़ रहा है। इस कारण गुजरात के तटीय क्षेत्रों में चक्रवात का खतरा मंडरा रहा है। इतना ही नहीं ये चक्रवाती तूफान 12-13 जून को सौराष्ट्र तट पर दस्तक दे सकता है।

इन इलाकों पर पड़ेगा असर

वायु तूफान के कारण अहमदाबाद, गांधीनगर और राजकोट समेत तटवर्ती इलाके वेरावल, भुज और सूरत में हल्की बारिश हो सकती है। चक्रवात के कारण सौराष्ट्र के भावनगर, अमरेली, सोमनाथ, वेरावल, जामनगर, पोरबंदर और कच्छ समेत कई इलाकों में तेज हवाओं के साथ भारी बारिश की संभावना है।

वहीं, एक सप्ताह की देरी से आए दक्षिणी-पश्चिमी मानसून को लेकर भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के वैज्ञानिकों का कहना है कि मानसून दक्षिणी अरब सागर, लक्षद्वीप के अधिकांश हिस्सों और केरल और दक्षिण तमिलनाडु के कुछ हिस्सों में आगे बढ़ा है। उन्होंने यह भी बताया कि मंगलवार तक पूर्वोत्तर राज्यों के कुछ हिस्सों में मानसून के आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल हो रही थीं।

बता दें, केरल में मानसून के 1 जून से आने के आसार थे, लेकिन इसने एक सप्ताह की देरी के साथ शनिवार को केरल तट पर दस्तक दी। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग द्वारा रविवार को जारी बयान के अनुसार, मंगलवार तक दक्षिणी अरब सागर, लक्षद्वीप और केरल, तमिलनाडु के कुछ हिस्सों, बंगाल की खाड़ी के दक्षिण-पश्चिम, दक्षिण-पूर्व, पूर्व-मध्य और उत्तर-पूर्व व पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी और मध्य अरब सागर के कुछ हिस्सों में दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल हैं।

नई दिल्ली। अरब सागर में कम दबाव का क्षेत्र बनने के कारण चक्रवाती तूफान 'वायु' तेजी से भारत की ओर बढ़ रहा है। भीषण गर्मी झेल रहे उत्तर भारत में मानसून के देर से पहुंचने की भविष्यवाणी पहले ही की जा चुकी है। धीरे-धीरे आगे बढ़ रहे मानसून से लग रहा था कि मैदानी इलाकों में कुछ दिनों बाद राहत मिलेगी। लेकिन चक्रवाती तूफान 'वायु' के चलते अब अनुमान ये भी लगाया जा रहा है कि कहीं यह मानसूनी बादल को न उड़ा ले जाए। अगर ऐसा हुआ तो उत्तर भारत में भीषण गर्मी का प्रकोप देखने को मिल सकता है। क्योंकि पूरे मैदानी इलाकों में किसान खेती के लिए मानसून की बारिश पर ही निर्भर होते हैं। वैसे तो मानसून पहले से ही देरी से चल रहा है, लेकिन इस तूफान की प्रतिक्रिया देखते हुए लगता है इसकी रफ्तार 140 से 165 किमी प्रति घंटा हो सकती है। वहीं इसकी चपेट में आने वाले किसानों को बहुत नुकसान उठाना पड़ेगा। अगर मानसूनी बादल नहीं ठहरे तो बादल भी नहीं बरसेंगे। बादल नहीं बरसे तो उत्तर भारत में सूखे की स्थिति पैदा हो जाएगी।

गुजरात में हाई अलर्ट जारी

हालांकि, भारतीय मौसम विज्ञान विभाग मुताबिक, अब ये तूफान गुजरात की ओर तेजी से बढ़ रहा है। इस कारण गुजरात के तटीय क्षेत्रों में चक्रवात का खतरा मंडरा रहा है। इतना ही नहीं ये चक्रवाती तूफान 12-13 जून को सौराष्ट्र तट पर दस्तक दे सकता है।

इन इलाकों पर पड़ेगा असर

वायु तूफान के कारण अहमदाबाद, गांधीनगर और राजकोट समेत तटवर्ती इलाके वेरावल, भुज और सूरत में हल्की बारिश हो सकती है। चक्रवात के कारण सौराष्ट्र के भावनगर, अमरेली, सोमनाथ, वेरावल, जामनगर, पोरबंदर और कच्छ समेत कई इलाकों में तेज हवाओं के साथ भारी बारिश की संभावना है। वहीं, एक सप्ताह की देरी से आए दक्षिणी-पश्चिमी मानसून को लेकर भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के वैज्ञानिकों का कहना है कि मानसून दक्षिणी अरब सागर, लक्षद्वीप के अधिकांश हिस्सों और केरल और दक्षिण तमिलनाडु के कुछ हिस्सों में आगे बढ़ा है। उन्होंने यह भी बताया कि मंगलवार तक पूर्वोत्तर राज्यों के कुछ हिस्सों में मानसून के आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल हो रही थीं। बता दें, केरल में मानसून के 1 जून से आने के आसार थे, लेकिन इसने एक सप्ताह की देरी के साथ शनिवार को केरल तट पर दस्तक दी। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग द्वारा रविवार को जारी बयान के अनुसार, मंगलवार तक दक्षिणी अरब सागर, लक्षद्वीप और केरल, तमिलनाडु के कुछ हिस्सों, बंगाल की खाड़ी के दक्षिण-पश्चिम, दक्षिण-पूर्व, पूर्व-मध्य और उत्तर-पूर्व व पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी और मध्य अरब सागर के कुछ हिस्सों में दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल हैं।