महान गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह का पटना में निधन

vashishtha narayan singh

नई दिल्ली। महान गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह का आज यानि गुरुवार को पटना में निधन हो गया। बताया जा रहा है कि अचानक उनकी तबियत खराब होने लगी, जिसके बाद तत्काल परिजन उन्हे पीएमसीएच लेकर गए जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। वशिष्ठ नाराय़ण सिंह अपने परिजनों के संग पटना के कुल्हरिया कंपलेक्स में रहते थे।

Vashishtha Narayan Singh Death Indian Mathematician From Bihar Dies In Patna :

गौरतलब है कि बीते एक हफ्ते पहले वशिष्ठ बीमार पड़े थे तब पीएमसीएच में उन्हे देखने के लिए नेताओं का तांता लग गया था। बिहार के मुख्यमंत्री से लेकर केंद्रीय मंत्री तक उन्हें देखने गए थे। वहीं प्रकाश झा ने फिल्म बनाने की घोषणा कर रखी थी। आरा के बसंतपुर के रहने वाले वशिष्ठ नारायण सिंह बचपन से ही होनहार थे।

महान गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह के बारे में…

छठी क्लास में नेतरहाट के एक स्कूल में कदम रखा, तो फिर पलट कर नहीं देखा एक गरीब घर का लड़का हर क्लास में कामयाबी की नई इबारत लिख रहा था। वे पटना साइंस कॉलेज में पढ़ रहे थे कि तभी किस्मत चमकी और कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर जॉन कैली की नजर उन पर पड़ी जिसके बाद वशिष्ठ नारायण 1965 में अमेरिका चले गए और वहीं से 1969 में उन्होंने PHD की थी।

नई दिल्ली। महान गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह का आज यानि गुरुवार को पटना में निधन हो गया। बताया जा रहा है कि अचानक उनकी तबियत खराब होने लगी, जिसके बाद तत्काल परिजन उन्हे पीएमसीएच लेकर गए जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। वशिष्ठ नाराय़ण सिंह अपने परिजनों के संग पटना के कुल्हरिया कंपलेक्स में रहते थे। गौरतलब है कि बीते एक हफ्ते पहले वशिष्ठ बीमार पड़े थे तब पीएमसीएच में उन्हे देखने के लिए नेताओं का तांता लग गया था। बिहार के मुख्यमंत्री से लेकर केंद्रीय मंत्री तक उन्हें देखने गए थे। वहीं प्रकाश झा ने फिल्म बनाने की घोषणा कर रखी थी। आरा के बसंतपुर के रहने वाले वशिष्ठ नारायण सिंह बचपन से ही होनहार थे। महान गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह के बारे में... छठी क्लास में नेतरहाट के एक स्कूल में कदम रखा, तो फिर पलट कर नहीं देखा एक गरीब घर का लड़का हर क्लास में कामयाबी की नई इबारत लिख रहा था। वे पटना साइंस कॉलेज में पढ़ रहे थे कि तभी किस्मत चमकी और कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर जॉन कैली की नजर उन पर पड़ी जिसके बाद वशिष्ठ नारायण 1965 में अमेरिका चले गए और वहीं से 1969 में उन्होंने PHD की थी।