Vat Savitri vrat 2020: कल है वट सावित्री व्रत, जाने पूजन विधि और व्रत के महत्व

Vat Savitri vrat 2020: कल है वट सावित्री व्रत, जाने पूजन विधि और व्रत के महत्व
Vat Savitri vrat 2020: कल है वट सावित्री व्रत, जाने पूजन विधि और व्रत के महत्व

कल यानि 21 मई को वट सावित्री का व्रत है। हिंदू धर्म में वट सावित्री व्रत के दिन सुहागन स्त्रियां अपने पति की लंबी आयु के लिए व्रत रखती हैं। इस व्रत को रखने से सुहागन स्त्रियों का वैवाहिक जीवन बेहद सुखद होता है। मान्यता है कि बरगद के पेड़ में तीनों देव ब्रह्मा, विष्णु और महेश का वास होता है, इसलिए इस पेड़ की पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

Vat Savitri Vrat 2020 Tomorrow Is Vat Savitri Vrat Worship :

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माता सावित्री अपने पति के प्राणों को यमराज से छुड़ाकर ले आई थीं। अत: इस व्रत का महिलाओं के बीच विशेष महत्व बताया जाता है। इस दिन वट (बड़, बरगद) का पूजन होता है। इस व्रत को महिलाएं अखंड सौभाग्यवती रहने की मंगलकामना से करती हैं। इस दिन सुबह घर की सफाई कर स्नान करें। इसके बाद पवित्र जल का पूरे घर में छिड़काव करें। बांस की टोकरी में सप्त धान्य भरकर ब्रह्मा की मूर्ति की स्थापना करें। ब्रह्मा के वाम पार्श्व में सावित्री की मूर्ति स्थापित करें।

इसी प्रकार दूसरी टोकरी में सत्यवान तथा सावित्री की मूर्तियों की स्थापना करें। इन टोकरियों को वट वृक्ष के नीचे ले जाकर रखें। इसके बाद ब्रह्मा तथा सावित्री का पूजन करें। अब सावित्री और सत्यवान की पूजा करते हुए बड़ की जड़ में पानी दें। पूजा में जल, मौली, रोली, कच्चा सूत, भिगोया हुआ चना, फूल तथा धूप का प्रयोग करें। जल से वटवृक्ष को सींचकर उसके तने के चारों ओर कच्चा धागा लपेटकर तीन बार परिक्रमा करें। बड़ के पत्तों के गहने पहनकर वट सावित्री की कथा सुनें। भीगे हुए चनों का बायना निकालकर, नकद रुपए रखकर अपनी सास के पैर छूकर उनका आशीष प्राप्त करें।

कल यानि 21 मई को वट सावित्री का व्रत है। हिंदू धर्म में वट सावित्री व्रत के दिन सुहागन स्त्रियां अपने पति की लंबी आयु के लिए व्रत रखती हैं। इस व्रत को रखने से सुहागन स्त्रियों का वैवाहिक जीवन बेहद सुखद होता है। मान्यता है कि बरगद के पेड़ में तीनों देव ब्रह्मा, विष्णु और महेश का वास होता है, इसलिए इस पेड़ की पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माता सावित्री अपने पति के प्राणों को यमराज से छुड़ाकर ले आई थीं। अत: इस व्रत का महिलाओं के बीच विशेष महत्व बताया जाता है। इस दिन वट (बड़, बरगद) का पूजन होता है। इस व्रत को महिलाएं अखंड सौभाग्यवती रहने की मंगलकामना से करती हैं। इस दिन सुबह घर की सफाई कर स्नान करें। इसके बाद पवित्र जल का पूरे घर में छिड़काव करें। बांस की टोकरी में सप्त धान्य भरकर ब्रह्मा की मूर्ति की स्थापना करें। ब्रह्मा के वाम पार्श्व में सावित्री की मूर्ति स्थापित करें। इसी प्रकार दूसरी टोकरी में सत्यवान तथा सावित्री की मूर्तियों की स्थापना करें। इन टोकरियों को वट वृक्ष के नीचे ले जाकर रखें। इसके बाद ब्रह्मा तथा सावित्री का पूजन करें। अब सावित्री और सत्यवान की पूजा करते हुए बड़ की जड़ में पानी दें। पूजा में जल, मौली, रोली, कच्चा सूत, भिगोया हुआ चना, फूल तथा धूप का प्रयोग करें। जल से वटवृक्ष को सींचकर उसके तने के चारों ओर कच्चा धागा लपेटकर तीन बार परिक्रमा करें। बड़ के पत्तों के गहने पहनकर वट सावित्री की कथा सुनें। भीगे हुए चनों का बायना निकालकर, नकद रुपए रखकर अपनी सास के पैर छूकर उनका आशीष प्राप्त करें।