यादव सिंह के प्रमोशन में ताक पर रखे गए नियम, कई अाधिकारियों की फंसी गर्दन

लखनऊ: भ्रष्टाचार के पर्यायवाची बने नोएडा, नोएडा अथॉरिटी और यमुना एक्सप्रेसवे के चीफ इंजीनियर रहे यादव सिंह एक और नई मुश्किल में फंसते नज़र आ रहे हैं। यादव सिंह के खिलाफ जांच में सामने आया है कि इस भ्रष्टाचारी इंजीनियर को नियमों के विरुद्ध जाकर प्रमोशन दिया गया। इतना ही नहीं कई आईएएस अधिकारियों से सांठगांठ के चलते ही यादव सिंह को नियम विरुद्ध कार्य भी आवंटन किया गया। नोएडा अथॉरिटी और यादव सिंह मामले में भ्रष्टाचार की जांच के लिए गठित जस्टिस अमरनाथ वर्मा आयोग ने अपनी रिपोर्ट गुरुवार को राज्यपाल राम नाईक को सौंप दी है।




यूपी सरकार ने यह आयोग तब गठित किया था जब यादव सिंह के मामले में टैक्स विभाग की रेड के बाद हाई कोर्ट ने सीबीआई जांच के लिए कवायद शुरू कर दी थी। आयोग को यादव सिंह से जुड़े तीन बिंदुओं डिग्री, संपत्ति और प्रमोशन पर जांच करना था। हालांकि मामले की सीबीआई जांच के आदेश के बाद आयोग के औचित्य पर सवाल उठने लगे थे। आयोग को छह महीने में रिपोर्ट देनी थी, लेकिन उसका कार्यकाल तीन बार बढ़ाया गया था।




सरकार के एक अफसर की मानें तो आयोग को पिछले साल 26 अक्टूबर को अधिसूचना जारी कर भंग कर दिया गया था। राज्यपाल ने जस्टिस वर्मा से उनके आयोग की वैधानिकता से संबंधी जानकारी भी मांगी। इस पर जस्टिस वर्मा का कहना था कि आयोग अब भी काम कर रहा था। जांच रिपोर्ट में 157 पन्ने हैं। सूत्रों का कहना है कि रिपोर्ट में इसका भी उल्लेख है कि जिस समय यादव सिंह को प्रोनत्ति दी गई इस समय उनके पास पद के लिए जरूरी डिग्री तक नहीं थी। सांठगांठ के चलते यादव सिंह को नियम विरुद्ध कार्य का आवंटन किया गया। इसके लिए कई आईएएस अधिकारियों को दोषी ठहराया गया। चुनाव के नतीजे आने के महज दो दिन पहले रिपोर्ट सौंपे जाने से कयास लग रहे हैं कि रिपोर्ट में कई बड़े लोगों की गर्दन नप सकती है।