विजिलेंस जांच से बचने के लिए दिया इस्तीफा, विभाग ने किया निलंबित

लखनऊ। सीएम योगी आदित्यनाथ के विजिलेंस विभाग पर बढ़े भरोसे ने भ्रष्टाचारी अधिकारियों के भीतर विजिलेंस जांच का खौफ पैदा कर दिया है। पूर्ववर्ती सरकारों ने जिस तरह से भ्रष्टाचारी अधिकारी जिस विजिलेंस जांच को बच निकलने की गारंटी मानने लगे थे। आज वही विजिलेंस विभाग अपनी बदलती छवि के चलते भ्रष्टाचारियों को इस्तीफा देने के लिए मजबूर करने लगी है।

ताजा मामला यूपी आवास विकास परिषद् का है जहां लेखाकार पद पर तैनात जहीर अहमद सिद्दीकी ने अपने खिलाफ बुधवार को हुए विजिलेंस जांच के आदेश को देखते हुए अपने पद से इस्तीफा देने की कोशिश की। सिद्दीकी के कारनामों की विजिलेंस जांच के आदेश देने वाले आवास आयुक्त धीरज साहू को जब इस्तीफे की जानकारी मिली तो उन्होंने इस्तीफा न मंजूर करते हुए सिद्दीकी को निलंबित कर दिया।

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मिली जानकारी के मुताबिक जहीर सिद्दीकी पर लखनऊ की वृन्दावन आवासीय परियोजना में 12000 वर्गफुट के का​मर्शियल भूखंड के आवंटन में गड़बड़ी करने के आरोप लगे थे। आवास आयुक्त धीरज साहू ने जब सिद्दीकी पर लगे आरोपों की जांच करवाई तो सामने आया कि उसने अपने परिजनों के स्वामित्व वाली ही एक कंपनी को प्राइमलोकेशन वाले कामर्शियल प्लाट का आवंटन किया था। बुधवार को आवास आयुक्त धीरज साहू ने इसी विभागीय जांच के आधार पर जहीर सिद्दीकी के खिलाफ विजिलेंस जांच के आदेश देते हुए उसके भाई और पत्नी के नाम पर बनी कंपनियों की जांच करवाने के आदेश दिए थे।

विभागीय सूत्रों की माने तो 2006 से एक ही कुर्सी पर बैठे सिद्दीकी ने बीते 10 सालों में अरबों की सम्पत्तियां जुटाईं हैं। उसकी हैसियत अरबों में बताई जा रही है। उसने प्रदेश की कई आवासीय परियोजनाओं में अपने परिजनों की कंपनी के नाम भूखंड़ों का अवंटन करवाया है। उसके रिश्ते प्रदेश के कई बड़े बिल्डरों से भी बताए जा रहे हैं।

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