यहां दशहरे में नहीं फूंका जाता है दशानन, गांव का नाम है ‘रावण’

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में एक ऐसा गांव है, जिस गांव का नाम ही ‘रावण’ है। दशहरे में इस गांव में रावण को जलाया भी नहीं जाता है। यह गांव बागपत जिले में पड़ता है। इस गांव में प्राचीन मां मंशा देवी का का मंदिर भी है। ग्रामीणों की मान्यता है कि रावण जब हिमालय पर्वत से लौटा था, तो इसी दौरान मां शक्ति इसी गांव में आकार छूट गयी थी और जिस स्थान पर मां शक्ति छूटी थी, वहीं पर  मां मंशा देवी की सिद्ध पीठ है।

 मंशा देवी सिद्ध पीठ में नवरात्रि पर विशेष पूजा अर्चना की जाती है। कहते हैं कि यह मां की शक्ति सिद्ध पीठ है। सच्चे मन और निस्वार्थ भाव से मांगी गई मनोकामना मां जरूर पूरी करती है। ग्रामीणों के मुताबिक उनके बड़े बुजुर्गों ने बताया है कि इस गांव की स्थापना रावण ने की थी। इसीलिए इस गांव का नाम रावण उर्फ बड़ा गांव है। रावण का बसाया गांव होने के कारण इस गांव में दशहरे पर रावण का पुतला नहीं फूंका जाता।

मान्यता है कि रावण हिमालय से तपस्या कर वापस लौट रहे थे। उनके साथ देवी शक्ति भी थी। यह देवी शक्ति उन्हें तपस्या से प्रसन्न होकर वरदान में मिली थी। वरदान देते समय शर्त थी कि देवी की शक्ति को रावण कहीं बीच में नहीं रखेंगे। यदि उन्होंने शक्ति को बीच में कहीं रख दिया तो यह शक्ति उसी स्थान पर स्थापित हो जाएगी।

 

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