BHU: इज्ज़त बचाने की मांग कर रही छात्राओं पर पुलिस ने बरसाई लाठियां

वाराणसी। छेड़खानी के विरोध में सड़क पर उतरीं छात्राओं की अनसुनी करने और वीसी लॉज पर पहुंचे कुछ छात्र-छात्राओं पर सुरक्षाकर्मियों द्वारा लाठीचार्ज के बाद शनिवार की आधीरात को काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) परिसर जंग का मैदान बन गया। रात 1 बजे तक पुलिस और छात्राओं के बीच झड़प होत रही। हालात इतने बेकाबू हो गए कि 1500 से ज्यादा पुलिस बल को तैनात करना पड़ा। पुलिस और छात्राओं के बीच हुई झड़प में कई छात्राएं घायल हो गईं। पुलिस ने हवाई फायरिंग की और छात्राओं ने पथराव किया। इस प्रदर्शन के बाद यूनिवर्सिटी को 2 अक्टूबर तक बंद रखने का ऐलान कर दिया गया।

मारपीट और पथराव के बीच दस बमों के धमाकों से दो-ढाई किलोमीटर का इलाका थर्रा उठा। बवाल के चलते एक दारोगा व सिपाही समेत दर्जनों छात्रों को भी गंभीर चोट आई है। एक व्यक्ति की स्थिति मरणासन्न है। देर रात तक उसकी पहचान नहीं हो सकी थी।

हालात को काबू में करने के लिए जिले के पुलिस व प्रशासनिक अधिकारी मौके पर डटे हुए थे मगर फोर्स की भारी कमी के चलते केवल बिड़ला हास्टल में ही फोर्स घुस सकी। हालांकि फोर्स की कमी, आसपास घना अंधकार व इसी बीच लगभग दस बम धमाकों के चलते फोर्स को हास्टल से बाहर निकलने का आदेश देना पड़ा। पुलिस वायरलेस पर लगातार और फोर्स भेजे जाने की डिमांड लगातार कर रही थी।


यह है पूरा मामला
गौरतलब है कि गुरुवार शाम को विभाग से हास्टल जा रही दृश्य कला संकाय की छात्रा संग भारत कला भवन के पास कुछ युवकों ने छेड़खानी के साथ कपड़े उतारने की कोशिश की थी। किसी तरह हास्टल पहुंची छात्रा के बताने पर त्रिवेणी हास्टल की छात्राएं रात में ही सड़क पर आ गई।

हालांकि मनाने पर रात में वे शांत हो गई थीं, लेकिन शुक्रवार सुबह छह बजे ही त्रिवेणी हास्टल की छात्राओं ने सिंहद्वार पर आंदोलन शुरू कर दिया। उनका कहना था कि चंद मिनट के लिए आकर कुलपति समस्याएं सुन लेते तो वे धरना खत्म कर देतीं लेकिन, उनके न आने पर वे सिंहद्वार से नहीं हटीं। इससे प्रधानमंत्री का दुर्गा व मानस मंदिर जाने का रूट बदलना पड़ा। इतना ही नहीं, बीएचयू प्रशासन की अनदेखी व संवेदनहीनता के चलते छात्राओं ने शुक्रवार की रात सड़क (सिंहद्वार) पर गुजारी।

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