वीडियों: शहीद उमर फ़ैयाज़ के ये चंद सवालात, क्या दहशतगर्द दे पाएंगे इसका जबाब

कश्मीर। एक तरफ जहां यहां के युवा देश की एकता और अखंडता को तोड़ने पर आमादा है वहीं शहीद लेफ्टिनेंट उमर फैयाज ने एक वीडियो के जरिये इन गुमराह युवाओं को सही राह दिखने की कोशिश की है। बता दें कि बुधवार 10 मई को उमर फैयाज नाम का एक स्थानीय युवक शोपियां में आतंकियों की कायरतापूर्ण हरकत का शिकार हो गया जोकि भारतीय सेना लेफ्टिनेंट के पद पर कार्यरत था। इन दिनों इस शहीद लेफ्टिनेंट उमर फैयाज की एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेज़ी वायरल हो रही है।



दरअसल उमर फ़ैयाज़ के शहादत के बाद उसके कुछ साथियों ने एक वीडियो जारी किया है जिसमे वहां के स्थानीय लोगों से यह शहीद जवान कुछ मार्मिक सवाल पूछ रहा है जिसे सुन शायद वहां के दहशतगर्दों के अक्ल ठिकाने आ जाए। इस वीडियो में उमर फैयाज कश्मीरियों से सवाल कर रहे हैं कि अब आपको तय करना है कि यहां घाटी में बुरहान वानी रहेगा या उमर फैयाज..यहां डोलियां उठेंगी या जनाजे निकलेंगे। वीडियो में उमर फैयाज की तस्वीरों के पीछे किसी अन्य शख्स ने अपनी आवाज दी है।




यह है पूरा वीडियों
‘मैं उमर फयाज, मेरे वालिद एक किसान। मैं उनका इकलौता बेटा, मेरा शौक हॉकी खेलना। अभी 8 जून को मैं 23 पार करने वाला हूं, ये मेरी मां जमीला है. पर ये रो क्यों रही है? क्योंकि मैं अब जिंदा नहीं हूं। मेरा कसूर क्या था… बस इतना भर कि मैं कश्मीरी होकर भी हिंदुस्तानी था। मेरी ममेरी बहन की शादी होनी थी। उसने कहा- शादी मेरी जिंदगी का सबसे बड़ा दिन है तुम्हें आना ही होगा, इसलिए मैंने इंडियन आर्मी में भर्ती के बाद पहली बार छुट्टी ली थी. राजपुताना राइफल्स में बतौर लैफ्टिनेंट 10 दिसंबर को ही मेरी कमीशनिंग हुई थी. मेरे आने की खबर कश्मीर के दुश्मनों तक पहुंच गई. कुछ हथियारबंद नकाबपोश मेरी बहन के सामने ही मुझे खींच ले गए और अगले दिन गोलियों से छलनी मेरा शरीर शोपियां के हरमन चौक पर मिला. मेरी कातिल कौन थे? मेरे खून के दाग किसके दामन पर लगे? वो कौन थे जो एक कश्मीरी और कश्मीरियत के दुश्मन थे? मेरी शहादत के जिम्मेदार ना पाकिस्तानी थे, ना हिंदुस्तानी, वो मेरे अपने कश्मीरी थे। जिनकी हिफाजत की कसमें खाई थीं, वो ही मेरे खूनी निकले. ये महज मेरे नहीं, ये पूरी घाटी के दुश्मन हैं. ये वो हैं जो कश्मीरियत को आगे नहीं बढ़ते देखना चाहते. फौज मेरे जैसे नौजवानों के ख्वाबों की ताबीर कर रही है. घाटी के बाशिंदे डरेंगे नहीं, क्योंकि वो जानते हैं कि डर के आगे जीत है. कश्मीरियत की जीत. ये एक फैयाज की बात नहीं. ये घाटी फैयाजों की टोली है. अमनोचमन के लिए मैंने तो अपनी कुर्बानी दे दी अब तय कश्मीरियों को करना है कि घाटी में किलकारियां गूंजें या बंदूकें. हाथों में पत्थर हों या गुलाबी सेब. डोलियां उठें या जनाजे निकलें. घाटी जन्नत बने, या जहन्नुम. तय करना होगा यहां कायर रहेंगे या दिलेर. बुरहान वानी रहेगा या उमर फयाज हिंदुस्तानी।’

मैं उमर फ़ैयाज़ …..अगर सेना उमर फ़ैयाज़ के क़ातिल आंतकियों और उनके सरपरस्तों को चुन -चुनकर न मारे तो क्या करे ? ऐसे पाकपरस्त आतंकी और उनके दहशतगर्द आकाओं का एक ही इलाज है …गोली ..गोली और सिर्फ़ गोली …एक बार ज़रूर देखिए …इस वीडियो को …

Posted by Ajit Anjum on Friday, May 12, 2017