जल सरंक्षण अभियान के तहत विराट कोहली पर लगा जुर्माना, ऐसे करें जल बचाव

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जल सरंक्षण अभियान के तहत विराट कोहली पर लगा जुर्माना, ऐसे करें जल बचाव

लखनऊ। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने एक जुलाई से जल सरंक्षण का अभियान शुरू किया। जिसके बाद से बॉलीवुड एक्टर आमिर खान और अनुपम खेर जल सरंक्षण को लेकर लोगों को जागरूक कर रहे हैं। इतना ही नहीं पीएम मोदी ने भी इनके कामों की तारीफ करते हुए उन्हें सपोर्ट किया है। वहीं, दूसरी तरफ भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान विराट कोहली पर गुरुग्राम नगर निगम ने जल बर्बाद करने पर 500 रुपये का जुर्माना लगाया गया। इस अभियान को चलाने के बावजूद भी लोग पानी की बर्बादी को कम नहीं कर रहें हैं। आइये आपको बताते है कि कौन कहां सबसे ज़्यादा पानी की बर्बादी करता है।

Virat Kohli Fined Under Water Conservation Campaign Do So Save Water :

आज हर घर में ज़्यादातर आरओ वाटर फिल्टर मशीन होती हैं। इस मशीन की वजह से 25 लीटर फिल्टर पानी प्राप्त करने के लिए हम 75 लीटर अच्छी गुणवत्ता वाले पानी को बर्बाद कर देते हैं। पांच लोगों के एक परिवार को अगर एक दिन में 50 लीटर शुद्ध पेयजल की आवश्यकता होती है, तो इसका मतलब है कि हर दिन फिल्टर करने की प्रक्रिया में 150 लीटर पानी की बर्बादी हो रही है।

एक खबर के मुताबिक, पंजाब के लुधियाना शहर में प्रति दिन आरओ मशीन से डेढ़ करोड़ लीटर से ज्यादा पानी की बर्बादी हो रही है। बात करें दिल्ली, मुंबई और लखनऊ समेत कई शहरों की तो यहां भी हाल कुछ ऐसा ही है। इन शहरों में सरकारी एजेंसियां पानी को साफ करके लोगों के घरों में सप्लाई करती हैं। मगर फिर भी भारत में मौजूद पानी में टीडीएस की मात्रा कम होने के बावजूद लोग आरओ की डिमांड बढ़ा रहें हैं। ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि आरओ सिस्टम बनाने वाली कंपनियों ने पानी की अशुद्धियों को लेकर लोगों में डर का माहौल बना दिया है।

सवाल अब आपके मन में ये होगा कि पानी अगर अशुद्ध आ रहा है तो हम क्यों ना RO का इस्तेमाल करें, तो ये कहा जाएगा बेशक आप RO का इस्तेमाल करें लेकिन अगर आपको इसकी ज़रूरत है पड़ती है तो। आपको RO की ज़रूरत है या नहीं इसके लिए आपको ये जानना होगा कि सरकारी एजेंसी जो आपके घरों में पानी सप्लाई कर रही है उस पानी में TDS अगर 500mg/लीटर से कम है तो RO का इस्तेमाल ना करें।

इसके साथ ही सरकार को चाहिए कि घरों में आने वाले सप्लाई पानी के बिल के जरिए पानी की पूरी जानकारी दें। बिल पर लिखा होना चाहिए कि सप्लाई पानी का स्रोत क्या है और उसमें TDS कितना है।

RO से हो रहें पानी की बर्बादी इस समय सबसे बड़ी समस्या बन चुकी है। मगर इसके साथ ही हम इन जगहों पर भी पानी की बर्बादी सबसे ज़्यादा करते हैं।

यहां कर रहें सबसे ज़्यादा पानी की बर्बादी:
  • कार धोने में सबसे ज़्यादा पानी की बर्बादी
  • आधा गिलास पानी से हो रही बर्बादी (इसका मतलब ये है कि हम पीने के लिए एक गिलास भरकर पानी तो ले लेते हैं मगर पीते सिर्फ आधा गिलास ही हैं बचा हुआ पानी हम फेंक देते हैं।)
  • शावर और का इस्तेमाल करने से पानी की बर्बादी
  • ब्रश या फिर दाढ़ी बनाते समय नल को खुला छोड़ने से पानी की बर्बादी
  • किचन में काम करने के दौरान नल को खुला छोड़ने से पानी की बर्बादी
  • तेज़ फ्लश के चलने से पानी की बर्बादी
जल बर्बादी को रोकने के लिए हम इस तरह से जल का बचाव करें:
  • शावर या टब से स्नान ना करके बाल्टी में जल लेकर में स्नान करने से जल बचाया जा सकता है।
  • पुरूष वर्ग ढाढ़ी बनाते समय यदि टोंटी बन्द रखे तो बहुत जल बच सकता है।
  • रसोई में जल की बाल्टी या टब में अगर बर्तन साफ करें तो जल की हानि होने से रोका जा सकता है।
  • टॉयलेट में लगी फ्लश की टंकी में प्लास्टिक की बोतल में रेत भरकर रख देने से हर बार एक लीटर जल बचाने का कारगर उपाय उत्तराखण्ड जल संस्थान ने बताया गया है। इस विधि का तेजी से प्रचार-प्रसार करके पूरे देश में लागू करके जल बचाया जा सकता है।
  • गाँवों, कस्बों और नगरों में छोटे-बड़े तालाब बनाकर वर्षा जल का संरक्षण करने से जल का बचाव किया जा सकता है।
  • नगरों और महानगरों में घरों की नालियों के पानी को गढ्ढे बना कर एकत्र किया जाए और पेड़-पौधों की सिंचाई के काम में लिया जाए, तो साफ पेयजल की बचत अवश्य की जा सकती है।
  • हर घर की छत पर वर्षा जल का भंडार करने के लिए एक या दो टंकी बनाई जाएं और इन्हें मजबूत जाली या फिल्टर कपड़े से ढ़क दिया जाए तो हर नगर में जल संरक्षण किया जा सकेगा।
  • घरों, मुहल्लों और सार्वजनिक पार्कों, स्कूलों अस्पतालों, दुकानों, मन्दिरों आदि में लगी नल की टोंटियां खुली या टूटी रहने की वजह से हजारों लीटर पानी बर्बाद होता है। इस बर्बादी के चलते नगर पालिका को दण्डात्मक अपराध बनाकर जागरूकता बढ़ानी होगी।
  • खारेजल का प्रयोग करके शुद्ध जल का संरक्षण किया जा रहा है इसे बढ़ाया जाए।
  • बढ़ती जनसंख्या और औद्योगीकरण के कारण जंगल और वृक्षों के अंधाधुंध कटान से भूमि की नमी लगातार कम होती जा रही है। जिसकी वजह से भूमिगत जल सूखता जाता हैं। इसके लिए हमें वृक्षारोपण बढ़ाना चाहिए।
  • जल संरक्षण को अनिवार्य विषय बना कर प्राथमिक से लेकर उच्च स्तर तक नई पीढ़ी को पढ़वाने का कानून बनाएं।
लखनऊ। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने एक जुलाई से जल सरंक्षण का अभियान शुरू किया। जिसके बाद से बॉलीवुड एक्टर आमिर खान और अनुपम खेर जल सरंक्षण को लेकर लोगों को जागरूक कर रहे हैं। इतना ही नहीं पीएम मोदी ने भी इनके कामों की तारीफ करते हुए उन्हें सपोर्ट किया है। वहीं, दूसरी तरफ भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान विराट कोहली पर गुरुग्राम नगर निगम ने जल बर्बाद करने पर 500 रुपये का जुर्माना लगाया गया। इस अभियान को चलाने के बावजूद भी लोग पानी की बर्बादी को कम नहीं कर रहें हैं। आइये आपको बताते है कि कौन कहां सबसे ज़्यादा पानी की बर्बादी करता है। आज हर घर में ज़्यादातर आरओ वाटर फिल्टर मशीन होती हैं। इस मशीन की वजह से 25 लीटर फिल्टर पानी प्राप्त करने के लिए हम 75 लीटर अच्छी गुणवत्ता वाले पानी को बर्बाद कर देते हैं। पांच लोगों के एक परिवार को अगर एक दिन में 50 लीटर शुद्ध पेयजल की आवश्यकता होती है, तो इसका मतलब है कि हर दिन फिल्टर करने की प्रक्रिया में 150 लीटर पानी की बर्बादी हो रही है। एक खबर के मुताबिक, पंजाब के लुधियाना शहर में प्रति दिन आरओ मशीन से डेढ़ करोड़ लीटर से ज्यादा पानी की बर्बादी हो रही है। बात करें दिल्ली, मुंबई और लखनऊ समेत कई शहरों की तो यहां भी हाल कुछ ऐसा ही है। इन शहरों में सरकारी एजेंसियां पानी को साफ करके लोगों के घरों में सप्लाई करती हैं। मगर फिर भी भारत में मौजूद पानी में टीडीएस की मात्रा कम होने के बावजूद लोग आरओ की डिमांड बढ़ा रहें हैं। ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि आरओ सिस्टम बनाने वाली कंपनियों ने पानी की अशुद्धियों को लेकर लोगों में डर का माहौल बना दिया है। सवाल अब आपके मन में ये होगा कि पानी अगर अशुद्ध आ रहा है तो हम क्यों ना RO का इस्तेमाल करें, तो ये कहा जाएगा बेशक आप RO का इस्तेमाल करें लेकिन अगर आपको इसकी ज़रूरत है पड़ती है तो। आपको RO की ज़रूरत है या नहीं इसके लिए आपको ये जानना होगा कि सरकारी एजेंसी जो आपके घरों में पानी सप्लाई कर रही है उस पानी में TDS अगर 500mg/लीटर से कम है तो RO का इस्तेमाल ना करें। इसके साथ ही सरकार को चाहिए कि घरों में आने वाले सप्लाई पानी के बिल के जरिए पानी की पूरी जानकारी दें। बिल पर लिखा होना चाहिए कि सप्लाई पानी का स्रोत क्या है और उसमें TDS कितना है। RO से हो रहें पानी की बर्बादी इस समय सबसे बड़ी समस्या बन चुकी है। मगर इसके साथ ही हम इन जगहों पर भी पानी की बर्बादी सबसे ज़्यादा करते हैं।
यहां कर रहें सबसे ज़्यादा पानी की बर्बादी:
  • कार धोने में सबसे ज़्यादा पानी की बर्बादी
  • आधा गिलास पानी से हो रही बर्बादी (इसका मतलब ये है कि हम पीने के लिए एक गिलास भरकर पानी तो ले लेते हैं मगर पीते सिर्फ आधा गिलास ही हैं बचा हुआ पानी हम फेंक देते हैं।)
  • शावर और का इस्तेमाल करने से पानी की बर्बादी
  • ब्रश या फिर दाढ़ी बनाते समय नल को खुला छोड़ने से पानी की बर्बादी
  • किचन में काम करने के दौरान नल को खुला छोड़ने से पानी की बर्बादी
  • तेज़ फ्लश के चलने से पानी की बर्बादी
जल बर्बादी को रोकने के लिए हम इस तरह से जल का बचाव करें:
  • शावर या टब से स्नान ना करके बाल्टी में जल लेकर में स्नान करने से जल बचाया जा सकता है।
  • पुरूष वर्ग ढाढ़ी बनाते समय यदि टोंटी बन्द रखे तो बहुत जल बच सकता है।
  • रसोई में जल की बाल्टी या टब में अगर बर्तन साफ करें तो जल की हानि होने से रोका जा सकता है।
  • टॉयलेट में लगी फ्लश की टंकी में प्लास्टिक की बोतल में रेत भरकर रख देने से हर बार एक लीटर जल बचाने का कारगर उपाय उत्तराखण्ड जल संस्थान ने बताया गया है। इस विधि का तेजी से प्रचार-प्रसार करके पूरे देश में लागू करके जल बचाया जा सकता है।
  • गाँवों, कस्बों और नगरों में छोटे-बड़े तालाब बनाकर वर्षा जल का संरक्षण करने से जल का बचाव किया जा सकता है।
  • नगरों और महानगरों में घरों की नालियों के पानी को गढ्ढे बना कर एकत्र किया जाए और पेड़-पौधों की सिंचाई के काम में लिया जाए, तो साफ पेयजल की बचत अवश्य की जा सकती है।
  • हर घर की छत पर वर्षा जल का भंडार करने के लिए एक या दो टंकी बनाई जाएं और इन्हें मजबूत जाली या फिल्टर कपड़े से ढ़क दिया जाए तो हर नगर में जल संरक्षण किया जा सकेगा।
  • घरों, मुहल्लों और सार्वजनिक पार्कों, स्कूलों अस्पतालों, दुकानों, मन्दिरों आदि में लगी नल की टोंटियां खुली या टूटी रहने की वजह से हजारों लीटर पानी बर्बाद होता है। इस बर्बादी के चलते नगर पालिका को दण्डात्मक अपराध बनाकर जागरूकता बढ़ानी होगी।
  • खारेजल का प्रयोग करके शुद्ध जल का संरक्षण किया जा रहा है इसे बढ़ाया जाए।
  • बढ़ती जनसंख्या और औद्योगीकरण के कारण जंगल और वृक्षों के अंधाधुंध कटान से भूमि की नमी लगातार कम होती जा रही है। जिसकी वजह से भूमिगत जल सूखता जाता हैं। इसके लिए हमें वृक्षारोपण बढ़ाना चाहिए।
  • जल संरक्षण को अनिवार्य विषय बना कर प्राथमिक से लेकर उच्च स्तर तक नई पीढ़ी को पढ़वाने का कानून बनाएं।