गोमती नदी के किराने टहलना हुआ खतरनाक, जानें क्या है वजह

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गोमती नदी के किराने टहलना हुआ खतरनाक, जानें क्या है वजह

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के गोमती नदी के किनारे नहाना ही नहीं बल्कि टहलना भी हो गया है खतरनाक। एनजीटी की कूड़ा प्रबंधन एवं अनुश्रवण समिति ने लोगों को चेताया है कि वे न तो गोमती में नहाएं और न ही सुबह-शाम नदी के किनारे टहलने जाएं। ऐसा करना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होगा। कई जगह आक्सीजन की मात्रा शून्य हो चुकी है, यह चिंताजनक है।

Visiting Near Gomti River Is Now Becoming Dangerous :

दरअसल, समिति के सचिव एवं पूर्व जिला जज राजेंद्र सिंह ने जारी रिपोर्ट में कहा है कि राजनीतिक हस्तक्षेप व भ्रष्टाचार के चलते प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव व अन्य अधिकारी अपने संवैधानिक दायित्वों का निर्वहन करने में पूर्णत: असफल रहे हैं।

वहीं, गोमती पीलीभीत के माधव टाण्डा कस्बा स्थित गोमद ताल से जौनपुर तक 11 जिलों से होते हुए 900 किलोमीटर की यात्रा करती है और सैदपुर में गंगा में विलीन होती है। हर जगह गोमती की दुर्दशा ही मिली है। अकेले लखनऊ में 33 नाले गोमती में गिर रहे हैं। करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी स्थिति बदतर है।

बता दें, राजेन्द्र सिंह ने सीपीसीबी व यूपीपीसीबी के वैज्ञानिकों के साथ गोमती के किनारे विभिन्न क्षेत्रों का निरीक्षण किया। रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले 70 वर्षों से सरकार लगातार इस पर काम कर रही है लेकिन वातावरण दिन प्रतिदिन प्रदूषित होता जा रहा है।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के गोमती नदी के किनारे नहाना ही नहीं बल्कि टहलना भी हो गया है खतरनाक। एनजीटी की कूड़ा प्रबंधन एवं अनुश्रवण समिति ने लोगों को चेताया है कि वे न तो गोमती में नहाएं और न ही सुबह-शाम नदी के किनारे टहलने जाएं। ऐसा करना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होगा। कई जगह आक्सीजन की मात्रा शून्य हो चुकी है, यह चिंताजनक है। दरअसल, समिति के सचिव एवं पूर्व जिला जज राजेंद्र सिंह ने जारी रिपोर्ट में कहा है कि राजनीतिक हस्तक्षेप व भ्रष्टाचार के चलते प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव व अन्य अधिकारी अपने संवैधानिक दायित्वों का निर्वहन करने में पूर्णत: असफल रहे हैं। वहीं, गोमती पीलीभीत के माधव टाण्डा कस्बा स्थित गोमद ताल से जौनपुर तक 11 जिलों से होते हुए 900 किलोमीटर की यात्रा करती है और सैदपुर में गंगा में विलीन होती है। हर जगह गोमती की दुर्दशा ही मिली है। अकेले लखनऊ में 33 नाले गोमती में गिर रहे हैं। करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी स्थिति बदतर है। बता दें, राजेन्द्र सिंह ने सीपीसीबी व यूपीपीसीबी के वैज्ञानिकों के साथ गोमती के किनारे विभिन्न क्षेत्रों का निरीक्षण किया। रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले 70 वर्षों से सरकार लगातार इस पर काम कर रही है लेकिन वातावरण दिन प्रतिदिन प्रदूषित होता जा रहा है।