130 देशों के वैज्ञानिकों की चेतावनी- ‘हमारी धरती एक भयावह संकट में है’

Our Earth is in a terrible crisis
130 देशों के वैज्ञानिकों की चेतावनी- 'हमारी धरती एक भयावह संकट में है'

नई दिल्ली। 130 देशों के 11 हजार वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि हमारी धरती एक भयावह संकट में है। उनका मानना है कि धरती पर प्राकृतिक आपातकाल जारी है, ऐसा इसलिए क्योंकि आर्कटिक में मौजूद सबसे पुराना और सबसे स्थिर आइसबर्ग बहुत तेजी से पिघल रहा है। उस हिस्से को ‘द लास्ट आइस एरिया’ कहते हैं।

Warning Of Scientists Of 130 Countries Our Earth Is In A Terrible Crisis :

वैज्ञानिको का मानना है कि ‘द लास्ट आइस एरिया’ दुनिया का सबसे पुराना और स्थिर बर्फ वाला इलाका है। लेकिन अब यह दोगुनी गति से तेजी के साथ पिघल रहा है। ‘द लास्ट आइस एरिया’ में 2016 में बर्फ 4,143,980 वर्ग किमी थी, लेकिन अब घटकर 9.99 लाख वर्ग किमी ही बची है। लेकिन ऐसा ही चलता रहा है तो अनुमान है कि 2030 तक पूरी बर्फ पिघलकर खत्म हो जायेगी।

बताया गया कि हर 10 साल में करीब 1.30 फीट बर्फ पिघल रही है, 1970 के बाद से अब तक आर्कटिक में करीब 5 फीट बर्फ पिघल चुकी है। बर्फ पिघलने की वजह से समुद्र का जलस्तर तेजी से बढ़ने की आशंका है। आर्कटिक की बर्फ पिघलने से ग्रीनलैंड और कनाडा के आसपास का मौसम बदलने का भी अनुमान है। वहां की गर्मी तो बढ़ेगी ही साथ में पूरी दुनिया पर इसका असर होगा। ‘द लास्ट आइस एरिया’ में विभिन्न प्रजातियों के जीव-जंतु रहते हैं. अगर इसी गति से बर्फ पिघलती रही तो पोलर बियर, व्हेल, पेंग्विन और सील जैसे खूबसूरत जीव-जंतु खत्म हो जाएंगे।

नई दिल्ली। 130 देशों के 11 हजार वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि हमारी धरती एक भयावह संकट में है। उनका मानना है कि धरती पर प्राकृतिक आपातकाल जारी है, ऐसा इसलिए क्योंकि आर्कटिक में मौजूद सबसे पुराना और सबसे स्थिर आइसबर्ग बहुत तेजी से पिघल रहा है। उस हिस्से को 'द लास्ट आइस एरिया' कहते हैं। वैज्ञानिको का मानना है कि 'द लास्ट आइस एरिया' दुनिया का सबसे पुराना और स्थिर बर्फ वाला इलाका है। लेकिन अब यह दोगुनी गति से तेजी के साथ पिघल रहा है। 'द लास्ट आइस एरिया' में 2016 में बर्फ 4,143,980 वर्ग किमी थी, लेकिन अब घटकर 9.99 लाख वर्ग किमी ही बची है। लेकिन ऐसा ही चलता रहा है तो अनुमान है कि 2030 तक पूरी बर्फ पिघलकर खत्म हो जायेगी। बताया गया कि हर 10 साल में करीब 1.30 फीट बर्फ पिघल रही है, 1970 के बाद से अब तक आर्कटिक में करीब 5 फीट बर्फ पिघल चुकी है। बर्फ पिघलने की वजह से समुद्र का जलस्तर तेजी से बढ़ने की आशंका है। आर्कटिक की बर्फ पिघलने से ग्रीनलैंड और कनाडा के आसपास का मौसम बदलने का भी अनुमान है। वहां की गर्मी तो बढ़ेगी ही साथ में पूरी दुनिया पर इसका असर होगा। 'द लास्ट आइस एरिया' में विभिन्न प्रजातियों के जीव-जंतु रहते हैं. अगर इसी गति से बर्फ पिघलती रही तो पोलर बियर, व्हेल, पेंग्विन और सील जैसे खूबसूरत जीव-जंतु खत्म हो जाएंगे।