मौसम ने ली करवट और कोहरे ने दिखाया भीषण रूप

बिजनौर। मौसम ने करवट ली और कोहरे ने भीषण रूप दिखाया। रात से ही कोहरे की सफेद चादर ने सब कुछ अपने में समा लिया। दोपहर तब हर तरफ सिर्फ कोहरा दिखाई दिया और वाहन दिन में ही लाइटे जलाकर रेंगते हुए नजर आए। परिनिर्वाण दिवस पर स्कूलों का सार्वजनिक अवकाष होने के कारण बच्चे ठिठुरने से बच गए। करीब 12 बजे के बाद कोहरा छटा और सूर्य देवता के दर्षन हो सके।




सर्दी का मौसम षुरू होने के बाद कोहरे ने दूसरी बार अपना रंग दिखाया है। अन्य दिन थोड़ा-बहुत कोहरा आता था, लेकिन सुबह होते-होते खत्म हो जाता था। मंगलवार को कोहरे ने भीशण रूप दिखाया और जिन्दगी थम सी गई। देर रात से ही इतना घना कोहरा आया कि लोगों को कुछ दूरी का भी दिखाई देना बंद हो गया। यह कोहरा दोपहर करीब 12 बजे तक अपना रंग दिखाता रहा। सड़कों पर फर्राटे फरने हुए हवा से बात करने वाले वाहन भी दिन में लाइटे जलाकर कछुवा गति से रेंगते हुए दिखाई दिए।




गनीमत रही कि बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के परिनिर्वाण दिवस पर सार्वजनिक अवकाष घोशित किया हुआ था, जिसके चलते स्कूली बच्चे इस कोहरे की जद में आने से बच गए। बच्चों के अलावा सरकारी कार्यालयों की छ्ट्टी होने के कारण बड़े भी गर्म कपड़ों में घुसे हुए दिखाई दिए। कोहरे के कारण बाजार सूने रहे और सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहा। घंटों तक कोहरे के तांडव के बाद दोपहर करीब 11 बजे सूर्य देवता के दर्षन हुए और कोहरा हटकर मौसम साफ हुआ। धूप निकलने के बाद लोगों ने राहत की सांस ली।

बिजनौर से शहजाद अंसारी की रिपोर्ट