ऐसी मान्यता है कि स्वयं चंद्र देव ने सोमनाथ ज्योतिर्लिंग की स्थापना की थी।

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श्रीशैल पर्वत पर स्थित मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग के दर्शन मात्र से सभी कष्ट दूर हो जाते हैं।

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महाकालेश्वर एकमात्र दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग है। जहां रोजाना होने वाली भस्म आरती विश्व भर में प्रसिद्ध है।

मान्‍यता है कि ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन मात्र से पूरे माने जाते हैं सारे तीर्थ।

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 भगवान केदारनाथ के दर्शन किए बिना बद्रीनाथ की यात्रा अधूरी और निष्‍फल मानी जाती है।

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भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग में  शिवलिंग काफी मोटा है, इसलिए इसे मोटेश्वर महादेव कहते हैं।

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विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग के बारे में ऐसी मान्‍यता है कि भगवान शिव ने कैलाश छोड़कर यहीं अपना स्थाई निवास बनाया था।

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त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग का शिवपुराण में वर्णन है।  गौतम ऋषि और गोदावरी की प्रार्थना पर भगवान शिव ने इस स्थान पर निवास करने निश्चय किया।

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 रावण ने तप के बल पर शिव को लंका ले जा रहा था, लेकिन रास्ते में व्यवधान आने से शर्त के अनुसार यहीं ज्योतिर्लिंग स्थापित करना पड़ा।

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पुराणों में भगवान शिव को नागों का ईश्वर कहते हैं उनकी इच्छा अनुसार ही इस ज्योतिर्लिंग का नामकरण किया गया है।

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मान्‍यता है कि लंका पर चढ़ाई से पहले भगवान राम ने जो शिवलिंग  स्थापित किया, वही रामेश्वर के नाम से विश्व विख्यात हुआ।

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भगवान शिव का यह अंतिम ज्योतिर्लिंग है। इसको घृष्‍णेश्‍वर के नाम से भी जाना जाता है। 

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