श्मशान को साक्षी मान चिता स्थल में लिए फेरे, दूल्हा-दुल्हन की मर्जी से हुई यह अनोखी शादी

भावनगर। प्रख्यात कथावाचक मोरारी बापू ने एक बार बनारस में प्रवचन के दौरान बताया था कि हमें जन्म या मृत्यु का जश्न श्मशान घाट में मनाना चाहिए। इससे प्रेरणा ले गुजरात के भावनगर जिले में महुवा में एक पुजारी के बेटे की शादी में शहनाई बजी, फूलों से मंडप भी सजा लेकिन साक्षी बना श्मशान घाट वहीं दुल्हा दुल्हन ने चिता स्थल के फेरे ले शादी के बंधन में बंधे।

गुजरात के भावनगर जिले में महुवा में एक पुजारी के बेटे ने श्मशान भूमि से ही मैरिड लाइफ की शुरुआत की। जब कोई पंडित श्मशान में विवाह करवाने के लिए तैयार नहीं हुआ तो खुद मोरारी बापू श्मशान घाट पहुंचे। मुरारी बापू ने दूल्हे घनश्याम दास और दुल्हन पारुल से वैदिक मंत्रोच्चार के बीच चिता के फेरे लगवा शादी सपन्न करवाए।

घनश्यान ने बताया कि मोरारी बापू ने कहा था कि श्मशान घाट सबसे पवित्र जगह है। जब मुझे इस बात का पता चला था तभी मैंने संकल्प ले लिया था कि मैं जब भी विवाह करूंगा श्मशान में ही करूंगा। जब मैंने पारुल से कहा कि सुनते तो सब हैं लेकिन अमल भी करना जरूरी है। जिसके बाद पारुल भी इसके लिए तैयार हो गई।

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मुरारी बापू से प्रेरित घनश्यान ने कहा श्मशान घाट आने से जीवन में वैराग्य भाव नहीं आता है। उम्मीद है कि कुछ समय बाद से श्मशान भूमि में सामूहिक विवाह भी होंगे। इस बारे में दुल्हन पारुल ने कहा कि बापू से मिलकर उनकी सारी शंकाएं दूर हाे गईं। इसलिए वह श्मशान में फेरों को तैयार हो गई।

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