पश्चिम बंगाल के मज़दूर बेबस: लॉकडाउन ने छीन ली नौकरी, चक्रवात अम्फान ने छत

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पश्चिम बंगाल के मज़दूर बेबस: लॉकडाउन ने छीन ली नौकरी, चक्रवात अम्फान ने छत

कोलकाता: चक्रवाती तूफान अम्फान की वजह से पश्चिम बंगाल में प्रवासी मजदूरों पर दोहरी मार पड़ी है. कोरोना वायरस के कारण देशभर में लागू लॉकडाउन ने एक तरफ जहां मजदूरों का रोजगार छीन लिया, वहीं दूसरी ओर अम्फान ने अब उनके सिर से छत भी छीन ली है.

West Bengal Laborers Helpless Lockdown Snatched Job Cyclone Amfan Roof :

45 वर्षीय जमाल मंडल सोमवार को बेंगलुरु से दक्षिण 24 परगना जिले में स्थित अपने गृह नगर गोसाबा पहुंचे थे. वह अपने परिवार से मिलकर काफी खुश थे, लेकिन उनकी खुशी ज्यादा देर टिकी नहीं रह सकी.

20 मई की रात चक्रवात अम्फान के कारण उनका मिट्टी का घर बह गया. वह अब अपनी पत्नी और चार बेटियों के साथ जिले में एक राहत शिविर में रह रहे हैं.

मंडल ने एक समाचार चैनल से कहा, ‘सोमवार को जब मैं घर पहुंचा मैंने सोचा की मेरी तकलीफें खत्म हो जाएंगी, लेकिन मैं गलत था. लॉकडाउन के कारण मेरी नौकरी गई और रहा-सहा जो कुछ मेरे पास था, चक्रवात सब कुछ ले गया. मुझे नहीं पता अब मैं क्या करूंगा, मैं कहां रहूंगा और अपने परिवार का पेट कैसे पालूंगा.’

दक्षिण 24 परगना के सैकड़ों प्रवासी मजदूरों की यही कहानी है, जिनकी लॉकडाउन की वजह से नौकरी चली गई है और चक्रवात के कारण उनके पास अब कुछ नहीं बचा है. पश्चिम बंगाल में अम्फान से कम से कम 72 लोगों की मौत हुई है और कोलकाता समेत राज्य के कई हिस्सों में तबाही मची है.

35 वर्षीय ज़मीर अली के मुताबिक, 2009 में आए चक्रवात ऐला की तबाही के बाद उन्होंने अपने परिवार के सात सदस्यों का पेट पालने के लिए दूसरे राज्य जाकर काम ढूंढने का फैसला किया था.

उन्होंने कहा, ‘ऐला के बाद मैंने काम की तलाश में बेंगलुरु जाने का फैसला किया था. मैंने 10 साल तक एक राजमिस्त्री का काम किया, लेकिन लॉकडाउन के कारण मुझे अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ा. 15 दिन तक पैदल, ट्रक और बस की यात्रा के बाद 19 मई को घर पहुंचने में कामयाबी मिली.’

अली का घर 20 मई की रात तूफान की वजह से तबाह हो गया. उनके भाई का कुछ अता-पता नहीं है, जो तटबंध के पास नौका को बांधने गए थे. जिले के एक अधिकारी ने बताया कि इस चक्रवात के बाद बहुत से लोग सुंदरबन क्षेत्र से बाहर रोजगार की तलाश में जाएंगे.

एक राहत शिविर में खाने की कतार में लगे जॉयदेब मंडल ने कहा, ‘पहले हम यहीं काम किया करते थे, लेकिन 2009 में आए तूफान में सब तबाह हो गया. समुद्र का जलस्तर बढ़ने से हमने अपने निवास के स्थान को खो दिया और हमें दूसरे राज्यों में जाना पड़ा. अब इस चक्रवात ने हमसे हमारा घर भी छीन लिया.’

लगातार तमाम कोशिशों के बाद बीते गुरुवार को मुंबई में रह रहे 27 वर्षीय नसीर मंडल की उत्तर 24 परगना जिले के चांदीपुर गांव में रह रहीं उनकी मां से बात हो पाई. उनकी मां ने फोन पर उन्हें बताया, ‘सब कुछ खत्म हो गया है.’ अम्फान से उनका गांव तबाह हो गया है.

नसीर मुंबई के गोवंडी में निर्माण मजदूर के रूप में काम करते हैं और पिछले दो महीने से घर वापस लौटने की कोशिश कर रहे हैं. अब जाकर उनके घर वापस लौटने की व्यवस्था हो सकी है. वे कहते हैं, ‘मजाक बन गई है जिंदगी. पिछले दो महीनों से मैं यहां फंसा हुआ हूं. मैंने अपने बूढ़े माता-पिता को बताया था कि मैं घर वापस लौटकर वहीं कुछ काम ढूंढ़ लूंगा, लेकिन अब कुछ बचा नहीं है.’

बता दें कि चक्रवाती तूफान अम्फान ने पश्चिम बंगाल और ओडिशा में भारी तबाही मचाई है. हजारों मकान नष्ट हो गए और निचले इलाकों में पानी भर गया. अधिकारियों के मुताबिक पश्चिम बंगाल में क़रीब पांच लाख लोगों को और ओडिशा में क़रीब 1.58 लाख लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है.

कोलकाता: चक्रवाती तूफान अम्फान की वजह से पश्चिम बंगाल में प्रवासी मजदूरों पर दोहरी मार पड़ी है. कोरोना वायरस के कारण देशभर में लागू लॉकडाउन ने एक तरफ जहां मजदूरों का रोजगार छीन लिया, वहीं दूसरी ओर अम्फान ने अब उनके सिर से छत भी छीन ली है. 45 वर्षीय जमाल मंडल सोमवार को बेंगलुरु से दक्षिण 24 परगना जिले में स्थित अपने गृह नगर गोसाबा पहुंचे थे. वह अपने परिवार से मिलकर काफी खुश थे, लेकिन उनकी खुशी ज्यादा देर टिकी नहीं रह सकी. 20 मई की रात चक्रवात अम्फान के कारण उनका मिट्टी का घर बह गया. वह अब अपनी पत्नी और चार बेटियों के साथ जिले में एक राहत शिविर में रह रहे हैं. मंडल ने एक समाचार चैनल से कहा, ‘सोमवार को जब मैं घर पहुंचा मैंने सोचा की मेरी तकलीफें खत्म हो जाएंगी, लेकिन मैं गलत था. लॉकडाउन के कारण मेरी नौकरी गई और रहा-सहा जो कुछ मेरे पास था, चक्रवात सब कुछ ले गया. मुझे नहीं पता अब मैं क्या करूंगा, मैं कहां रहूंगा और अपने परिवार का पेट कैसे पालूंगा.’ दक्षिण 24 परगना के सैकड़ों प्रवासी मजदूरों की यही कहानी है, जिनकी लॉकडाउन की वजह से नौकरी चली गई है और चक्रवात के कारण उनके पास अब कुछ नहीं बचा है. पश्चिम बंगाल में अम्फान से कम से कम 72 लोगों की मौत हुई है और कोलकाता समेत राज्य के कई हिस्सों में तबाही मची है. 35 वर्षीय ज़मीर अली के मुताबिक, 2009 में आए चक्रवात ऐला की तबाही के बाद उन्होंने अपने परिवार के सात सदस्यों का पेट पालने के लिए दूसरे राज्य जाकर काम ढूंढने का फैसला किया था. उन्होंने कहा, ‘ऐला के बाद मैंने काम की तलाश में बेंगलुरु जाने का फैसला किया था. मैंने 10 साल तक एक राजमिस्त्री का काम किया, लेकिन लॉकडाउन के कारण मुझे अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ा. 15 दिन तक पैदल, ट्रक और बस की यात्रा के बाद 19 मई को घर पहुंचने में कामयाबी मिली.’ अली का घर 20 मई की रात तूफान की वजह से तबाह हो गया. उनके भाई का कुछ अता-पता नहीं है, जो तटबंध के पास नौका को बांधने गए थे. जिले के एक अधिकारी ने बताया कि इस चक्रवात के बाद बहुत से लोग सुंदरबन क्षेत्र से बाहर रोजगार की तलाश में जाएंगे. एक राहत शिविर में खाने की कतार में लगे जॉयदेब मंडल ने कहा, ‘पहले हम यहीं काम किया करते थे, लेकिन 2009 में आए तूफान में सब तबाह हो गया. समुद्र का जलस्तर बढ़ने से हमने अपने निवास के स्थान को खो दिया और हमें दूसरे राज्यों में जाना पड़ा. अब इस चक्रवात ने हमसे हमारा घर भी छीन लिया.’ लगातार तमाम कोशिशों के बाद बीते गुरुवार को मुंबई में रह रहे 27 वर्षीय नसीर मंडल की उत्तर 24 परगना जिले के चांदीपुर गांव में रह रहीं उनकी मां से बात हो पाई. उनकी मां ने फोन पर उन्हें बताया, ‘सब कुछ खत्म हो गया है.’ अम्फान से उनका गांव तबाह हो गया है. नसीर मुंबई के गोवंडी में निर्माण मजदूर के रूप में काम करते हैं और पिछले दो महीने से घर वापस लौटने की कोशिश कर रहे हैं. अब जाकर उनके घर वापस लौटने की व्यवस्था हो सकी है. वे कहते हैं, ‘मजाक बन गई है जिंदगी. पिछले दो महीनों से मैं यहां फंसा हुआ हूं. मैंने अपने बूढ़े माता-पिता को बताया था कि मैं घर वापस लौटकर वहीं कुछ काम ढूंढ़ लूंगा, लेकिन अब कुछ बचा नहीं है.’ बता दें कि चक्रवाती तूफान अम्फान ने पश्चिम बंगाल और ओडिशा में भारी तबाही मचाई है. हजारों मकान नष्ट हो गए और निचले इलाकों में पानी भर गया. अधिकारियों के मुताबिक पश्चिम बंगाल में क़रीब पांच लाख लोगों को और ओडिशा में क़रीब 1.58 लाख लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है.