पश्चिम बंगाल नहीं बनेगा ‘बांग्ला’, गृह मंत्रालय ने ठुकराया ममता बनर्जी का प्रस्ताव

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पश्चिम बंगाल: सीएम ममता बनर्जी ने पीएम को पत्र लिखकर लगाई गुहार, बंगाल आने वाली फ्लाइट्स पर लगे रोक

नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल का नमा बदलने का प्रस्ताव रखने वाली सीएम ममता बनर्जी को झटका लगा है। केन्द्र सरकार ने ममता के इस कोशिश पर विराम लगा दिया है। सीएम ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल का नाम बदलने का प्रस्ताव केन्द्र सरकार को भेजा था, जिसे गृह मंत्रालय ने ठुकरा दिया है।

West Bengal Will Not Become Bangla Center Rejects Mamata Banerjee Proposal :

गृह मंत्रालय ने ​कहा कि पश्चिम बंगाल का नाम नहीं बदला जाएगा। बता दें कि ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल का नाम बदलकर ‘बांग्ला’ रखने का प्रस्ताव पेश किया था। राज्यसभा में एक सवाल के जवाब में सरकार की ओर से बोलते हुए केंद्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि राज्य के नाम में परिवर्तन के लिए संवैधानिक संशोधन की जरूरत होती है।

बता दें कि ममता बनर्जी सरकार ने इससे पहले साल 2011 में भी राज्य का नाम बदल कर पश्चिम बंगो रखने का प्रस्ताव दिया था, लेकिन केंद्र ने तब भी प्रस्ताव को खारिज कर दिया था। इसके बाद  29 अगस्त, 2016 को सदन में आम राय से पारित एक विधेयक में तीन भाषाओं में तीन अलग-अलग नाम रखने का फैसला किया था। उसके मुताबिक इसका नाम बांग्ला में बांग्ला, अंग्रेजी में बेंगाल और हिंदी में बंगाल रखा जाना था। लेकिन केंद्र सरकार ने इस पर आपत्ति जताई थी।

नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल का नमा बदलने का प्रस्ताव रखने वाली सीएम ममता बनर्जी को झटका लगा है। केन्द्र सरकार ने ममता के इस कोशिश पर विराम लगा दिया है। सीएम ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल का नाम बदलने का प्रस्ताव केन्द्र सरकार को भेजा था, जिसे गृह मंत्रालय ने ठुकरा दिया है। गृह मंत्रालय ने ​कहा कि पश्चिम बंगाल का नाम नहीं बदला जाएगा। बता दें कि ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल का नाम बदलकर 'बांग्ला' रखने का प्रस्ताव पेश किया था। राज्यसभा में एक सवाल के जवाब में सरकार की ओर से बोलते हुए केंद्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि राज्य के नाम में परिवर्तन के लिए संवैधानिक संशोधन की जरूरत होती है। बता दें कि ममता बनर्जी सरकार ने इससे पहले साल 2011 में भी राज्य का नाम बदल कर पश्चिम बंगो रखने का प्रस्ताव दिया था, लेकिन केंद्र ने तब भी प्रस्ताव को खारिज कर दिया था। इसके बाद  29 अगस्त, 2016 को सदन में आम राय से पारित एक विधेयक में तीन भाषाओं में तीन अलग-अलग नाम रखने का फैसला किया था। उसके मुताबिक इसका नाम बांग्ला में बांग्ला, अंग्रेजी में बेंगाल और हिंदी में बंगाल रखा जाना था। लेकिन केंद्र सरकार ने इस पर आपत्ति जताई थी।