दिवाली पर क्या है पूजा का शुभ मुहूर्त, कैसे की जाती है लक्ष्मी-गणेश की पूजा?

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दिवाली पर क्या है पूजा का शुभ मुहूर्त, कैसे की जाती है लक्ष्मी-गणेश की पूजा?

नई दिल्ली। दिवाली का पर्व हिन्दू धर्म में काफी हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है और इसके लिए एक शुभ मुहुर्त होता है जिसमें पूजा की जाती है। इस बार व्यापारी वर्ग के लिए पूजा का शुभ समय दोपहर 2:17 से 3:41 तक, जबकि शाम की पूजा का समय 6:45 से 8:36 है। वहीं महानिशाकाल की पूजा का समय रात 1:14 से 3:27 तक का है।

What Is The Auspicious Time Of Worship On Diwali How Is Lakshmi Ganesh Worshiped :

तरक्की के लिए दिवाली पर पूजा अर्चना करने से पहले घर के सभी कमरों में रोशनी करें और घर के सभी दरवाजे और खिड़कियां खुली रखें साथ ही घर में गुलाब लगायें जिससे पूरे घर में गुलाब की खुशबू बनी रहे। आपको बता दें कार्तिक मास की अमावस्या को महानिशा काल में और स्थिर लग्न में महादेवी लक्ष्मी की पूजा अर्चना करने से जीवन में बहुत तरक्की मिलती है इसलिए दिवाली की पूजा का काफी महत्व है। इस पूजा के करने से पूरे वर्ष लक्ष्मी की क्रपा बनी रहती है।

इस तरह करें लक्ष्मी-गणेश की पूजा

लक्ष्मी गणेश की पजूा घर की उत्तर या पूर्व दिशा में करना चाहएि। पूजा करने से पहले एक लकड़ी के पटरे पर लाल वस्त्र बिछा लें और फिर उसी पर भगवान गणेश व लक्ष्मी जी साथ ही कुबेर जी की स्थापना कर दें। इसके बाद भगवान को रोली, धूप, मिष्ठान आदि अर्पण करें। भगवान गणेश को 27 हरी दूर्वा की पत्तियां और देवी लक्ष्मी को कमल का पुष्प अर्पित करें।

हाथ में जल लेकर देवी लक्ष्मी से प्रार्थना करें कि वो स्थाई रूप से आपके घर मे रहें। गणेश जी के लिए ॐ गं गणपतये नमः का मंत्रोच्चारण करें। लक्ष्मी जी के लिए ॐ ह्रीं श्रीं महालक्ष्मये नमः और कुबेर जी के लिए ॐ कुबेराय नमः मन्त्र का उच्चारण 108 बार करें। आप मिष्ठान सफेद रंग का ही अर्पित करें, साथ ही फल, साबूदाना, खीर का भोग भी लगाये तत्पश्चात सभी परिवार के लोग प्रसाद ग्रहण करें।

नई दिल्ली। दिवाली का पर्व हिन्दू धर्म में काफी हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है और इसके लिए एक शुभ मुहुर्त होता है जिसमें पूजा की जाती है। इस बार व्यापारी वर्ग के लिए पूजा का शुभ समय दोपहर 2:17 से 3:41 तक, जबकि शाम की पूजा का समय 6:45 से 8:36 है। वहीं महानिशाकाल की पूजा का समय रात 1:14 से 3:27 तक का है। तरक्की के लिए दिवाली पर पूजा अर्चना करने से पहले घर के सभी कमरों में रोशनी करें और घर के सभी दरवाजे और खिड़कियां खुली रखें साथ ही घर में गुलाब लगायें जिससे पूरे घर में गुलाब की खुशबू बनी रहे। आपको बता दें कार्तिक मास की अमावस्या को महानिशा काल में और स्थिर लग्न में महादेवी लक्ष्मी की पूजा अर्चना करने से जीवन में बहुत तरक्की मिलती है इसलिए दिवाली की पूजा का काफी महत्व है। इस पूजा के करने से पूरे वर्ष लक्ष्मी की क्रपा बनी रहती है। इस तरह करें लक्ष्मी-गणेश की पूजा लक्ष्मी गणेश की पजूा घर की उत्तर या पूर्व दिशा में करना चाहएि। पूजा करने से पहले एक लकड़ी के पटरे पर लाल वस्त्र बिछा लें और फिर उसी पर भगवान गणेश व लक्ष्मी जी साथ ही कुबेर जी की स्थापना कर दें। इसके बाद भगवान को रोली, धूप, मिष्ठान आदि अर्पण करें। भगवान गणेश को 27 हरी दूर्वा की पत्तियां और देवी लक्ष्मी को कमल का पुष्प अर्पित करें। हाथ में जल लेकर देवी लक्ष्मी से प्रार्थना करें कि वो स्थाई रूप से आपके घर मे रहें। गणेश जी के लिए ॐ गं गणपतये नमः का मंत्रोच्चारण करें। लक्ष्मी जी के लिए ॐ ह्रीं श्रीं महालक्ष्मये नमः और कुबेर जी के लिए ॐ कुबेराय नमः मन्त्र का उच्चारण 108 बार करें। आप मिष्ठान सफेद रंग का ही अर्पित करें, साथ ही फल, साबूदाना, खीर का भोग भी लगाये तत्पश्चात सभी परिवार के लोग प्रसाद ग्रहण करें।