जाने कैसे, तीन तलाक खत्म होने के बाद भी तलाक बोलने की प्रथा रहेगी जारी !

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What Is Triple Talaq And Instant Triple Talaq

सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने बहुमत के निर्णय में मुस्लिम समाज में एक बार में तीन बार तलाक देने की प्रथा को निरस्त करते हुए अपनी व्यवस्था में इसे असंवैधानिक, गैरकानूनी और शून्य करार दिया. कोर्ट ने कहा कि तीन तलाक की यह प्रथा कुरान के मूल सिद्धांत के खिलाफ है. प्रधान न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने अपने 365 पेज के फैसले में कहा, ‘3:2 के बहुमत से दर्ज की गई अलग-अलग राय के मद्देनजर‘तलाक-ए-बिद्दत’’ तीन तलाक को निरस्त किया जाता है.

प्रधान न्यायाधीश जगदीश सिंह खेहर और न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर ने तीन तलाक की इस प्रथा पर छह महीने की रोक लगाने की हिमायत करते हुए सरकार से कहा कि वह इस संबंध में कानून बनाए जबकि न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ, न्यायमूर्ति आर एफ नरिमन और न्यायमूर्ति उदय यू ललित ने इस प्रथा को संविधान का उल्लंघन करने वाला करार दिया. बहुमत के फैसले में कहा गया कि तीन तलाक सहित कोई भी प्रथा जो कुरान के सिद्धांतों के खिलाफ है, अस्वीकार्य है.

तीन न्यायाधीशों ने यह भी कहा कि तीन तलाक के माध्यम से विवाह विच्छेद करने की प्रथा मनमानी है और इससे संविधान का उल्लंघन होता हैं, इसलिए इसे निरस्त किया जाना चाहिए.

दरअसल, इस बहस का एक अहम हिस्सा ‘तीन तलाक बनाम इंस्टैंट तीन तलाक’ है. ये दोनों तलाक की दो अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं. इनको समझने के लिए पहले ये समझते हैं कि क़ुरान में किस प्रक्रिया वाले तीन तलाक की बात की गई है.

कुरान में तीन तलाक की प्रक्रिया :

क़ुरान के मुताबिक, जब पति-पत्नी के अलग होने की नौबत आ जाए तो, अल्लाह ने क़ुरान में उनके करीबी रिश्तेदारों या फिर उनका भला चाहने वालों को यह हिदायत दी है कि वो आगे बढ़ कर मामले सुलझाए और उनका रिश्ता सुधारें. लेकिन, अगर इससे बात नहीं बनती तो पति अपनी तलाक दिया जाता है. इसके लिए पत्नी के मासिकधर्म (पीरियड्स) के आने और उसके खत्म होने का इंतजार किया जाता है. इसके खत्म होने के बाद कम से कम गवाहों के सामने पति पत्नी को एक तलाक दे. उसे बस एक बार कहना है कि ‘मैं तुम्हे तलाक देता हूं’. इसके बाद पत्नी तीन महीने तक अपने ससुराल या पति के साथ रह सकती है. इस दौरान उसका सारा खर्च पति को उठाना होगा.

अगर पत्नी प्रेगनेंट है तो बच्चा होने तक वो साथ रह सकती है. ऐसी प्रक्रिया इस वजह से है ताकि पती अपनी पत्नी को दिए तलाक के फैसले के बारे में सोच सके. वो इन तीन महीनों के वक्त में सुलह करके तलाक वापस ले सके. इसके लिए जिन गवाहों के सामने तलाक दिया था, उन्हीं के सामने कहना होगा कि हमने फैसला बदल लिया है. कुरान के मुताबिक ऐसा, सिर्फ दो बार ही किया जा सकता है. लेकिन देखा गया है कि इस प्रक्रिया का पालन न करके कई बार मुस्लिम पुरूष एक बार में तीन तलाक दे देते हैं. वो कुरान में बताए गए वक्त को ध्यान में नहीं रखते। इसी को एक बार में तीन तलाक या इंस्टैंट तीन तलाक का नाम दिया गया है. इंस्टैंट तलाक न कुरान में है न शरियत में, फिर भी देश के मुसलमान इस तरीके से तलाक दे रहे हैं.

सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने बहुमत के निर्णय में मुस्लिम समाज में एक बार में तीन बार तलाक देने की प्रथा को निरस्त करते हुए अपनी व्यवस्था में इसे असंवैधानिक, गैरकानूनी और शून्य करार दिया. कोर्ट ने कहा कि तीन तलाक की यह प्रथा कुरान के मूल सिद्धांत के खिलाफ है. प्रधान न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने अपने 365 पेज के फैसले में कहा, ‘3:2 के बहुमत से दर्ज की गई अलग-अलग राय के मद्देनजर‘तलाक-ए-बिद्दत’’…