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कांग्रेस चिंतन शिविर में बनी रणनीति का क्या जमीन पर दिखेगा असर? नेतृत्व पर नहीं हुई चर्चा

पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस (Congress) को करारी हार मिली थी। इस हार के बाद से कांग्रेस (Congress) ने चिंतन शिविर का उदयपुर में आयोजन किया। तीन दिवसीय चले इस चिंतन शिविर में कांग्रेस नेताओं ने पार्टी में जान फूंकने के लिए कई योजनाएं तैयार की।

By शिव मौर्या 
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नई दिल्ली। पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस (Congress) को करारी हार मिली थी। इस हार के बाद से कांग्रेस (Congress) ने चिंतन शिविर का उदयपुर में आयोजन किया। तीन दिवसीय चले इस चिंतन शिविर में कांग्रेस नेताओं ने पार्टी में जान फूंकने के लिए कई योजनाएं तैयार की। सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) ने उद्घाटन भाषण में जब कहा कि आप यहां कुछ भी कहने के लिए स्वतंत्र हैं तो माना गया कि मंथन में खुलकर चर्चा होगी।

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लेकिन तीन दिनों के शिविर के समापन में जो सामने आया, वह था अल्पसंख्यकों, दलितों एवं ओबीसी वर्गों के लिए कोटा और 2 अक्टूबर से यात्रा का ऐलान। इसके साथ ही चिंतिन शिविर में संगठन में कमजोर वर्गों के नेताओं को कोटा देने पर चर्चा की गई। इसके साथ ही किसानों को एमएसपी गारंटी को लेकर भी चर्चा की गई।

चिंतन शिविर में जनता से कट जाने की बात भी कही गई लेकिन इस बात पर चर्चा नहीं हुई कि जनता के बीच में कैसे पहुंचा जाएगा। राहुल गांधी ने कहा कि हमें पद से ज्यादा चर्चा अपने काम की करनी होगी। हालांकि, इस पर चर्चा नहीं की गई की ये काम कौन करेगा और किसे इस काम की जिम्मेदारी दी गई है।

एक तरफ कांग्रेस लीडरशिप यह दावा करती दिखी कि उसने असंतुष्टों की भी सुनवाई की है, लेकिन उनके सुझावों पर अहम नहीं होता दिखा। जी-23 की मांग थी कि कांग्रेस संसदीय बोर्ड का गठन किया जाए, इस पर कोई फैसला नहीं लिया गया।

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