रविशंकर होते कौन हैं राम मंदिर की मध्यस्थता करने वाले: हिन्दू महासभा

अयोध्या। राम मंदिर विवाद को सुलझाने के लिए वर्षों से प्रयास किये जा रहे हैं लेकिन यह विवाद आज भीजस का तश बना है। सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मामले पर हाथ खड़े करते हुए आपसी सहमती से निपटाने की सलाह दे डाली। हाल के दिनों में अध्यात्म गुरु श्री श्री रवि शंकर ने इस मुद्दे को सुलझाने में मदद करने का ऐलान किया है जिसके बाद से तमाम धर्म गुरु रवि शंकर से मुलाक़ात कर रहे हैं। हालांकि हिन्दू महासभा ने रविशंकर के मध्यस्थता का विरोध किया है और उनके इस कदम को राजनीति से प्रेरित करार दिया है।

हिन्दू महासभा के राष्ट्रीय महासचिव मुन्ना कुमार शर्मा का कहना है कि रविशंकर एक अध्यात्म गुरु है, वो कौन होते है इस मामले की मध्यस्थता करने वाले। उन्होंने आगे कहा कि जो व्यक्ति आज तक एक बार भी अयोध्या दर्शन के लिए नहीं आया वो कौन होता है बिचौलिया करने वाला।

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संगठन के महासचिव मुन्ना शर्मा ने कहा गया कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ बेंच ने मंदिर के पक्ष में अपना फैसला सुनाया था। जिसके आधार पर सर्वोच्च अदालत में उनकी जीत निश्चित है। ऐसे में संगठन ने सरकार से अपील की करते हुए संसद में विशेष कानून बनाकर श्रीराम जन्मस्थान पर मंदिर निर्माण का रास्ता साफ करने की मांग की।

हिंदू महासभा के पदाधिकारियों का कहना है कि मध्यस्थता की बता कहने वाले श्रीश्री रविशंकर कभी राम लला के दर्शन के लिए अयोध्या तक नहीं पहुंचे। ऐसे में बिना किसी मजबूत आधार के इस मसले में मध्यस्ता की बात करना अपने आप में हास्यास्पद है। संगठन के अनुसार आध्यात्मिक गुरू 2019 में बीजेपी को जीत दिलाने के लिए इस राम मंदिर मुद्दे को दबाने की पैरवी कर रहे थे।

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हिंदूवादी संगठन ने यह भी आरोप लगाया गया कि जब रविशंकर राम मंदिर मामले में पक्षकार ही नहीं है तो वह कैसे इस मामले में मध्यस्थता करा सकते हैं। वहीं संगठन ने यह भी दावा कियास गया कि यदि ऐस होता भी तो कोई भी पक्षकार उन्हें मध्यस्थता को स्वीकार नहीं करेगा। वहीं संगठन की ओर जारी बयान में कहा गया कि राम मंदिर मामले में सर्वोच्च अदालत में जारी केस में अखिल भारतीय हिंदू महासभा प्रमुख पक्षकार है।

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