सवाल: अाखिर प्रदेश सरकार में मंत्री पद के आगे क्यों नहीं रास आ रही सांसदी

Yogi Aditya Nath
सवाल: अाखिर प्रदेश सरकार में मंत्री पद के आगे क्यों नहीं रास आ रही सांसदी

Why Member Of Parliament Resigning For Post Of Minister In State Government

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार के मुख्यमंत्री और एक उप मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बिराजमान दो नेता सांसद हैं। यानी देश की सबसे बड़ी पंचायत का हिस्सा हैं। इसके बावजूद ये दोनों नेता अपनी संसद सदस्यता को त्याग कर उत्तर प्रदेश की विधानसभा के सदस्य बनकर बतौर मुख्यमंत्री और मंत्री अपनी कुर्सी बचाने के लिए तत्पर हैं।

यहां सवाल किसी के मंत्री या सांसद बनने को लेकर नहीं है, बल्कि सवाल यह है कि जनता के सामने सांसद बनने के लिए वोट मांगने वाले इन राजनेताओं को आखिरकार प्रदेश सरकारों में ऐसा क्या नजर आता है कि वे यहां कुर्सी पाने के लिए अपनी संसद सदस्यता को छोड़ने को तैयार हो जाते हैं।

क्या प्रदेश सरकार में मंत्री की कुर्सी संसद की सदस्यता से ज्यादा ताकतवर है —

एक नेता जो देश की सबसे बड़ी पंचायत में लाखों लोगों की आवाज बनता है वह आखिर विधायक बनकर मंत्री की कुर्सी को क्यों हथियाना चाहता है। क्या ऐसा करने की मंशा कुर्सी में नीहित शक्ति को ​हासिल करना है या फिर ताकत के नजरिए से सांसद के पद की अहमियत को कम आंका जाना।

सियासी पंडितों की माने तो सांसद और विधायक दोनों ही पद सियासी रूप से अहमियत रखते हैं। सांसद केन्द्र सरकार के सामने अपने क्षेत्रवासियों की आवाज होता है तो विधायक प्रदेश सरकार में। भारतीय लोकतांत्रिक व्यवस्था में दोनों पद जिम्मेदारी वाले हैं। लेकिन जहां बात प्रदेश सरकार में मंत्री पद और उसके साथ मिलने वाली शक्ति की आती है तो वह विधायक की जिम्मेदारी के साथ एक उपलब्धी के रूप में देखी जाती है। वर्तमान में ऐसा ही कुछ उत्तर प्रदेश में देखने को मिल रहा है। जहां योगी आदित्यनाथ ने अपनी संसद सदस्यता से ज्यादा वरीयता मुख्यमंत्री पद को दी है। तो उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने उप मुख्यमंत्री पद को।

अगर देखा जाए तो राजनेता भी आजकल अपनी सीवी मजबूत करने में लगे हैं। जो विधायक बन गया उसे मंत्री बनना है और जो मंत्री बन गया उसे मुख्यमंत्री। सब रेस में दौड़ रहे हैं। सांसद का पद एक प्रदेश सरकार के मुख्यमंत्री और मंत्री पद की अपेक्षा कम ग्लैमरस है। सीधे शब्दों में कहा जाए तो एक मुख्यमंत्री और मंत्री की कलम में कई ऐसी ताकतें होती हैं जिनके बल पर एक्शन लिए जा सकते है, लेकिन एक सांसद और विधायक केवल सिफारिश कर सकते है, जिस पर एक्शन लेने का अधिकार मुख्यमंत्री और मंत्री के ही हाथ में होता है।

अंदरखाने की बात —
मंत्री की कुर्सी की बहुत बड़ी अहमियत इस कुर्सी से होकर तिजोरी को जाने वाला रास्ता भी है। यह रास्ता उसी व्यक्ति के लिए खुलता है जिसका कब्जा कुर्सी पर होता है।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार के मुख्यमंत्री और एक उप मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बिराजमान दो नेता सांसद हैं। यानी देश की सबसे बड़ी पंचायत का हिस्सा हैं। इसके बावजूद ये दोनों नेता अपनी संसद सदस्यता को त्याग कर उत्तर प्रदेश की विधानसभा के सदस्य बनकर बतौर मुख्यमंत्री और मंत्री अपनी कुर्सी बचाने के लिए तत्पर हैं। यहां सवाल किसी के मंत्री या सांसद बनने को लेकर नहीं है, बल्कि सवाल यह है कि जनता के सामने सांसद बनने…